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Hamirpur (Himachal) News: गलवान घाटी में बहनों के संदेश पढ़ भावुक हुए जवान, फोटो भेज कहा शुक्रिया
Sun, 10 Aug 2025 12:46 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 10 Aug 2025 12:46 AM IST
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गलवान घाटी में छात्राओं की ओर से भेजी गई राखियों को बांधते जवान। संस्थान।
- फोटो : संवाद
टौणी देवी (हमीरपुर)। रक्षाबंधन पर्व इस वर्ष राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टौणी देवी की गाइड्स छात्राओं के लिए कुछ खास रहा है। सरहद से राखी के पर्व पर मिले फोटो ने इस बार पर्व को काफी खास बना दिया है।
विद्यालय की गाइड्स ने सरहद पर तैनात वीर जवानों के लिए अपने हाथों से राखियां, ग्रीटिंग कार्ड और भावनात्मक संदेश भेजे थे। विशेष बात यह रही कि यह राखियां ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीधे लेह और गलवान घाटी तक पहुंचीं, जहां जवानों ने इन्हें अपनी कलाई पर बांधकर बेटियों को स्नेह, आशीर्वाद और धन्यवाद भेजा।
प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा के मार्गदर्शन और गाइड कैप्टन कुसुम लता के सहयोग से छात्राओं ने यह पहल की है। प्रधानाचार्य ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूरे देश में सैनिकों के प्रति सम्मान और संवेदना की लहर है। इस वर्ष की राखियां सिर्फ रक्षासूत्र नहीं, बल्कि देश के रक्षकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक हैं। जब यह राखियां गलवान घाटी में तैनात सैनिकों तक पहुंचीं, तो सैनिक भी भावुक हो उठे।
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सेना के एक अधिकारी ने फोन और संदेश के माध्यम से विद्यालय तक शुभकामनाएं पहुंचाईं और बताया कि जवानों ने गर्व और खुशी से इन राखियों को अपनी कलाई पर बांधा है। उन्होंने कहा कि इन राखियों में हमें सिर्फ धागा नहीं, बल्कि अपने देश की बहनों का विश्वास, प्रेम और दुआएं महसूस हुईं। एक जवान ने भावुक होकर संदेश भेजा कि हम यहां ठंडी हवाओं और बर्फीली ऊंचाइयों पर डटे हैं, लेकिन आज यह राखी हमें घर का अहसास और बहनों का प्यार दे गईं।
जवानों ने सभी छात्राओं को आशीर्वाद और धन्यवाद देते हुए कहा कि उनका यह प्रेम सैनिकों के मनोबल को और ऊंचा करता है। प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जब छात्रों का हृदय देश के लिए धड़कने लगे, तभी सच्चे अर्थों में शिक्षा सार्थक होती है। आगामी वर्षों में भी विद्यालय इस परंपरा को जारी रखेगा।
राखी बांधने के फोटो वापस मिलने पर चहकी छात्राएं
छात्राओं श्रेया, चेतना और प्रियांशु ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनकी राखियां सैनिक भाइयों की कलाई पर बंध चुकी हैं, तो वे खुशी से चहक उठीं। जवानों ने स्कूल प्रबंधन को राखी बांधने के फोटो भी भेजे हैं, जिस देख छात्राएं बेहद खुश हैं।
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विद्यालय की गाइड्स ने सरहद पर तैनात वीर जवानों के लिए अपने हाथों से राखियां, ग्रीटिंग कार्ड और भावनात्मक संदेश भेजे थे। विशेष बात यह रही कि यह राखियां ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीधे लेह और गलवान घाटी तक पहुंचीं, जहां जवानों ने इन्हें अपनी कलाई पर बांधकर बेटियों को स्नेह, आशीर्वाद और धन्यवाद भेजा।
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प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा के मार्गदर्शन और गाइड कैप्टन कुसुम लता के सहयोग से छात्राओं ने यह पहल की है। प्रधानाचार्य ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूरे देश में सैनिकों के प्रति सम्मान और संवेदना की लहर है। इस वर्ष की राखियां सिर्फ रक्षासूत्र नहीं, बल्कि देश के रक्षकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक हैं। जब यह राखियां गलवान घाटी में तैनात सैनिकों तक पहुंचीं, तो सैनिक भी भावुक हो उठे।
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सेना के एक अधिकारी ने फोन और संदेश के माध्यम से विद्यालय तक शुभकामनाएं पहुंचाईं और बताया कि जवानों ने गर्व और खुशी से इन राखियों को अपनी कलाई पर बांधा है। उन्होंने कहा कि इन राखियों में हमें सिर्फ धागा नहीं, बल्कि अपने देश की बहनों का विश्वास, प्रेम और दुआएं महसूस हुईं। एक जवान ने भावुक होकर संदेश भेजा कि हम यहां ठंडी हवाओं और बर्फीली ऊंचाइयों पर डटे हैं, लेकिन आज यह राखी हमें घर का अहसास और बहनों का प्यार दे गईं।
जवानों ने सभी छात्राओं को आशीर्वाद और धन्यवाद देते हुए कहा कि उनका यह प्रेम सैनिकों के मनोबल को और ऊंचा करता है। प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जब छात्रों का हृदय देश के लिए धड़कने लगे, तभी सच्चे अर्थों में शिक्षा सार्थक होती है। आगामी वर्षों में भी विद्यालय इस परंपरा को जारी रखेगा।
राखी बांधने के फोटो वापस मिलने पर चहकी छात्राएं
छात्राओं श्रेया, चेतना और प्रियांशु ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनकी राखियां सैनिक भाइयों की कलाई पर बंध चुकी हैं, तो वे खुशी से चहक उठीं। जवानों ने स्कूल प्रबंधन को राखी बांधने के फोटो भी भेजे हैं, जिस देख छात्राएं बेहद खुश हैं।