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Hamirpur (Himachal) News: एसएमसी ने राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार की चयन प्रकिया पर उठाए सवाल
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कहा, बाहल पटियाला के शिक्षक सुशील ने स्कूल विकास में दिया है हर संभव योगदान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिझड़ी (हमीरपुर)। राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार की चयन प्रक्रिया पर राजकीय प्राथमिक पाठशाला बाहल पटियालां की स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान और अभिभावकों ने सवाल उठाए हैं। कहा कि जेबीटी शिक्षक सुशील कुमार ने पाठशाला के चहुंमुखी विकास के लिए हर संभव प्रयत्न किए और पाठशाला में बच्चों का नामांकन 10 से 40 तक पहुंचाया। बच्चों के शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन किया।पाठशाला में पूर्णतया अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई शुरू की। गरीब विद्यार्थियों को स्वयं स्मार्ट वर्दियां और लेखन सामग्री उपलब्ध करवाई। पाठशाला में कंप्यूटर की व्यवस्था की और छुट्टी के दिनों में पाठशाला के सौंदर्यीकरण के लिए शिक्षक ने पाठशाला की चहारदीवारी, शौचालयों व बच्चों के बैठने के लिए डेस्कों पर स्वयं पेंट भी किया। परिणामस्वरूप लोगों ने अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर इस पाठशाला में दाखिल करवाया।शिक्षक की अपनी बेटी भी इसी पाठशाला में पढ़ती है। इससे लोगों में एक अच्छा संदेश गया है। उक्त सभी प्रयासों के बावजूद ऐसे शिक्षक का चयन राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए न किया जाना व्यवस्था पर सवाल उठाता है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष शशि पाल शर्मा, सदस्यों ज्ञान चंद शर्मा, रीना देवी, अंजना कुमारी, योगेश तथा बच्चों के अभिभावकों ने सरकार से आग्रह किया है कि राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार चयन प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिझड़ी (हमीरपुर)। राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार की चयन प्रक्रिया पर राजकीय प्राथमिक पाठशाला बाहल पटियालां की स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान और अभिभावकों ने सवाल उठाए हैं। कहा कि जेबीटी शिक्षक सुशील कुमार ने पाठशाला के चहुंमुखी विकास के लिए हर संभव प्रयत्न किए और पाठशाला में बच्चों का नामांकन 10 से 40 तक पहुंचाया। बच्चों के शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन किया।पाठशाला में पूर्णतया अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई शुरू की। गरीब विद्यार्थियों को स्वयं स्मार्ट वर्दियां और लेखन सामग्री उपलब्ध करवाई। पाठशाला में कंप्यूटर की व्यवस्था की और छुट्टी के दिनों में पाठशाला के सौंदर्यीकरण के लिए शिक्षक ने पाठशाला की चहारदीवारी, शौचालयों व बच्चों के बैठने के लिए डेस्कों पर स्वयं पेंट भी किया। परिणामस्वरूप लोगों ने अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर इस पाठशाला में दाखिल करवाया।शिक्षक की अपनी बेटी भी इसी पाठशाला में पढ़ती है। इससे लोगों में एक अच्छा संदेश गया है। उक्त सभी प्रयासों के बावजूद ऐसे शिक्षक का चयन राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए न किया जाना व्यवस्था पर सवाल उठाता है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष शशि पाल शर्मा, सदस्यों ज्ञान चंद शर्मा, रीना देवी, अंजना कुमारी, योगेश तथा बच्चों के अभिभावकों ने सरकार से आग्रह किया है कि राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार चयन प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए।