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Hamirpur (Himachal) News: चलोह की सीमा ने स्वदेशी उत्पादों का शुरू किया कारोबार, बनीं आत्मनिर्भर
Mon, 05 Jan 2026 12:23 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 05 Jan 2026 12:23 AM IST
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चलोह की सीमा घर पर तैयार किए गए स्वदेशी उत्पादों के साथ। संवाद
हमीरपुर। ग्रामीण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही चलोह गांव की सीमा आज महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ स्वदेशी उत्पादों के कारोबार से सीमा न केवल स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हैं।
अचार, बढ़ियां, पापड़ और सूखे मेवों से बने लड्डुओं के निर्माण से सीमा हर माह 20 से 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। सीमा एक सामान्य ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। परिवार की सीमित आय और बढ़ते खर्चों को देखते हुए उन्होंने कुछ अलग करने का मन बनाया। शुरू में उन्होंने घर में उपयोग होने वाले पारंपरिक खाद्य पदार्थों को बनाने पर ध्यान दिया।
इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि बाजार में शुद्ध और घरेलू तरीके से बने स्वदेशी उत्पादों की काफी मांग है। यहीं से उनके मन में व्यवसाय शुरू करने का विचार आया।कारोबार के शुरुआती दौर में परिवार के लिए अचार, पापड़ और बढ़ियां बनाती थीं, लेकिन जब रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने इन उत्पादों की सराहना की और खरीदने की इच्छा जताई तो उन्होंने इसे व्यवसाय का रूप देने का निर्णय लिया।
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उन्होंने घर में उपलब्ध संसाधनों के साथ अचार और बढ़ियां बनाकर गांव में बेचना शुरू किया। गुणवत्ता और स्वाद की वजह से उनके उत्पाद जल्द ही लोकप्रिय होने लगे। मांग बढ़ने पर उन्होंने पापड़ और सूखे मेवों से बने लड्डुओं को भी अपने उत्पादों में शामिल किया। अपने स्वदेशी उत्पादों के माध्यम से सीमा अब हर माह लगभग 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं।
उन्होंने अपने साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ना शुरू किया। वह महिलाओं को अचार, पापड़, बढ़ियां और लड्डू बनाने का प्रशिक्षण देती हैं। साथ ही उन्हें यह भी सिखाती हैं कि किस प्रकार उत्पादों की पैकेजिंग, मूल्य निर्धारण और बिक्री की जा सकती है।
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अचार, बढ़ियां, पापड़ और सूखे मेवों से बने लड्डुओं के निर्माण से सीमा हर माह 20 से 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। सीमा एक सामान्य ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। परिवार की सीमित आय और बढ़ते खर्चों को देखते हुए उन्होंने कुछ अलग करने का मन बनाया। शुरू में उन्होंने घर में उपयोग होने वाले पारंपरिक खाद्य पदार्थों को बनाने पर ध्यान दिया।
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इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि बाजार में शुद्ध और घरेलू तरीके से बने स्वदेशी उत्पादों की काफी मांग है। यहीं से उनके मन में व्यवसाय शुरू करने का विचार आया।कारोबार के शुरुआती दौर में परिवार के लिए अचार, पापड़ और बढ़ियां बनाती थीं, लेकिन जब रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने इन उत्पादों की सराहना की और खरीदने की इच्छा जताई तो उन्होंने इसे व्यवसाय का रूप देने का निर्णय लिया।
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उन्होंने घर में उपलब्ध संसाधनों के साथ अचार और बढ़ियां बनाकर गांव में बेचना शुरू किया। गुणवत्ता और स्वाद की वजह से उनके उत्पाद जल्द ही लोकप्रिय होने लगे। मांग बढ़ने पर उन्होंने पापड़ और सूखे मेवों से बने लड्डुओं को भी अपने उत्पादों में शामिल किया। अपने स्वदेशी उत्पादों के माध्यम से सीमा अब हर माह लगभग 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं।
उन्होंने अपने साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ना शुरू किया। वह महिलाओं को अचार, पापड़, बढ़ियां और लड्डू बनाने का प्रशिक्षण देती हैं। साथ ही उन्हें यह भी सिखाती हैं कि किस प्रकार उत्पादों की पैकेजिंग, मूल्य निर्धारण और बिक्री की जा सकती है।

चलोह की सीमा घर पर तैयार किए गए स्वदेशी उत्पादों के साथ। संवाद