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पहाड़ी लोकगीत अम्मा पुछदी के संस्कृत वर्जन का विमोचन
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राज्यस्तरीय संस्कृत सप्ताह के समापन पर अम्मा पुछदी के संस्कृत वर्जन लोकगीत का जिला भाषा अधिकार?
- फोटो : Hamirpur-HP
नादौन। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग हमीरपुर ने बुधवार को संस्कृत सप्ताह के उपलक्ष्य पर जिला भाषा अधिकारी निक्कू राम की अगुवाई में यशपाल साहित्य प्रतिष्ठान संस्कृति सदन नादौन में राज्य स्तरीय संस्कृत परिसंवाद और संस्कृत कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत प्रवक्ता डॉ. बलवंत शर्मा ने की तथा संस्कृत कॉलेज डोहगी के सहायक आचार्य डॉ. मुकेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता दिलीप विशिष्ठ रहे। कार्यक्रम में लगभग 30 संस्कृत विशेषज्ञों ने शोध पत्र, वाचन और कविता पाठ किया। इन शोध पत्रों का प्रमुख विषय संस्कृत आधारित हिमाचली संस्कृति, हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की भाषाओं, बोलियों पर संस्कृत का प्रभाव, हिमाचल प्रदेश के शिलालेखों, ताम्रपत्रों तथा अभिलेखों में संस्कृत का स्थान, हिमाचल प्रदेश के संस्कृत साहित्यकार एवं उनकी कृतियां, हिमाचल प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में द्वितीय राजभाषा संस्कृत के व्यावहारिक पक्ष एवं चुनौतियां आदि विषय निर्धारित किए गए थे।
डॉ. मनोज कुमार ने गद्दी बोली में पुलिंग, स्त्रीलिंग का विस्तार पूर्वक भेद बताया और गद्दी बोली में प्रयुक्त होने वाले संस्कृत शब्दों से अवगत करवाया। डॉ. मुकेश शर्मा ने हिमाचल में अपनाई जाने वाली प्रत्येक संस्कृति और अध्यात्म को संस्कृत भाषा से जोड़ा और कहा कि हिमाचल प्रदेश में बोली जाने वाली प्रत्येक बोली में संस्कृत भाषा का पूर्ण प्रभाव है।
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जिला भाषा अधिकारी निक्कू राम ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद किया और आगे भी इस प्रकार के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आह्वान किया। राज्यस्तरीय परिसंवाद व कवि सम्मेलन में भाषा एवं संस्कृति विभाग हमीरपुर के सौजन्य से पहाड़ी लोकगीत अम्मा पुछदी के संस्कृत वर्जन का विमोचन किया। जिसे डॉ. मनोज कुमार की ओर से लिखा गया है। इस लोक-गीत में कुमारी करिश्मा व वीना डोगरा ने अभिनय किया है, जबकि संस्कृत शिक्षक हीरा सिंह की ओर से इसे निर्देशित व संपादित किया गया है।
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कार्यक्रम में मुख्य वक्ता दिलीप विशिष्ठ रहे। कार्यक्रम में लगभग 30 संस्कृत विशेषज्ञों ने शोध पत्र, वाचन और कविता पाठ किया। इन शोध पत्रों का प्रमुख विषय संस्कृत आधारित हिमाचली संस्कृति, हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की भाषाओं, बोलियों पर संस्कृत का प्रभाव, हिमाचल प्रदेश के शिलालेखों, ताम्रपत्रों तथा अभिलेखों में संस्कृत का स्थान, हिमाचल प्रदेश के संस्कृत साहित्यकार एवं उनकी कृतियां, हिमाचल प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में द्वितीय राजभाषा संस्कृत के व्यावहारिक पक्ष एवं चुनौतियां आदि विषय निर्धारित किए गए थे।
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डॉ. मनोज कुमार ने गद्दी बोली में पुलिंग, स्त्रीलिंग का विस्तार पूर्वक भेद बताया और गद्दी बोली में प्रयुक्त होने वाले संस्कृत शब्दों से अवगत करवाया। डॉ. मुकेश शर्मा ने हिमाचल में अपनाई जाने वाली प्रत्येक संस्कृति और अध्यात्म को संस्कृत भाषा से जोड़ा और कहा कि हिमाचल प्रदेश में बोली जाने वाली प्रत्येक बोली में संस्कृत भाषा का पूर्ण प्रभाव है।
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जिला भाषा अधिकारी निक्कू राम ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद किया और आगे भी इस प्रकार के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आह्वान किया। राज्यस्तरीय परिसंवाद व कवि सम्मेलन में भाषा एवं संस्कृति विभाग हमीरपुर के सौजन्य से पहाड़ी लोकगीत अम्मा पुछदी के संस्कृत वर्जन का विमोचन किया। जिसे डॉ. मनोज कुमार की ओर से लिखा गया है। इस लोक-गीत में कुमारी करिश्मा व वीना डोगरा ने अभिनय किया है, जबकि संस्कृत शिक्षक हीरा सिंह की ओर से इसे निर्देशित व संपादित किया गया है।