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Hamirpur (Himachal) News: रेस्टोरेंट का ईटीपी प्लांट निकला लीक, संचालक को नोटिस जारी कर सात दिन में मांगा जवाब
Sat, 14 Mar 2026 01:14 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 14 Mar 2026 01:14 AM IST
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हमीरपुर। पीलिया प्रभावित क्षेत्र में बड़ू-मोहिं पेयजल योजना के समीप संचालित एक नामी रेस्टोरेंट का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में लीक पाया गया है। जांच में सामने आया है कि प्लांट से निकलने वाला दूषित पानी सीधे जमली खड्ड में मिल रहा है, जिससे आसपास के जल स्रोतों के प्रदूषित होने की आशंका गहरा गई है।
एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट वह प्रणाली होती है, जिसके माध्यम से उद्योगों या प्रतिष्ठानों से निकलने वाले गंदे पानी में मौजूद हानिकारक रसायन, कार्बनिक पदार्थ, भारी धातुएं और अन्य ठोस कणों को हटाकर पानी को सुरक्षित बनाया जाता है। इसके बाद ही इसे पर्यावरण मानकों के अनुसार नदी-नालों में छोड़ा जाता है या दोबारा उपयोग के योग्य बनाया जाता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने कुछ दिन पहले निरीक्षण के दौरान ईटीपी में लीकेज पाया था और इसे तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जमली खड्ड में लगातार गंदा पानी मिलने की शिकायतों पर शुक्रवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल शक्ति विभाग के अधिकारियों ने मौके पर संयुक्त निरीक्षण किया।
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निरीक्षण के दौरान पेयजल योजना के आसपास से तीन स्थानों से पानी के नमूने लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए ऊना प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों को मौके पर योजना के समीप बदबूदार और गंदा पानी एकत्र मिला, जो प्रारंभिक जांच में रेस्टोरेंट से निकलता हुआ पाया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि रेस्टोरेंट के पीछे स्थित औद्योगिक क्षेत्र में अधिकतर इकाइयों में वेयरहाउस और फर्नीचर निर्माण का काम चल रहा है।
ऐसे में गंदे पानी के स्रोत को लेकर रेस्टोरेंट संचालक से जवाब तलब किया गया है। अब सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि जमा पानी स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है।
उधर, स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाल ही में पेयजल योजना के सोर्स से लिए गए पानी के सैंपल भी फेल पाए गए हैं और पानी पीने योग्य नहीं मिला है। ऐसे में क्षेत्र में फैले पीलिया के प्रकोप को भी इस प्रदूषण से जोड़कर देखा जा रहा है।
जमली धाम में व्यवस्था मिली दुरुस्त
अधिकारियों ने पेयजल योजना के सोर्स से लेकर करीब दो किलोमीटर दूर स्थित जमली धाम तक क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान जल स्रोतों और आसपास की व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की गई। निरीक्षण के दौरान जमली धाम क्षेत्र में व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। यहां सैकड़ों गायों के होने के बावजूद साफ-सफाई और जल स्रोतों की स्थिति बेहतर मिली। क्षेत्र में कई मंदिर होने और आयोजनों के चलते लोगों की आवाजाही अधिक रहने के बावजूद पानी के दूषित होने की कोई आशंका नहीं पाई गई।
कोट
रेस्टोरेंट संचालक को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। पानी के सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
-प्रवीन कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हमीरपुर
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एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट वह प्रणाली होती है, जिसके माध्यम से उद्योगों या प्रतिष्ठानों से निकलने वाले गंदे पानी में मौजूद हानिकारक रसायन, कार्बनिक पदार्थ, भारी धातुएं और अन्य ठोस कणों को हटाकर पानी को सुरक्षित बनाया जाता है। इसके बाद ही इसे पर्यावरण मानकों के अनुसार नदी-नालों में छोड़ा जाता है या दोबारा उपयोग के योग्य बनाया जाता है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने कुछ दिन पहले निरीक्षण के दौरान ईटीपी में लीकेज पाया था और इसे तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जमली खड्ड में लगातार गंदा पानी मिलने की शिकायतों पर शुक्रवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल शक्ति विभाग के अधिकारियों ने मौके पर संयुक्त निरीक्षण किया।
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निरीक्षण के दौरान पेयजल योजना के आसपास से तीन स्थानों से पानी के नमूने लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए ऊना प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों को मौके पर योजना के समीप बदबूदार और गंदा पानी एकत्र मिला, जो प्रारंभिक जांच में रेस्टोरेंट से निकलता हुआ पाया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि रेस्टोरेंट के पीछे स्थित औद्योगिक क्षेत्र में अधिकतर इकाइयों में वेयरहाउस और फर्नीचर निर्माण का काम चल रहा है।
ऐसे में गंदे पानी के स्रोत को लेकर रेस्टोरेंट संचालक से जवाब तलब किया गया है। अब सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि जमा पानी स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है।
उधर, स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाल ही में पेयजल योजना के सोर्स से लिए गए पानी के सैंपल भी फेल पाए गए हैं और पानी पीने योग्य नहीं मिला है। ऐसे में क्षेत्र में फैले पीलिया के प्रकोप को भी इस प्रदूषण से जोड़कर देखा जा रहा है।
जमली धाम में व्यवस्था मिली दुरुस्त
अधिकारियों ने पेयजल योजना के सोर्स से लेकर करीब दो किलोमीटर दूर स्थित जमली धाम तक क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान जल स्रोतों और आसपास की व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की गई। निरीक्षण के दौरान जमली धाम क्षेत्र में व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। यहां सैकड़ों गायों के होने के बावजूद साफ-सफाई और जल स्रोतों की स्थिति बेहतर मिली। क्षेत्र में कई मंदिर होने और आयोजनों के चलते लोगों की आवाजाही अधिक रहने के बावजूद पानी के दूषित होने की कोई आशंका नहीं पाई गई।
कोट
रेस्टोरेंट संचालक को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। पानी के सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
-प्रवीन कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हमीरपुर