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Hamirpur (Himachal) News: रजिया ने सिलाई को बनाया आत्मनिर्भरता का आधार
Thu, 01 Jan 2026 12:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 01 Jan 2026 12:58 AM IST
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समताना की रजिया बेगम दुकान पर महिलाओं को कपड़े सिलने की ट्रेनिंग देते हुए। संवाद
बिझड़ी(हमीरपुर)। समताना गांव की रजिया बेगम ने सिलाई को आत्मनिर्भरता का आधार बनाकर महिलाओं के लिए मिसाल पेश की है। घर पर सीमित संसाधनों में उन्होंने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि गांव की पांच अन्य महिलाओं को भी रोजगार देने का कार्य किया है।
एमए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने घर पर रहकर दैनिक कार्य शुरू किए, लेकिन स्वरोजगार अपनाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। इसी बीच पंचायत में एक वर्ष तक सिलाई का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने ने घर से ही काम शुरू किया।
शुरुआत छोटे ऑर्डर से हुई, लेकिन मेहनत और गुणवत्ता के बाद उनका काम गांव से बाहर तक पहचान बनाने लगा। आज उन्होंने मुख्य बाजार में भी सिलाई केंद्र के साथ कपड़ों की दुकान खोल ली है। इससे उनके कार्य में बढ़ौतरी हुई है। अब वह अपनी दुकान से विभिन्न प्रकार के सूटों की कंटिग करके महिलाओं के पास सिलने के लिए देती हैं, जिससे महिलाएं घर बैठे आसानी से कार्य कर लेती है।
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वहीं, रेडीमेट कपड़ों की बिक्री करके वह हर महीने 20 से 25 हजार रुपये तक की आमदनी कर लेती हैं। रजिया का सिलाई केंद्र अब महिलाओं के लिए रोजगार का भरोसेमंद ठिकाना बन चुका है। महिलाएं त्योहार शादियों के लिए दूर-दूर से उनके पास कपड़े सिलाने के लिए पहुंच रही हैं।
रजिया का कहना है कि पंचायत से मिला प्रशिक्षण उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। मेहनत के आधार पर कोई भी कार्य आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने पति को दिया है।
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एमए की डिग्री लेने के बाद उन्होंने घर पर रहकर दैनिक कार्य शुरू किए, लेकिन स्वरोजगार अपनाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। इसी बीच पंचायत में एक वर्ष तक सिलाई का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने ने घर से ही काम शुरू किया।
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शुरुआत छोटे ऑर्डर से हुई, लेकिन मेहनत और गुणवत्ता के बाद उनका काम गांव से बाहर तक पहचान बनाने लगा। आज उन्होंने मुख्य बाजार में भी सिलाई केंद्र के साथ कपड़ों की दुकान खोल ली है। इससे उनके कार्य में बढ़ौतरी हुई है। अब वह अपनी दुकान से विभिन्न प्रकार के सूटों की कंटिग करके महिलाओं के पास सिलने के लिए देती हैं, जिससे महिलाएं घर बैठे आसानी से कार्य कर लेती है।
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वहीं, रेडीमेट कपड़ों की बिक्री करके वह हर महीने 20 से 25 हजार रुपये तक की आमदनी कर लेती हैं। रजिया का सिलाई केंद्र अब महिलाओं के लिए रोजगार का भरोसेमंद ठिकाना बन चुका है। महिलाएं त्योहार शादियों के लिए दूर-दूर से उनके पास कपड़े सिलाने के लिए पहुंच रही हैं।
रजिया का कहना है कि पंचायत से मिला प्रशिक्षण उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। मेहनत के आधार पर कोई भी कार्य आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने पति को दिया है।

समताना की रजिया बेगम दुकान पर महिलाओं को कपड़े सिलने की ट्रेनिंग देते हुए। संवाद