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Hamirpur (Himachal) News: प्रशासन की लापरवाही से 33 वर्षों से जिला पुस्तकालय को नहीं मिला स्थायी भवन
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किन्नौर के शिक्षित वर्ग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे युवाओं को झेलनी पड़ रही परेशानी
कागजी कार्रवाई तक ही सिमटकर रह गया जिला पुस्तकालय का मामला
रतन लाल नेगी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर में जिला प्रशासन की अनदेखी युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे परीक्षार्थियों पर भारी पड़ रही है। जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण जिले के रिकांगपिओ में एकमात्र जिला राजकीय पुस्तकालय को 33 वर्षों में अपना स्थायी भवन नहीं मिल पाया है। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी परेशानियां झेलने को मजबूर हैं। अगर उचित स्थान पर पुस्तकालय भवन मिले तो शिक्षित वर्ग, वरिष्ठ नागरिक और युवा इस पुस्तकालय में पढ़ाई कर सकते हैं। गौर हो कि 27 सितंबर 2018 से अभी तक किन्नौर से चार उपायुक्त आकर चले गए, लेकिन किसी भी उपायुक्त ने जिला राजकीय पुस्तकालय को स्थायी भवन दिलाने में प्रतिबद्धता नहीं दिखाई। भवन के नाम पर केवल फाइलें हीं इधर-उधर कागजी कार्रवाई में घूमती रहीं। वर्तमान में जिला पुस्तकालय वन मंडल अधिकारी जिला किन्नौर के कुटीर भवन में अस्थायी रूप से चल रहा है। कल्पा से स्थानांतरित होकर रिकांगपिओ आने के बाद से यह पुस्तकालय घुमंतू की भांति स्थायी भवन के लिए भटक रहा है। इससे पहले यह पुस्तकालय सब्जी मोहल्ला भवन में चल रहा था, लेकिन जिला पंचायत अधिकारी भवन को 27 सितंबर 2018 असुरक्षित घोषित कर इस भवन में ताला जड़ दिया था। तबसे जिला प्रशासन ने नए भवन की खोज कर रहा है। पुस्तकालय में 30,000 बहुमूल्य पुस्तकें लकड़ी की 100 अलमारियों में धूल फांक रही हैं। इससे पहले पूर्व उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने बीते वर्ष सितंबर माह में जिला पुस्तकालय के लिए पुराने सचिवालय भवन में शिक्षा विभाग के उपनिदेशक उच्च और एलिमेंट्री के कमरे को जिला पुस्तकालय भवन बनाने की मंजूरी प्रदान की थी। इसमें दो हॉल और छह कमरे खाली पड़े हैं, लेकिन अफसोस इस बात का है कि यह सिर्फ फाइलों तक ही सिमटकर रह गया। सूत्रों के मुताबिक अब बाबा साहब आंबेडकर भवन में पुस्तकालय को स्थानांतरित करने की योजना चल रही है, लेकिन अनुसूचित जाति वर्ग के संगठनों ने इससे मनाही की है। उनका कहना है कि बाबा साहब आंबेडकर भवन में कई प्रकार के सेमीनार, कार्यशालाएं और गतिविधियों चलती रहती हैं।
कोट्स
जिला प्रशासन के पास दो-तीन भवनों का विकल्प है। इन्हें देखकर जल्द ही पुस्तकालय के लिए भवन उपलब्ध किया जाएगा, जिससे शिक्षित वर्ग, विद्यार्थियों, राहगीरों और नागरिक को पुस्तकालय का लाभ मिल सके।
डॉ. अमित कुमार शर्मा, उपायुक्त किन्नौर
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कागजी कार्रवाई तक ही सिमटकर रह गया जिला पुस्तकालय का मामला
रतन लाल नेगी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर में जिला प्रशासन की अनदेखी युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे परीक्षार्थियों पर भारी पड़ रही है। जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण जिले के रिकांगपिओ में एकमात्र जिला राजकीय पुस्तकालय को 33 वर्षों में अपना स्थायी भवन नहीं मिल पाया है। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी परेशानियां झेलने को मजबूर हैं। अगर उचित स्थान पर पुस्तकालय भवन मिले तो शिक्षित वर्ग, वरिष्ठ नागरिक और युवा इस पुस्तकालय में पढ़ाई कर सकते हैं। गौर हो कि 27 सितंबर 2018 से अभी तक किन्नौर से चार उपायुक्त आकर चले गए, लेकिन किसी भी उपायुक्त ने जिला राजकीय पुस्तकालय को स्थायी भवन दिलाने में प्रतिबद्धता नहीं दिखाई। भवन के नाम पर केवल फाइलें हीं इधर-उधर कागजी कार्रवाई में घूमती रहीं। वर्तमान में जिला पुस्तकालय वन मंडल अधिकारी जिला किन्नौर के कुटीर भवन में अस्थायी रूप से चल रहा है। कल्पा से स्थानांतरित होकर रिकांगपिओ आने के बाद से यह पुस्तकालय घुमंतू की भांति स्थायी भवन के लिए भटक रहा है। इससे पहले यह पुस्तकालय सब्जी मोहल्ला भवन में चल रहा था, लेकिन जिला पंचायत अधिकारी भवन को 27 सितंबर 2018 असुरक्षित घोषित कर इस भवन में ताला जड़ दिया था। तबसे जिला प्रशासन ने नए भवन की खोज कर रहा है। पुस्तकालय में 30,000 बहुमूल्य पुस्तकें लकड़ी की 100 अलमारियों में धूल फांक रही हैं। इससे पहले पूर्व उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक ने बीते वर्ष सितंबर माह में जिला पुस्तकालय के लिए पुराने सचिवालय भवन में शिक्षा विभाग के उपनिदेशक उच्च और एलिमेंट्री के कमरे को जिला पुस्तकालय भवन बनाने की मंजूरी प्रदान की थी। इसमें दो हॉल और छह कमरे खाली पड़े हैं, लेकिन अफसोस इस बात का है कि यह सिर्फ फाइलों तक ही सिमटकर रह गया। सूत्रों के मुताबिक अब बाबा साहब आंबेडकर भवन में पुस्तकालय को स्थानांतरित करने की योजना चल रही है, लेकिन अनुसूचित जाति वर्ग के संगठनों ने इससे मनाही की है। उनका कहना है कि बाबा साहब आंबेडकर भवन में कई प्रकार के सेमीनार, कार्यशालाएं और गतिविधियों चलती रहती हैं।
कोट्स
जिला प्रशासन के पास दो-तीन भवनों का विकल्प है। इन्हें देखकर जल्द ही पुस्तकालय के लिए भवन उपलब्ध किया जाएगा, जिससे शिक्षित वर्ग, विद्यार्थियों, राहगीरों और नागरिक को पुस्तकालय का लाभ मिल सके।
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डॉ. अमित कुमार शर्मा, उपायुक्त किन्नौर