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2015 में लड़ा था प्रधान का चुनाव, इस बार मतदाता सूची से नाम गायब
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question on panchyat voter list
भोरंज (हमीरपुर)। उपमंडल भोरंज की ग्राम पंचायत टिक्करी मिन्हासां में वर्ष 2015 के चुनाव में प्रधान पद की उम्मीदवार का नाम ही इस बार मतदाता सूची से गायब हो गया। मतदाता सूचियों में प्रदेशभर से आ रही गड़बड़झाले की सूचना से लोगों में चुनाव आयोग के प्रति रोष है। लोगों का कहना है कि दर्जन भर पंचायतों के लोग मतदाता सूचियों में नाम न होने की शिकायत कर चुके हैं, फिर भी समय रहते कोई भी कार्रवाई नहीं की गई।
भोरंज सहित पूरे प्रदेश में पंचायती राज विभाग के चुनाव में आम लोगों सहित कई प्रत्याशियों के नाम भी मतदाता सूची से गायब पाए गए थे। जिस कारण मैदान में उतरने के चाहवान चुनाव लड़ने से और अन्य मतदान से वंचित रहे हैं। टिक्करी मिन्हासां पंचायत की सुमना देवी ने वर्ष 2015 में प्रधान का चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार जब वह अपने पति बलवंत कुमार के साथ मतदान करने आईं तो उनका नाम मतदाता सूची से गायब था।
ऐसे में लोग पंचायत सूचियों पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि लोकसभा व विधानसभा की मतदाता सूची जो हर वर्ष अपडेट होती है उसके अनुसार पंचायत मतदाता सूची क्यों अपडेट नहीं हुई। उधर, खंड विकास अधिकारी भोरंज मनोज ने बताया कि सरकार ने लोगों को अपना मत जांचने के लिए दो माह की समय अवधि निर्धारित की थी, जो 24 दिसंबर को खत्म हुई है। कई लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सूची नहीं जांची। जिस कारण वह मत करने से वंचित रहे हैं।
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भोरंज सहित पूरे प्रदेश में पंचायती राज विभाग के चुनाव में आम लोगों सहित कई प्रत्याशियों के नाम भी मतदाता सूची से गायब पाए गए थे। जिस कारण मैदान में उतरने के चाहवान चुनाव लड़ने से और अन्य मतदान से वंचित रहे हैं। टिक्करी मिन्हासां पंचायत की सुमना देवी ने वर्ष 2015 में प्रधान का चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार जब वह अपने पति बलवंत कुमार के साथ मतदान करने आईं तो उनका नाम मतदाता सूची से गायब था।
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ऐसे में लोग पंचायत सूचियों पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि लोकसभा व विधानसभा की मतदाता सूची जो हर वर्ष अपडेट होती है उसके अनुसार पंचायत मतदाता सूची क्यों अपडेट नहीं हुई। उधर, खंड विकास अधिकारी भोरंज मनोज ने बताया कि सरकार ने लोगों को अपना मत जांचने के लिए दो माह की समय अवधि निर्धारित की थी, जो 24 दिसंबर को खत्म हुई है। कई लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सूची नहीं जांची। जिस कारण वह मत करने से वंचित रहे हैं।
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