{"_id":"698653bec2619bf70c0946cf","slug":"plans-to-develop-pong-havent-come-out-of-the-files-hamirpur-hp-news-c-95-1-kng1037-219314-2026-02-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: फाइलों से बाहर नहीं निकलीं पौंग को विकसित करने की योजनाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: फाइलों से बाहर नहीं निकलीं पौंग को विकसित करने की योजनाएं
विज्ञापन
बरियाल (कांगड़ा)। पौंग बांध झील बेहतरीन कनेक्टिविटी के बावजूद सरकार की अनदेखी का शिकार बनी हुई है। यह झील वाइल्ड लाइफ विंग की लचर प्रणाली और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित नहीं हो सकी है। पौंग झील प्रवासी पक्षियों के आगमन से अक्तूबर से मार्च तक गुलजार रहती है। सरकार और पर्यटन विभाग की पर्यटकों को झील तक खींचने की योजनाएं फाइलों तक ही सीमित हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रामसर साइट पर करोड़ों के निवेश के बाद भी पर्यटन विकास में कई चुनौतियां बनी हुई हैं। झील को विकसित करने में वन्यजीव विंग की प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही पौंग झील में पर्यटन न बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। पंचायत सुकनाड़ा के पास पौंग झील के मुहाने पर बने मुख्य द्वार पर पर्यटन के लिए बनाई गई कई झोपड़ियां और बुनियादी ढांचे अधूरे हैं। अब तो झोपड़ीनुमा ये हट झाड़ियों से चारों तरफ इस तरह ढक चुकी हैं। करोड़ों की लागत से बने इन 16 हटों की कोई भी सुध नहीं ले रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अक्तूबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक 20 हजार से भी ज्यादा पर्यटक और पक्षी प्रेमी पौग झील का भ्रमण कर चुके हैं, लेकिन यहां रहने और खाने-पानी की कोई भी सुविधा नहीं होने के कारण पर्यटकों को मायूसी हाथ लगती है। क्षेत्रवासियों रजनीश, रितेश, संदीप, राजीव, हरबंश और विनोद आदि का कहना है कि पर्यटक स्वागत केंद्र गगल हवाई अड्डा या किसी अन्य ऐसे स्थान पर बनाया जाना चाहिए जहां पर्यटक आते हों।
वर्ष 2021 में जयराम सरकार में वन मंत्री बनने के बाद राकेश पठानिया ने ईको टूरिज्म योजना के तहत पौंग झील को विश्व प्रसिद्ध रॉक कट मसरूर मंदिर को जोड़ कर पर्यटन की योजना बनाई गई थी। वर्ष 2022 में सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी मुख्यमंत्री बनने के बाद स्वदेश दर्शन-02 के तहत पौंग झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की घोषणा की थी, लेकिन यह योजना भी अभी तक धरातल पर नहीं उत्तर पाई है।
विज्ञापन
पौंग झील में प्रवासी पक्षियों के आगमन के बाद अक्तूबर 2025 से दिसंबर 2025 तक 20 हजार के करीब पर्यटक भ्रमण कर इन पक्षियों की चहलकदमी का आनंद उठा चुके हैं। स्वदेश दर्शन-2 योजना के तहत सरकार पर्यटन विभाग और वन्यप्राणी विभाग के साथ पौंग झील में पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से पर्यटकों के लिए सुविधाएं जुटाने के लिए प्रयत्नरत हैं। - सरिता कौंडल, परिक्षेत्र अधिकारी वन्यप्राणी क्षेत्र नगरोटा सूरियां
विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रामसर साइट पर करोड़ों के निवेश के बाद भी पर्यटन विकास में कई चुनौतियां बनी हुई हैं। झील को विकसित करने में वन्यजीव विंग की प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही पौंग झील में पर्यटन न बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। पंचायत सुकनाड़ा के पास पौंग झील के मुहाने पर बने मुख्य द्वार पर पर्यटन के लिए बनाई गई कई झोपड़ियां और बुनियादी ढांचे अधूरे हैं। अब तो झोपड़ीनुमा ये हट झाड़ियों से चारों तरफ इस तरह ढक चुकी हैं। करोड़ों की लागत से बने इन 16 हटों की कोई भी सुध नहीं ले रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अक्तूबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक 20 हजार से भी ज्यादा पर्यटक और पक्षी प्रेमी पौग झील का भ्रमण कर चुके हैं, लेकिन यहां रहने और खाने-पानी की कोई भी सुविधा नहीं होने के कारण पर्यटकों को मायूसी हाथ लगती है। क्षेत्रवासियों रजनीश, रितेश, संदीप, राजीव, हरबंश और विनोद आदि का कहना है कि पर्यटक स्वागत केंद्र गगल हवाई अड्डा या किसी अन्य ऐसे स्थान पर बनाया जाना चाहिए जहां पर्यटक आते हों।
विज्ञापन
वर्ष 2021 में जयराम सरकार में वन मंत्री बनने के बाद राकेश पठानिया ने ईको टूरिज्म योजना के तहत पौंग झील को विश्व प्रसिद्ध रॉक कट मसरूर मंदिर को जोड़ कर पर्यटन की योजना बनाई गई थी। वर्ष 2022 में सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी मुख्यमंत्री बनने के बाद स्वदेश दर्शन-02 के तहत पौंग झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की घोषणा की थी, लेकिन यह योजना भी अभी तक धरातल पर नहीं उत्तर पाई है।
विज्ञापन
पौंग झील में प्रवासी पक्षियों के आगमन के बाद अक्तूबर 2025 से दिसंबर 2025 तक 20 हजार के करीब पर्यटक भ्रमण कर इन पक्षियों की चहलकदमी का आनंद उठा चुके हैं। स्वदेश दर्शन-2 योजना के तहत सरकार पर्यटन विभाग और वन्यप्राणी विभाग के साथ पौंग झील में पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से पर्यटकों के लिए सुविधाएं जुटाने के लिए प्रयत्नरत हैं। - सरिता कौंडल, परिक्षेत्र अधिकारी वन्यप्राणी क्षेत्र नगरोटा सूरियां