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आउटसोर्स कर्मचारियों को दस माह बाद मिला महज चार माह का वेतन
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उपायुक्त को समस्याओं और मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपते जल शक्ति विभाग के आउससोर्स कर्मी।
- फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। जल शक्ति विभाग की पेयजल योजनाओं को संचालित कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को 10 महीने बाद महज चार माह का वेतन दिया गया है। मात्र पांच से छह हजार मासिक वेतन पर रखे कर्मचारियों के लिए अपने परिवार का भरण पोषण करना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा की अगुवाई में जल शक्ति विभाग आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त हमीरपुर से मिला। उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की गई है। खरवाड़ा ने कहा कि 80 से अधिक कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। विभाग ठेकेदार को प्रति कर्मचारी कितने रुपये का भुगतान करता है, इसका कोई पता नहीं है। कर्मियों को सिर्फ पांच से छह हजार मासिक वेतन दिया जा रहा है।
इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब जल शक्ति विभाग के अधिकारियों से इस संदर्भ में बात की जाती है तो उनका यही तर्क होता है कि यह कर्मचारी ठेकेदार के माध्यम से रखे गए हैं। हालांकि पॉलिसी में यह नियम है कि यदि आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण हो रहा तो विभाग इसकी जांच कर सकता है।
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उन्होंने कहा कि सरकार को आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनानी चाहिए। वेतन विसंगति को दूर करने का भी प्रावधान हो। ताकि उन्हें परिवार का भरण-पोषण करने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इससे पहले भी जल शक्ति विभाग नादौन तथा धनेटा के आउटसोर्स कर्मचारी उपायुक्त को ज्ञापन सौंप चुके हैं। उस दौरान भी समय पर वेतन न मिलने की मांग रखी गई थी। उपायुक्त से मिलने के बाद इन्हें कुछ महीने के वेतन की अदायगी की गई। अभी भी कई महीनों के वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। मामला प्रशासन के ध्यान में लाने के बाद ठेकेदारों द्वारा इन्हें नौकरी से निकालने तक की धमकी दी जा रही है।
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हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा की अगुवाई में जल शक्ति विभाग आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त हमीरपुर से मिला। उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की गई है। खरवाड़ा ने कहा कि 80 से अधिक कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। विभाग ठेकेदार को प्रति कर्मचारी कितने रुपये का भुगतान करता है, इसका कोई पता नहीं है। कर्मियों को सिर्फ पांच से छह हजार मासिक वेतन दिया जा रहा है।
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इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब जल शक्ति विभाग के अधिकारियों से इस संदर्भ में बात की जाती है तो उनका यही तर्क होता है कि यह कर्मचारी ठेकेदार के माध्यम से रखे गए हैं। हालांकि पॉलिसी में यह नियम है कि यदि आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण हो रहा तो विभाग इसकी जांच कर सकता है।
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उन्होंने कहा कि सरकार को आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनानी चाहिए। वेतन विसंगति को दूर करने का भी प्रावधान हो। ताकि उन्हें परिवार का भरण-पोषण करने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इससे पहले भी जल शक्ति विभाग नादौन तथा धनेटा के आउटसोर्स कर्मचारी उपायुक्त को ज्ञापन सौंप चुके हैं। उस दौरान भी समय पर वेतन न मिलने की मांग रखी गई थी। उपायुक्त से मिलने के बाद इन्हें कुछ महीने के वेतन की अदायगी की गई। अभी भी कई महीनों के वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। मामला प्रशासन के ध्यान में लाने के बाद ठेकेदारों द्वारा इन्हें नौकरी से निकालने तक की धमकी दी जा रही है।