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दो साल में पूरे नहीं हो पाए मुआवजा राशि के आदेश
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हमीरपुर। जलशक्ति विभाग में जिला न्यायालय के मुआवजा आदेशों का दो सालों बाद भी पालन नहीं हो पाया है। विभाग ने इन आदेशों का पालन करवाने के लिए उपमंडलाधिकारी नादौन को करीब तीन बार लिखित में सूचना दी है। इसके बावजूद न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। गांव हड़ेटा भाहलू के रहने वाले आशोक शर्मा ने बताया कि वह प्रदेश के एक सरकारी विभाग से सेवानिवृत्त हैं।
वर्ष 2007-08 में जब वह ड्यूटी पर धर्मशाला में तैनात थे तो पीछे से जलशक्ति विभाग ने उनकी भूमि पर पंपहाउस का निर्माण कर दिया। इस पंप हाउस से कई गांवों में पेयजल आपूर्ति की जाती है। जब उन्हें घर आने पर इस बात की सूचना मिली तो जलशक्ति विभाग से संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया।
आखिर में उन्हें जिला न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। 21 अक्तूबर 2019 को जिला न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए जलशक्ति विभाग को छह माह के भीतर संबंधित भूमि का मुआवजा देने के आदेश जारी किए। मुआवजा न मिलने की सूरत में पंपहाउस को संबंधित भूमि से हटाने के आदेश भी दिए। इस पर जिला प्रशासन के आदेश पर निजी भूमि का अधिग्रहण करने के लिए एक समझौता (नेगोशिएशन) कमेटी का गठन किया गया। इसके चेयरमैन एसडीएम नादौन को बनाया गया।
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न्यायालय के आदेश के बाद जलशक्ति विभाग बड़सर ने 12 अक्तूबर 2020, 19 फरवरी 2021 और 31 अगस्त 2021 को तीन बार इस कमेटी के चेयरमैन को निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए बैठक बुलाने बारे आग्रह किया। अभी तक इस बैठक का आयोजन नहीं हो पाया है। इससे संबंधित परिवार में आक्रोश है। अशोक शर्मा ने उपायुक्त से गुहार लगाई है कि एसडीएम नादौन को इस कमेटी की शीघ्र बैठक बुलाने के निर्देश जारी किए जाएं।
अन्यथा अब न्यायालय में अवमानना का केस दायर किया जाएगा। उधर, इस बारे में जलशक्ति विभाग बड़सर के अधिशासी अभियंता राजीव सहगल ने कहा कि 31 अगस्त को फिर से एसडीएम नादौन को पत्र लिखकर कमेटी की बैठक बुलाने के लिए कहा गया है। जमीन की मुआवजा राशि कमेटी ही तय करेगी। पूर्व में भी दो बार पत्र लिखा जा चुका है।
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वर्ष 2007-08 में जब वह ड्यूटी पर धर्मशाला में तैनात थे तो पीछे से जलशक्ति विभाग ने उनकी भूमि पर पंपहाउस का निर्माण कर दिया। इस पंप हाउस से कई गांवों में पेयजल आपूर्ति की जाती है। जब उन्हें घर आने पर इस बात की सूचना मिली तो जलशक्ति विभाग से संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया।
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आखिर में उन्हें जिला न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। 21 अक्तूबर 2019 को जिला न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए जलशक्ति विभाग को छह माह के भीतर संबंधित भूमि का मुआवजा देने के आदेश जारी किए। मुआवजा न मिलने की सूरत में पंपहाउस को संबंधित भूमि से हटाने के आदेश भी दिए। इस पर जिला प्रशासन के आदेश पर निजी भूमि का अधिग्रहण करने के लिए एक समझौता (नेगोशिएशन) कमेटी का गठन किया गया। इसके चेयरमैन एसडीएम नादौन को बनाया गया।
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न्यायालय के आदेश के बाद जलशक्ति विभाग बड़सर ने 12 अक्तूबर 2020, 19 फरवरी 2021 और 31 अगस्त 2021 को तीन बार इस कमेटी के चेयरमैन को निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए बैठक बुलाने बारे आग्रह किया। अभी तक इस बैठक का आयोजन नहीं हो पाया है। इससे संबंधित परिवार में आक्रोश है। अशोक शर्मा ने उपायुक्त से गुहार लगाई है कि एसडीएम नादौन को इस कमेटी की शीघ्र बैठक बुलाने के निर्देश जारी किए जाएं।
अन्यथा अब न्यायालय में अवमानना का केस दायर किया जाएगा। उधर, इस बारे में जलशक्ति विभाग बड़सर के अधिशासी अभियंता राजीव सहगल ने कहा कि 31 अगस्त को फिर से एसडीएम नादौन को पत्र लिखकर कमेटी की बैठक बुलाने के लिए कहा गया है। जमीन की मुआवजा राशि कमेटी ही तय करेगी। पूर्व में भी दो बार पत्र लिखा जा चुका है।