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Hamirpur (Himachal) News: बीपीएल चयन सर्वे के मानदंडों का किया विरोध, सरकार से की बदलने की मांग
Thu, 24 Jul 2025 12:57 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 24 Jul 2025 12:57 AM IST
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बीपीएल सर्वे के विरोध में उपायुक्त अमरजीत सिंह को ज्ञापन सौंपते झंबर गांव के ग्रामीण। स्रोत जाग
हमीरपुर। ग्राम पंचायत दिम्मी के वार्ड नंबर दो झंबर के ग्रामीणों ने बीपीएल चयन के लिए निर्धारित नए मानदंडों का विरोध जताया है। बुधवार को ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल बीपीएल सर्वे की नई गाइडलाइन के विरोध में उपायुक्त अमरजीत सिंह से मिला।
ग्रामीणों ने कहा कि नई गाइडलाइन के कारण 60 जरूरतमंद परिवार बीपीएल सर्वे की सूची से बाहर हो गए हैं। पंचायत की ओर से कुल दो परिवारों को बीपीएल सूची में रखा गया है। ऐसे में जरूरतमंद परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा।
ग्रामीणों में प्रवीण कुमार, राकेश, विमला, प्रीतम, सुमन आदि ने कहा कि पहले विकलांग, विधवा, वृद्ध व असहाय लोग ही बीपीएल सूची में शामिल होते थे, लेकिन नई गाइडलाइन के अनुसार यदि विकलांगता 50 फीसदी से कम है या कोई व्यक्ति दिहाड़ी मजदूरी कर रहा है। तो उसे बीपीएल में नहीं माना जा रहा, भले ही उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो। कुछ परिवारों के पास मात्र दो पक्के कमरे हैं, जिन्हें उनके पूर्वजों की ओर से या सरकारी सहायता से बनाया गया था, उन्हें अमीर मान लिया गया है।
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ऐसे परिवार आज भी कर्ज में डूबे हुए हैं और बच्चों की पढ़ाई व बुजुर्गों की दवा तक मुश्किल से कर पा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से समस्या का समाधान करने की मांग की है। वहीं, उपायुक्त अमरजीत सिंह ने ग्रामीणों का ज्ञापन लेकर सरकार को प्रेषित करने का आश्वासन दिया है।
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ग्रामीणों ने कहा कि नई गाइडलाइन के कारण 60 जरूरतमंद परिवार बीपीएल सर्वे की सूची से बाहर हो गए हैं। पंचायत की ओर से कुल दो परिवारों को बीपीएल सूची में रखा गया है। ऐसे में जरूरतमंद परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा।
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ग्रामीणों में प्रवीण कुमार, राकेश, विमला, प्रीतम, सुमन आदि ने कहा कि पहले विकलांग, विधवा, वृद्ध व असहाय लोग ही बीपीएल सूची में शामिल होते थे, लेकिन नई गाइडलाइन के अनुसार यदि विकलांगता 50 फीसदी से कम है या कोई व्यक्ति दिहाड़ी मजदूरी कर रहा है। तो उसे बीपीएल में नहीं माना जा रहा, भले ही उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो। कुछ परिवारों के पास मात्र दो पक्के कमरे हैं, जिन्हें उनके पूर्वजों की ओर से या सरकारी सहायता से बनाया गया था, उन्हें अमीर मान लिया गया है।
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ऐसे परिवार आज भी कर्ज में डूबे हुए हैं और बच्चों की पढ़ाई व बुजुर्गों की दवा तक मुश्किल से कर पा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से समस्या का समाधान करने की मांग की है। वहीं, उपायुक्त अमरजीत सिंह ने ग्रामीणों का ज्ञापन लेकर सरकार को प्रेषित करने का आश्वासन दिया है।