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पांच कक्षाओं के लिए महज तीन कमरे, बरामदे और मैदान में बैठ रहे नौनिहाल
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प्राइमरी स्कूल हमीरपुर में कमरों की कमी के चलते बरामदे में बैठाए छात्र।
- फोटो : Hamirpur-HP
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हमीरपुर। जिला मुख्यालय के राजकीय प्राथमिक केंद्रीय स्कूल में पर्याप्त भवन न होने से नौनिहाल बरामदे और आंगन में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। हालत यह है कि पाठशाला की पांच कक्षाओं के लिए महज तीन कमरे हैं, जबकि स्कूल में बच्चों की संख्या अधिक है। इसके अलावा एक छोटा कार्यालय और रसोईघर है।
महज तीन कमरों में पहली से पांचवीं तक के बच्चों को एक साथ पढ़ाना मुश्किल होता है। विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए अलग-अलग अध्यापक तो हैं, लेकिन कमरों की कमी के कारण एक कमरे में दो कक्षाएं भी बैठा दी जाती हैं। सर्दियों के मौसम में तो बच्चे धूप में आंगन में बैठा दिए जाते हैं, लेकिन गर्मियों और बरसात में एक कमरे में दो-दो कक्षाएं बैठाई जाती हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते भी बच्चों को उचित दूरी में बैठाने के निर्देश हैं।
इस पाठशाला में पांचवीं कक्षा तक 161 छात्र अध्ययनरत हैं। सीएचटी नीलम शर्मा का कहना है कि स्कूल में कुल 161 बच्चे हैं। कोरोना काल में सभी को एक साथ बैठाना संक्रमण को बढ़ा सकता है। इस कारण बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें बरामदे में पढ़ाया जा रहा है। सरकार ने हाल ही में स्कूल में भवन का निर्माण करवाने के लिए राशि स्वीकृत की थी, जिससे स्कूल की छत, रसोईघर का निर्माण करवाया गया है। वहीं प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक संजय ठाकुर का कहना है कि इस संदर्भ में उन्हें किसी भी प्रकार की सूचना या शिकायत नहीं मिली है। स्कूल में जाकर निरीक्षण कर बच्चों के बैठने की व्यवस्था जांची जाएगी। अगर जरूरत होगी तो भवन निर्माण के लिए जल्द बजट उपलब्ध करवाया जाएगा।
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महज तीन कमरों में पहली से पांचवीं तक के बच्चों को एक साथ पढ़ाना मुश्किल होता है। विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए अलग-अलग अध्यापक तो हैं, लेकिन कमरों की कमी के कारण एक कमरे में दो कक्षाएं भी बैठा दी जाती हैं। सर्दियों के मौसम में तो बच्चे धूप में आंगन में बैठा दिए जाते हैं, लेकिन गर्मियों और बरसात में एक कमरे में दो-दो कक्षाएं बैठाई जाती हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते भी बच्चों को उचित दूरी में बैठाने के निर्देश हैं।
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इस पाठशाला में पांचवीं कक्षा तक 161 छात्र अध्ययनरत हैं। सीएचटी नीलम शर्मा का कहना है कि स्कूल में कुल 161 बच्चे हैं। कोरोना काल में सभी को एक साथ बैठाना संक्रमण को बढ़ा सकता है। इस कारण बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें बरामदे में पढ़ाया जा रहा है। सरकार ने हाल ही में स्कूल में भवन का निर्माण करवाने के लिए राशि स्वीकृत की थी, जिससे स्कूल की छत, रसोईघर का निर्माण करवाया गया है। वहीं प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक संजय ठाकुर का कहना है कि इस संदर्भ में उन्हें किसी भी प्रकार की सूचना या शिकायत नहीं मिली है। स्कूल में जाकर निरीक्षण कर बच्चों के बैठने की व्यवस्था जांची जाएगी। अगर जरूरत होगी तो भवन निर्माण के लिए जल्द बजट उपलब्ध करवाया जाएगा।
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