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Hamirpur (Himachal) News: पुरानी मशीन ही पथराई आंखों से ढूंढेगी पथरी, नई से इंकार
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नई लेप्रोस्कोपिक मशीन का सपना टूटा
मेडिकल कॉर्पोरेशन ने तकनीकी कारण देकर टेंडर करने से किया मना
डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के शल्य विभाग ने भेजी थी मांग
कॉर्पोरेशन ने जताई महंगी मशीन देने में असमर्थता, अब पुरानी मशीन का सहारा
पिछले एक वर्ष से चल रही नई मशीन लेने के लिए जद्दोजहद, नहीं हो पाई पूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को नई लेप्रोस्कोपिक मशीन मिलने का सपना फिलहाल टूट गया है। पुरानी मशीन ही पथराई आंखों से मरीजों की पथरी ढूंढेगी। मेडिकल कॉर्पोरेशन ने नई लेप्रोस्कोपिक मशीन की खरीद के लिए तकनीकी कारण देखकर टेंडर करने से मना कर दिया है। अस्पताल के शल्य विभाग ने नई लेप्रोस्कोपिक मशीन की खरीद के लिए मेडिकल कॉर्पोरेशन को मांग भेजी थी। इसमें लेप्रोस्कोपिक मशीन के फीचर्स किस तरह के चाहिए इस बारे में बताया गया था। लेकिन, मेडिकल कॉर्पोरेशन ने तकनीकी कारण देकर टेंडर करने से मना कर दिया। इसके लिए बाकायदा मेडिकल कॉर्पोरेशन की ओर से मेडिकल कॉलेज को लेटर जारी कर दिया गया है।
बहरहाल डेढ़ साल बाद अब पुरानी मशीन से ही अस्पताल में पथरी के ऑपरेशन शुरू हुए हैं। नई मशीन मिलने का सपना फिलहाल टूट गया है। अस्पताल में करीब 22 वर्ष पुरानी मशीन से ऑपरेशन किया जा रहे हैं। डेढ़ वर्ष तक यह मशीन खराब रही। अब दोबारा आठ लाख रुपये इसी मशीन पर खर्च कर कैमरा फिक्स करवाया गया है और ऑपरेशन किए जा रहे हैं। नई लेप्रोस्कोपिक मशीन की लागत दो करोड़ रुपये तक की है। इसे कॉर्पोरेशन ने देने में असमर्थता जताई है। अब अस्पताल के पास महज पुरानी मशीन का ही सहारा बचा है। पिछले एक वर्ष से नई मशीन लेने के लिए जद्दोजहद चल रही थी जो पूरी नहीं हो पाई। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि वर्तमान में लेप्रोस्कोपिक मशीन से ऑपरेशन हो रहे हैं और नई मशीन की खरीद के लिए कार्रवाई हो रही है।
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मेडिकल कॉर्पोरेशन ने तकनीकी कारण देकर टेंडर करने से किया मना
डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के शल्य विभाग ने भेजी थी मांग
कॉर्पोरेशन ने जताई महंगी मशीन देने में असमर्थता, अब पुरानी मशीन का सहारा
पिछले एक वर्ष से चल रही नई मशीन लेने के लिए जद्दोजहद, नहीं हो पाई पूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को नई लेप्रोस्कोपिक मशीन मिलने का सपना फिलहाल टूट गया है। पुरानी मशीन ही पथराई आंखों से मरीजों की पथरी ढूंढेगी। मेडिकल कॉर्पोरेशन ने नई लेप्रोस्कोपिक मशीन की खरीद के लिए तकनीकी कारण देखकर टेंडर करने से मना कर दिया है। अस्पताल के शल्य विभाग ने नई लेप्रोस्कोपिक मशीन की खरीद के लिए मेडिकल कॉर्पोरेशन को मांग भेजी थी। इसमें लेप्रोस्कोपिक मशीन के फीचर्स किस तरह के चाहिए इस बारे में बताया गया था। लेकिन, मेडिकल कॉर्पोरेशन ने तकनीकी कारण देकर टेंडर करने से मना कर दिया। इसके लिए बाकायदा मेडिकल कॉर्पोरेशन की ओर से मेडिकल कॉलेज को लेटर जारी कर दिया गया है।
बहरहाल डेढ़ साल बाद अब पुरानी मशीन से ही अस्पताल में पथरी के ऑपरेशन शुरू हुए हैं। नई मशीन मिलने का सपना फिलहाल टूट गया है। अस्पताल में करीब 22 वर्ष पुरानी मशीन से ऑपरेशन किया जा रहे हैं। डेढ़ वर्ष तक यह मशीन खराब रही। अब दोबारा आठ लाख रुपये इसी मशीन पर खर्च कर कैमरा फिक्स करवाया गया है और ऑपरेशन किए जा रहे हैं। नई लेप्रोस्कोपिक मशीन की लागत दो करोड़ रुपये तक की है। इसे कॉर्पोरेशन ने देने में असमर्थता जताई है। अब अस्पताल के पास महज पुरानी मशीन का ही सहारा बचा है। पिछले एक वर्ष से नई मशीन लेने के लिए जद्दोजहद चल रही थी जो पूरी नहीं हो पाई। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि वर्तमान में लेप्रोस्कोपिक मशीन से ऑपरेशन हो रहे हैं और नई मशीन की खरीद के लिए कार्रवाई हो रही है।
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