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साइट प्लान के हिसाब से नक्शा नहीं बना तो एनओसी नहीं
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हमीरपुर। नगर परिषद के वार्ड नंबर 11 हथली खड्ड के समीप बिना मंजूरी प्लॉट बेचने का मामला फिर गरमाने लगा है। वहीं, नगर नियोजन विभाग ने कारोबारियों से दो टूक कह दिया है कि जब तक विभाग की ओर से लगाई गई आपत्तियां दूर कर साइट प्लान के मुताबिक नक्शा नहीं बनता तब तक कोई एनओसी नहीं मिलेगी। नगर नियोजन विभाग के निदेशक ने इस मामले में शीघ्र रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आगामी निर्णय लिया जा सके।
करीब दो सालों से तीन दर्जन से अधिक प्लॉट खरीदारों की बड़ी रकम कारोबारियों के पास फंसी हुई है। जिन लोगों ने यहां पर प्लॉट खरीद कर आशियाना बनाने के सपने देखे, वह अभी तक किराये के भवनों में गुजर बसर कर रहे हैं। अभी तक सरकार की ओर से उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी है। वर्ष 2018 में हथली खड्ड के समीप कुछ कारोबारियों ने भूमि विभाजन की मंजूरी लिए बगैर ही यहां पर कॉलोनी बसाने की तैयारी की थी। इस कड़ी में कारोबारियों ने करीब तीन दर्जन से अधिक प्लॉट बेचे थे। बाद में भवनों के नक्शे पास न होने से खरीदारों में हड़कंप मच गया। अमर उजाला ने वर्ष 2018 में इस मामले को प्रमुखता से उठाया।
इसके बाद जिला प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट निदेशक टीसीपी और राजस्व विभाग शिमला भेजी। जहां से प्लॉट बेचने की प्रक्रिया रोकने और आगामी आदेशों तक किसी भी प्लॉट की रजिस्ट्री न करने के आदेश जारी हुए। इस मामले में राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हुई थी। कारोबारियों की तरफ से औपचारिकताएं पूरी न किए जाने से यह मामला अभी तक लटका हुआ है। उधर, नगर एवं ग्राम योजनाकार आशा मेहता ने कहा कि कारोबारियों को कुछ आपत्तियां दूर करने के लिए कहा गया है। नियमों के तहत पार्किंग, सड़क, सीवरेज समेत अन्य सुविधाएं नक्शे में शामिल करने के लिए कहा गया है। सारी रिपोर्ट निदेशालय भेजी जाएगी, उसके बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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करीब दो सालों से तीन दर्जन से अधिक प्लॉट खरीदारों की बड़ी रकम कारोबारियों के पास फंसी हुई है। जिन लोगों ने यहां पर प्लॉट खरीद कर आशियाना बनाने के सपने देखे, वह अभी तक किराये के भवनों में गुजर बसर कर रहे हैं। अभी तक सरकार की ओर से उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी है। वर्ष 2018 में हथली खड्ड के समीप कुछ कारोबारियों ने भूमि विभाजन की मंजूरी लिए बगैर ही यहां पर कॉलोनी बसाने की तैयारी की थी। इस कड़ी में कारोबारियों ने करीब तीन दर्जन से अधिक प्लॉट बेचे थे। बाद में भवनों के नक्शे पास न होने से खरीदारों में हड़कंप मच गया। अमर उजाला ने वर्ष 2018 में इस मामले को प्रमुखता से उठाया।
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इसके बाद जिला प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट निदेशक टीसीपी और राजस्व विभाग शिमला भेजी। जहां से प्लॉट बेचने की प्रक्रिया रोकने और आगामी आदेशों तक किसी भी प्लॉट की रजिस्ट्री न करने के आदेश जारी हुए। इस मामले में राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हुई थी। कारोबारियों की तरफ से औपचारिकताएं पूरी न किए जाने से यह मामला अभी तक लटका हुआ है। उधर, नगर एवं ग्राम योजनाकार आशा मेहता ने कहा कि कारोबारियों को कुछ आपत्तियां दूर करने के लिए कहा गया है। नियमों के तहत पार्किंग, सड़क, सीवरेज समेत अन्य सुविधाएं नक्शे में शामिल करने के लिए कहा गया है। सारी रिपोर्ट निदेशालय भेजी जाएगी, उसके बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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