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Hamirpur (Himachal) News: कीमतों मेें वृद्धि नहीं, कॉपियों में पेजों की संख्या कर दी कम
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शिक्षा पर भी महंगाई की मार, बच्चों को शिक्षा दिलाना हो रहा कठिन
25 रुपये की कॉपी में आ रहे 74 पेज, पूर्व में आते थे 80 के करीब पेज
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। नए शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभिन्न सरकारी और निजी स्कूलों में विद्यार्थी प्रवेश ले रहे हैं तथा कॉपी-किताबों की खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे में स्टेशनरी की दुकानों पर अभिभावक व बच्चे खरीदारी कर रहे हैं। इस बार कॉपियों की कीमतों में इजाफा नहीं किया गया है बल्कि कॉपी में आने वाले पेजों की संख्या में कमी की गई है। पूर्व में 25 रुपये की कॉपी में 80 के करीब पेज आते थे जबकि इस वर्ष 25 रुपये की कॉपी में महज 74 ही पेज आ रहे हैं। ऐसे में उद्योगों ने कीमत बढ़ाने की बजाय पेजों में कमी कर दी है।
बाजार में 15 रुपये, 25 रुपये, 38 रुपये, 45 रुपये, 100 रुपये से लेकर 2000 तक की कॉपियां उपलब्ध हैं। हालांकि, नए शैक्षणिक सत्र के लिए अभी तक स्टॉक दुकानों में नहीं पहुंच पाया है। अभिभावकों रणजीत सिंह, कमलेश कुमारी, संतोष कुमारी, बीना कुमारी, कुसुम शर्मा, सोमदत्त शर्मा, रवि दत्त आदि ने कहा कि महंगाई की मार से पहले ही पसीने छूट रहे हैं और लगातार स्टेशनरी के सामान महंगा होता जा रहा है। बच्चों को शिक्षा दिलाना काफी कठिन होता जा रहा है।
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25 रुपये की कॉपी में आ रहे 74 पेज, पूर्व में आते थे 80 के करीब पेज
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। नए शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभिन्न सरकारी और निजी स्कूलों में विद्यार्थी प्रवेश ले रहे हैं तथा कॉपी-किताबों की खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे में स्टेशनरी की दुकानों पर अभिभावक व बच्चे खरीदारी कर रहे हैं। इस बार कॉपियों की कीमतों में इजाफा नहीं किया गया है बल्कि कॉपी में आने वाले पेजों की संख्या में कमी की गई है। पूर्व में 25 रुपये की कॉपी में 80 के करीब पेज आते थे जबकि इस वर्ष 25 रुपये की कॉपी में महज 74 ही पेज आ रहे हैं। ऐसे में उद्योगों ने कीमत बढ़ाने की बजाय पेजों में कमी कर दी है।
बाजार में 15 रुपये, 25 रुपये, 38 रुपये, 45 रुपये, 100 रुपये से लेकर 2000 तक की कॉपियां उपलब्ध हैं। हालांकि, नए शैक्षणिक सत्र के लिए अभी तक स्टॉक दुकानों में नहीं पहुंच पाया है। अभिभावकों रणजीत सिंह, कमलेश कुमारी, संतोष कुमारी, बीना कुमारी, कुसुम शर्मा, सोमदत्त शर्मा, रवि दत्त आदि ने कहा कि महंगाई की मार से पहले ही पसीने छूट रहे हैं और लगातार स्टेशनरी के सामान महंगा होता जा रहा है। बच्चों को शिक्षा दिलाना काफी कठिन होता जा रहा है।
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