{"_id":"612fc69f8ebc3ea6b413353e","slug":"misuse-with-temple-money-hamirpur-hp-news-sml38238282","type":"story","status":"publish","title_hn":"निलंबित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उठी मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निलंबित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उठी मांग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिझड़ी (हमीरपुर)। उत्तर भारत के प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में चढ़ावे के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने वाले निलंबित कर्मचारी पर अब सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है। संबंधित कर्मचारी को बर्खास्त करने की मांग श्रद्धालुओं ने की है, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी सामने न आए। हालांकि मंदिर न्यास ने ट्रस्ट के कर्मचारियों को एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच में बदलकर इस मामले में कार्रवाई की शुरुआत तो कर दी है, लेकिन जब तक ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई जाती, इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति रोकना मुश्किल है।
गड़बड़झाले में श्रद्धालुओं की आस्था को भी गहरी ठेस पहुंची है। जिस तरह से मंदिर ट्रस्ट में यह मामला उजागर हुआ है, उससे श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे सोना-चांदी में भी कमी आने की संभावना है। इस सारे प्रकरण में जिस तरह से मंदिर ट्रस्ट व ट्रस्टियों की भूमिका रही है, वह भी संदेह के घेरे में है। 2016-17 से लेकर अब तक जितने भी ट्रस्टी, मंदिर अधिकारी या फिर वहां पर क्लर्क तैनात रहे हैं, सभी पर शक की सूई घूम रही है। आनन-फानन में बाबा बालक नाथ मंदिर के आयुक्त जिलाधीश हमीरपुर की ओर से मंदिर में तैनात कर्मचारियों को तो इधर-उधर ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन इससे भी भ्रष्टाचार कम होने वाला नहीं। मंदिर ट्रस्ट बाबा के खजाने को जब भी गिनती के लिए खोला जाता है तो वहां पर कोई अकेला क्लर्क नहीं जाता है। बल्कि उसमें ट्रस्टी, मंदिर अधिकारी साथ में अकाउंट ब्रांच के कर्मचारी सहित पूरी कमेटी बनाई होती है, जो इसके लिए जिम्मेदार होती है। इसके अलावा जो क्लर्क या लिपिक बाबा बालक नाथ द्वारा संचालित ट्रस्ट एक शिक्षण संस्थानों में कार्यरत है, वह पहले भी वहां पर कार्यरत रहे हैं, लेकिन इस सारे प्रकरण ने श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है। इस बारे में बड़सर के एसडीएम शशि पाल शर्मा ने बताया कि जांच चली हुई है, जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पहले भी एक क्लर्क को इसमें सस्पेंड किया जा चुका है।
विज्ञापन
गड़बड़झाले में श्रद्धालुओं की आस्था को भी गहरी ठेस पहुंची है। जिस तरह से मंदिर ट्रस्ट में यह मामला उजागर हुआ है, उससे श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे सोना-चांदी में भी कमी आने की संभावना है। इस सारे प्रकरण में जिस तरह से मंदिर ट्रस्ट व ट्रस्टियों की भूमिका रही है, वह भी संदेह के घेरे में है। 2016-17 से लेकर अब तक जितने भी ट्रस्टी, मंदिर अधिकारी या फिर वहां पर क्लर्क तैनात रहे हैं, सभी पर शक की सूई घूम रही है। आनन-फानन में बाबा बालक नाथ मंदिर के आयुक्त जिलाधीश हमीरपुर की ओर से मंदिर में तैनात कर्मचारियों को तो इधर-उधर ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन इससे भी भ्रष्टाचार कम होने वाला नहीं। मंदिर ट्रस्ट बाबा के खजाने को जब भी गिनती के लिए खोला जाता है तो वहां पर कोई अकेला क्लर्क नहीं जाता है। बल्कि उसमें ट्रस्टी, मंदिर अधिकारी साथ में अकाउंट ब्रांच के कर्मचारी सहित पूरी कमेटी बनाई होती है, जो इसके लिए जिम्मेदार होती है। इसके अलावा जो क्लर्क या लिपिक बाबा बालक नाथ द्वारा संचालित ट्रस्ट एक शिक्षण संस्थानों में कार्यरत है, वह पहले भी वहां पर कार्यरत रहे हैं, लेकिन इस सारे प्रकरण ने श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है। इस बारे में बड़सर के एसडीएम शशि पाल शर्मा ने बताया कि जांच चली हुई है, जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पहले भी एक क्लर्क को इसमें सस्पेंड किया जा चुका है।
विज्ञापन