{"_id":"5e04ee1d8ebc3e8817372a0c","slug":"mid-day-meal-worker-angry-hamirpur-hp-news-sml3190104198","type":"story","status":"publish","title_hn":"देशव्यापी हड़ताल में जाने को मिड-डे मील वर्कर्स ने कसी कमर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देशव्यापी हड़ताल में जाने को मिड-डे मील वर्कर्स ने कसी कमर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नादौन (हमीरपुर)। उपमंडल के मिड-डे मील वर्कर्स ने 8 जनवरी को सीटू के बैनर तले होने वाली कामगारों की देशव्यापी हड़ताल में शामिल होने के लिए कमर कस ली है। वीरवार को सीटू के जिला संयुक्त सचिव सुरेश राठौर की अध्यक्षता में उपमंडल नादौन के मिड-डे मील वर्कर्स की बैठक हुई। इसमें हड़ताल की रूपरेखा तय की गई। मिड-डे मील वर्कर्स ने कहा कि इस महंगाई के दौर में मात्र 2000 रुपये मानदेय देकर सरकार इस वर्ग से सौतेला व्यवहार कर रही है।
सरकार की ओर से न्यूनतम वेतन 250 रुपये प्रतिदिन तय किए जाने के बावजूद इस वर्ग को मात्र 2000 रुपये प्रतिमाह दिया जाना अन्याय है। यही नहीं उन्हें बीमारी की अवस्था तथा अन्य जरूरी कामों के लिए छुट्टी भी नहीं दी जाती और न ही उन्हें आज तक स्थायी कर्मचारी घोषित किया गया है। इसलिए उन्होंने 8 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल में शामिल होने का निर्णय किया है। संयुक्त सचिव सुरेश राठौर ने कहा कि देश की आजादी के बाद से चले आ रहे लेबर लॉ को सरकार केवल चार संहिताओं में बदल रही है, जोकि न्याय संगत नहीं है। मिड-डे मील वर्करों को सरकार की ओर से तय न्यूनतम वेतन 250 रुपये प्रतिदिन दिया जाना न्याय संगत है। परंतु सरकार इस पर मौन साधे हुए है। सुरेश राठौर ने कहा कि यह वर्ग 8 जनवरी को कामगारों की देशव्यापी काम छोड़ो हड़ताल में शामिल होंगे।
विज्ञापन
सरकार की ओर से न्यूनतम वेतन 250 रुपये प्रतिदिन तय किए जाने के बावजूद इस वर्ग को मात्र 2000 रुपये प्रतिमाह दिया जाना अन्याय है। यही नहीं उन्हें बीमारी की अवस्था तथा अन्य जरूरी कामों के लिए छुट्टी भी नहीं दी जाती और न ही उन्हें आज तक स्थायी कर्मचारी घोषित किया गया है। इसलिए उन्होंने 8 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल में शामिल होने का निर्णय किया है। संयुक्त सचिव सुरेश राठौर ने कहा कि देश की आजादी के बाद से चले आ रहे लेबर लॉ को सरकार केवल चार संहिताओं में बदल रही है, जोकि न्याय संगत नहीं है। मिड-डे मील वर्करों को सरकार की ओर से तय न्यूनतम वेतन 250 रुपये प्रतिदिन दिया जाना न्याय संगत है। परंतु सरकार इस पर मौन साधे हुए है। सुरेश राठौर ने कहा कि यह वर्ग 8 जनवरी को कामगारों की देशव्यापी काम छोड़ो हड़ताल में शामिल होंगे।
विज्ञापन