Himachal: चिट्टे के खिलाफ हमीरपुर में मेगा वॉकथॉन; सीएम सुक्खू ने की अगुवाई, सैकड़ों लोग हुए शामिल, वीडियो
सरकार के चिट्टा विरोधी अभियान में मंगलवार को मुख्यमंत्री सुक्खू की अगुवाई में मेगा वॉकथॉन का आयोजन किया गया।
विस्तार
चिट्टा मुक्त हिमाचल अभियान में शिमला और धर्मशाला के बाद मंगलवार को हमीरपुर में मेगा वॉकथॉन हुई। भारी संख्या में मौजूद लोगों के बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने दो किलोमीटर तक प्रतिभागियों का हाथ थामते हुए वॉकथॉन की अगुवाई की और नशे के खिलाफ संदेश दिया।
बाल स्कूल हमीरपुर मैदान में साढ़े दस बजे पहुंचे मुख्यमंत्री ने बच्चों और युवाओं को चिट्टे के खिलाफ शपथ दिलाई। इसके बाद गांधी चौक, मुख्य बाजार और भोटा चौक से होती हुई वॉकथॉन पुलिस लाइन मैदान दोसड़का तक गई। भारी भीड़ के कारण यह दूरी तय करने में दो घंटे से अधिक का समय लगा। पुलिस लाइन मैदान में जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने युवाओं से नशे के विरुद्ध समाज को जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल के भविष्य को नशे से बचाना सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है।
एनआईटी हेलीपैड पर उतरने के बाद मुख्यमंत्री डीसी हमीरपुर को उपलब्ध कराई गई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) में सवार होकर सर्किट हाउस और बाल स्कूल मैदान पहुंचे। उन्होंने डीसी कार्यालय सहित अन्य विभागों की सरकारी गाड़ियों को चरणबद्ध तरीके से ईवी में बदलने के निर्देश दिए। इस दौरान तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू, विधायक सुरेश कुमार और कैप्टन रणजीत सिंह, एपीएमसी अध्यक्ष अजय शर्मा, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, डीजीपी अशोक तिवारी, उपायुक्त अमरजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह उपस्थित रहे।
पुलिस लाइन मैदान दोसड़का में वॉकथॉन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश से चिट्टे का नामोनिशान मिटाना सरकार का ही नहीं, बल्कि समाज का साझा संकल्प है। यह मुहिम अब अभियान नहीं, महा आंदोलन बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार के तीन वर्षों में एनडीपीएस एक्ट के तहत केवल 13 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त हुई थी, जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अब तक 50 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिट्टे के खिलाफ मुहिम को विपक्ष का भी सहयोग मिल रहा है, लेकिन यह सच्चाई है कि पूर्व भाजपा सरकार पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि यह केवल सरकार की लड़ाई नहीं, हिमाचल की अस्मिता और मांओं की पुकार की जंग है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई तीन चरणों में लड़ी जा रही है। पहला चरण जागरूकता, दूसरा सख्त कानूनी कार्रवाई और तीसरा तस्करों की अवैध संपत्तियों को नष्ट व जब्त करने का है। प्रदेशभर में नशा निवारण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। 22 नवंबर को प्रदेश के इतिहास में पहली बार पुलिस ने एक साथ 121 स्थानों पर छापामारी कर बड़े तस्करों के नेटवर्क पर सीधा हमला बोला। इसके बाद 41 शिक्षण संस्थानों, 598 दुकानों, बाजारों और कॉलेजों के आसपास सघन जांच की गई।
इस दौरान 12 एनडीपीएस मामले, 385 चालान किए गए। उन्होंने कहा कि 7 दिसंबर को पीआईटी और एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से 16 नामी तस्करों को एक साथ हिरासत में लिया गया। अब तक 63 तस्कर गिरफ्तार, 1214 संदिग्धों की पहचान और 950 अवैध संपत्तियों को चिह्नित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 15 दिसंबर को प्रदेश की 234 सबसे अधिक नशा प्रभावित पंचायतों और शहरी निकायों में नशा निवारण समितियों की बैठकें आयोजित की गईं, ताकि नशामुक्त हिमाचल का लक्ष्य जमीनी स्तर पर साकार हो।
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