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Hamirpur (Himachal) News: गर्भवती महिलाओं को रुला रही मेडिकल कॉलेज की अव्यवस्था
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मेडिकल कालेज हमीरपुर के गायनी वार्ड के बाहर गर्भवती महिलाओं के लिए बरामदे में लगाए गए बेड।(संव
हमीरपुर। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में अव्यवस्था गर्भवती महिलाओं को ज्यादा रुला रही है। यहां हालात ऐसे हैं कि अस्पताल के गायनी वार्ड में गर्भवती और नवजात बच्चों को इन दिनों ठंड में ही दिन और रातें गुजारनी पड़ रही हैं।
गायनी वार्ड में करीब 50 बिस्तरों की व्यवस्था है। ये सभी फुल होने से बाहर बरामदे में 20 अतिरिक्त बेड लगाए गए हैं। बरामद में ठंडी हवाओं के झोंके आने से मरीज और तीमारदार ठंड से परेशान हो रहे हैं। इससे गर्भवती महिलाओं का दर्द इस सर्दियों के मौसम में और बढ़ता जा रहा है। इस बारे में मेडिकल काॅलेज प्रशासन का कहना है कि अब अस्पताल को जल्द ही जोलसप्पड़ में शिफ्ट किया जाएगा। उसके बाद ही नए गायनी वार्ड में ऐसी महिलाओं के लिए हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। तब तक ऐसी व्यवस्था रहेगी। गायनी वार्ड में महिलाएं अपने बच्चों को जन्म देने से पहले ही बीमार पड़ सकती है। उनके लिए किसी भी प्रकार के हीटर की बरामदे में कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मेडिकल काॅलेज में अगर भवन की दिक्कत है तो गायनी वार्ड को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करके इनके दर्द को कम किया जा सकता है। हालांकि, आयुष अस्पताल की एक बिल्डिंग में इस वार्ड की कुछ महिलाओं को शिफ्ट किया गया है। गायनी वार्ड की समस्या को दूर करने के लिए अन्य बहुत सारे विकल्प भी मौजूद हैं, लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गायनी वार्ड की स्थिति ऐसी है कि इसमें चलने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं हैं। बरामदे में बीस के करीब बेड महिलाओं के लगे हुए हैं। इससे गर्भवती और बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं को और दर्द सहन करना पड़ रहा है।
बाक्स:
जल्द जोलसप्पड़ में शिफ्ट होगा मेडिकल कॉलेज : डॉ. भारती
डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल काॅलेज हमीरपुर के प्रिंसिपल डॉ. रमेश भारती का कहना है कि गायनी वार्ड में लेबर रूम के बाहर बरामदे में गर्भवती महिलाओं के बेड लगाए गए हैं। जब तक मेडिकल काॅलेज जोलसप्पड़ में शिफ्ट नहीं हो जाता, स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हो सकता है। जोलसप्पड़ में मेडिकल कॉलेज भवन एवं अस्पताल भवन बन रहा है। भवन निर्माण कार्य तेजी से चला हुआ है। निर्माण कार्य पूरा होते ही मेडिकल कॉलेज को जोलसप्पड़ में शिफ्ट किया जाएगा और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
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गायनी वार्ड में करीब 50 बिस्तरों की व्यवस्था है। ये सभी फुल होने से बाहर बरामदे में 20 अतिरिक्त बेड लगाए गए हैं। बरामद में ठंडी हवाओं के झोंके आने से मरीज और तीमारदार ठंड से परेशान हो रहे हैं। इससे गर्भवती महिलाओं का दर्द इस सर्दियों के मौसम में और बढ़ता जा रहा है। इस बारे में मेडिकल काॅलेज प्रशासन का कहना है कि अब अस्पताल को जल्द ही जोलसप्पड़ में शिफ्ट किया जाएगा। उसके बाद ही नए गायनी वार्ड में ऐसी महिलाओं के लिए हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। तब तक ऐसी व्यवस्था रहेगी। गायनी वार्ड में महिलाएं अपने बच्चों को जन्म देने से पहले ही बीमार पड़ सकती है। उनके लिए किसी भी प्रकार के हीटर की बरामदे में कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मेडिकल काॅलेज में अगर भवन की दिक्कत है तो गायनी वार्ड को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करके इनके दर्द को कम किया जा सकता है। हालांकि, आयुष अस्पताल की एक बिल्डिंग में इस वार्ड की कुछ महिलाओं को शिफ्ट किया गया है। गायनी वार्ड की समस्या को दूर करने के लिए अन्य बहुत सारे विकल्प भी मौजूद हैं, लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गायनी वार्ड की स्थिति ऐसी है कि इसमें चलने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं हैं। बरामदे में बीस के करीब बेड महिलाओं के लगे हुए हैं। इससे गर्भवती और बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं को और दर्द सहन करना पड़ रहा है।
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बाक्स:
जल्द जोलसप्पड़ में शिफ्ट होगा मेडिकल कॉलेज : डॉ. भारती
डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल काॅलेज हमीरपुर के प्रिंसिपल डॉ. रमेश भारती का कहना है कि गायनी वार्ड में लेबर रूम के बाहर बरामदे में गर्भवती महिलाओं के बेड लगाए गए हैं। जब तक मेडिकल काॅलेज जोलसप्पड़ में शिफ्ट नहीं हो जाता, स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हो सकता है। जोलसप्पड़ में मेडिकल कॉलेज भवन एवं अस्पताल भवन बन रहा है। भवन निर्माण कार्य तेजी से चला हुआ है। निर्माण कार्य पूरा होते ही मेडिकल कॉलेज को जोलसप्पड़ में शिफ्ट किया जाएगा और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
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