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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Management allocate loans of 9 Crore without prior permission : alleges KCC Bank Ex-chairman

ऋण कमेटी की मंजूरी बिना नौ करोड़ के ऋण पर पूर्व चेयरमैन ने उठाए सवाल

Thu, 30 Mar 2017 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर Updated Thu, 30 Mar 2017 11:59 PM IST
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कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन रसील सिंह मनकोटिया ने वीरवार को हमीरपुर में एक पत्रकार वार्ता में केसीसी बैंक प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पालमपुर के सिंडिकेट एरिया स्थित ब्रांच में बैंक की ऋण कमेटी की मंजूरी के बिना ही नौ करोड़ के ऋण को पास करने और आठ बैंक ड्राफ्टों से 3.85 करोड़ रुपये के भुगतान मामले में बैंक प्रबंधन और प्रदेश सरकार का हाथ होने का आरोप लगाया।

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मनकोटिया ने कहा कि बैंक प्रबंधन और सरकार के बिना इतना बड़ा घपला नहीं हो सकता। जिस शराब ठेकेदार को बैंक ने ऋण दिया, वह पहले ही एसबीआई और केनरा बैंक का डिफाल्टर रहा है। बैंकों के साथ यह व्यक्ति एक्साइज विभाग का भी डिफाल्टर है।
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उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि 22 मार्च को केसीसी बैंक ऋण कमेटी की बैठक होती है, लेकिन शराब ठेकेदार को 21 मार्च को ही लोन की रकम का आवंटन कर दिया गया। डिफाल्टर व्यक्ति का पेन कार्ड और अन्य जो भी संपत्तियां गिरवी रखी गईं, वह पहले ही दूसरे बैंक के पास जब्त हैं, लेकिन केसीसी बैंक ने पेन कार्ड तक देखना उचित नहीं समझा।
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22 मार्च की बैठक में ऋण मामले की फाइल रेजेक्ट कर आनन-फानन में बैंक मैनेजर को सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद 28 मार्च को बैंक ने एक लाख रुपये का ड्राफ्ट और जारी कर दिया। पालमपुर के जिस भवन में बैंक की शाखा खोली गई है, उसका किराया पहले 14 हजार रुपये था। बैंक प्रबंधन ने अपने एक रिश्तेदार को फायदा पहुंचने के लिए किराया बढ़ाकर 52 हजार रुपये मासिक कर दिया।

मनकोटिया ने प्रदेश सरकार और राज्यपाल से बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को भंग कर प्रशासक नियुक्त करने, पालमपुर बैंक की ब्रांच को तत्काल सील करने और मामले की सीबीआई जांच की मांग की।

उन्होंने कहा कि छह माह बाद भाजपा सत्ता में लौटेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। उनके साथ बैंक के वाइस चेयरमैन भगवान दास, भाजपा मंडल हमीरपुर के अध्यक्ष बलदेव धीमान, सुशील सोनी, राकेश पठानिया मौजूद रहे।


पालमपुर ब्रांच से आठ ड्राफ्टों से निकाली रकम

ड्राफ्ट नंबर एक से 85.72 लाख, ड्राफ्ट-2 से 50.62 लाख, ड्राफ्ट 3 से 47.50 लाख, ड्राफ्ट-4 से 88.72 लाख, ड्राफ्ट-5 से 34.34 लाख, ड्राफ्ट-6 से 20.26 लाख, ड्राफ्ट-7 से 19 लाख और ड्राफ्ट-8 से 35.54 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इसी तरह पालमपुर में ही एक होटल के लिए एक परिवार को 23 करोड़ का ऋण बैंक ने दिया, लेकिन मार्च 2016 से 20 मार्च 2017 तक एक भी किस्त नहीं आई। ऊना ब्रांच से ही फगवाड़ा की एक फर्म को जो पहले डिफाल्टर थी, उसे 19 करोड़ का ऋण मंजूर कर दिया और उसमें से तीन करोड़ का भुगतान किया। मिट्टी से लोहा निकालने वाली इस फर्म ने बैंक को ट्रकों के बजाय मिट्टी ढोने के लिए स्कूटरों के नंबर से बिल जारी कर दिए। मामला गर्माने के बाद फर्म का लोन रद्द किया। बैंक भर्तियों में धांधली, भाजपा सरकार में खुली शाखाओं को बंद करने, ऋण योजनाओं में गड़बड़ी, बैंक मुख्यालय में उद्घाटन पट्टिका को तोड़ने, बैंक चेयरमैन की सरकारी खर्चे पर विदेश यात्रा करने के भी पूर्व चेयरमैन ने आरोप लगाए हैं।

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