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Hamirpur (Himachal) News: भवड़ां की बंजर जमीन पर लहलहाने लगा माैसंबी का बागीचा
Mon, 07 Jul 2025 12:44 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 07 Jul 2025 12:44 AM IST
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भवड़ां में मौसंबी के बागीचे में काम करते किसान। स्रोत: जागरूक पाठक
कांगू(हमीरपुर)। कभी फलों की खेती के लिए अनुपयोगी माने जाने वाले प्रदेश के निचले क्षेत्रों में भी अब एचपी शिवा परियोजना के कारण अमरूद, मौसंबी और नींबू प्रजाति के अन्य फलों के बागीचे तैयार होने लगे हैं। इसमें मुख्यमंत्री सुक्खू का अपना गांव भवड़ां एक मिसाल बनकर उभरा है।
नादौन क्षेत्र के इस गांव की पथरीली और बंजर जमीन पर अब मौसंबी का बागीचा लहलहाने लगा है। ढाई वर्ष पूर्व प्रदेश की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को गांव भवड़ां की बंजर एवं पथरीली जमीन पर फलों के बागीचे विकसित करने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार गांव भवड़ां को वर्ष 2023 में एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत लाया गया।
इसी परियोजना के शुरुआती दौर में गांव के सात किसानों की लगभग 25 कनाल भूमि को पौधारोपण के लिए तैयार किया गया। मनरेगा कनवर्जेंस के माध्यम से भी यह कार्य किया गया और मौसंबी के सैकड़ों पौधे लगाए गए। आज मात्र दो वर्ष बाद ही इन छोटे-छोटे पौधों पर काफी अच्छे फल लग गए हैं। मौसंबी से लक-दक छोटे-छोटे पौधों को देखकर गांव के किसान और विशेषकर महिला किसान अत्यंत प्रसन्न हैं।
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गांव की महिला किसान सुदर्शना देवी ने बताया कि उनकी लगभग 10 कनाल जमीन कई वर्षों से बंजर पड़ी हुई थी। इस पर फसलें तो दूर, घास भी ठीक से नहीं उगती थी। लेकिन, एचपी शिवा परियोजना ने इस बंजर जमीन की तस्वीर एवं तकदीर ही बदल दी है।
अन्य किसान सपना देवी ने बताया कि उनकी लगभग पांच कनाल बंजर भूमि पर भी अब मौसंबी के पौधे लहलहा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव के किसान मौसंबी के पौधों के बीच खाली जमीन पर अन्य नकदी फसलें भी लगा रहे हैं। इनमें पपीते के पौधे भी शामिल हैं। उधर, उद्यान विभाग के उपनिदेशक राजेश्वर परमार ने बताया कि एचपी शिवा परियोजना के तहत जिला हमीरपुर के विभिन्न क्षेत्रों में फलदार पौधों के बागीचे विकसित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गांव भवड़ां में भी मौसंबी का बागीचा लगाया है। मात्र दो वर्षों में ही इस बागीचे में काफी अच्छे फल लगने शुरू हो गए हैं।
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नादौन क्षेत्र के इस गांव की पथरीली और बंजर जमीन पर अब मौसंबी का बागीचा लहलहाने लगा है। ढाई वर्ष पूर्व प्रदेश की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को गांव भवड़ां की बंजर एवं पथरीली जमीन पर फलों के बागीचे विकसित करने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार गांव भवड़ां को वर्ष 2023 में एचपी शिवा परियोजना के अंतर्गत लाया गया।
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इसी परियोजना के शुरुआती दौर में गांव के सात किसानों की लगभग 25 कनाल भूमि को पौधारोपण के लिए तैयार किया गया। मनरेगा कनवर्जेंस के माध्यम से भी यह कार्य किया गया और मौसंबी के सैकड़ों पौधे लगाए गए। आज मात्र दो वर्ष बाद ही इन छोटे-छोटे पौधों पर काफी अच्छे फल लग गए हैं। मौसंबी से लक-दक छोटे-छोटे पौधों को देखकर गांव के किसान और विशेषकर महिला किसान अत्यंत प्रसन्न हैं।
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गांव की महिला किसान सुदर्शना देवी ने बताया कि उनकी लगभग 10 कनाल जमीन कई वर्षों से बंजर पड़ी हुई थी। इस पर फसलें तो दूर, घास भी ठीक से नहीं उगती थी। लेकिन, एचपी शिवा परियोजना ने इस बंजर जमीन की तस्वीर एवं तकदीर ही बदल दी है।
अन्य किसान सपना देवी ने बताया कि उनकी लगभग पांच कनाल बंजर भूमि पर भी अब मौसंबी के पौधे लहलहा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव के किसान मौसंबी के पौधों के बीच खाली जमीन पर अन्य नकदी फसलें भी लगा रहे हैं। इनमें पपीते के पौधे भी शामिल हैं। उधर, उद्यान विभाग के उपनिदेशक राजेश्वर परमार ने बताया कि एचपी शिवा परियोजना के तहत जिला हमीरपुर के विभिन्न क्षेत्रों में फलदार पौधों के बागीचे विकसित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गांव भवड़ां में भी मौसंबी का बागीचा लगाया है। मात्र दो वर्षों में ही इस बागीचे में काफी अच्छे फल लगने शुरू हो गए हैं।

भवड़ां में मौसंबी के बागीचे में काम करते किसान। स्रोत: जागरूक पाठक