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Hamirpur (Himachal) News: जिले में लंपी वायरस की दस्तक, 34 गोवंश संक्रमित
Tue, 25 Aug 2026 04:34 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 25 Aug 2026 04:34 AM IST
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बड़सर में एक गोवंश की मौत, पशुपालन विभाग ने शुरू किया टीकाकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) ने फिर दस्तक दे दी है। पिछले चार से पांच दिन में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से लंपी वायरस के करीब 34 मामले सामने आए हैं। बड़सर क्षेत्र में एक गोवंश की इस बीमारी से मौत भी हुई है। सबसे अधिक 12 मामले नादौन क्षेत्र से सामने आए हैं, जबकि भोरंज और सुजानपुर में दो-दो मामले दर्ज किए गए हैं। अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी पशुओं में बीमारी के लक्षण मिलने के बाद पशुपालन विभाग ने निगरानी और उपचार की प्रक्रिया तेज कर दी है।
पशुपालन विभाग को लंपी से बचाव के लिए करीब 13,500 टीके प्राप्त हुए हैं। इन टीकों को पशु अस्पतालों और संबंधित केंद्रों तक भेज दिया गया है, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में पशुओं का समय पर टीकाकरण किया जा सके। विभाग की ओर से पशुपालकों को बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है। पिछले वर्ष भी जिले में करीब 16 हजार पशुओं का टीकाकरण किया गया था। वर्ष 2023 में लंपी के बड़े स्तर पर मामले सामने आने के बाद भी व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया गया था।
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कैसे फैलता है लंपी वायरस
लंपी स्किन डिजीज गोवंश में होने वाली संक्रामक वायरल बीमारी है। यह कैप्रिपॉक्स वायरस के कारण होती है। मुख्य रूप से मच्छरों, काटने वाली मक्खियों और टिक जैसे रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से एक पशु से दूसरे पशु तक फैल सकती है। बीमारी में पशु को बुखार आने के बाद शरीर की त्वचा पर गोल और उभरी हुई गांठें या नोड्यूल बनने लगते हैं।
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पशु की सेहत और दूध की उत्पादकता पर असर
बीमारी का असर पशु की सामान्य सेहत और उत्पादकता पर पड़ता है। संक्रमित पशु में कमजोरी, बुखार, त्वचा पर गांठें, भूख में कमी और दूध उत्पादन में गिरावट जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में पशु को लंबे समय तक स्वस्थ होने में परेशानी हो सकती है और कुछ मामलों में मौत भी हो सकती है।
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पशुओं में लंपी वायरस के प्रमुख लक्षण
-तेज बुखार आना
-शरीर पर गांठें या नोड्यूल बनना
-आंखों और नाक से पानी आना
-भूख कम लगना
-पैरों में सूजन और लंगड़ापन
-पशु का वजन कम होना
-दूध उत्पादन में कमी आना
- पशु का सुस्त और कमजोर दिखाई देना
कोट
-पशुपालकों को घबराने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है। अपने गोवंश का नियमित निरीक्षण करें। शरीर पर असामान्य गांठ, बुखार या कमजोरी दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक को सूचना दें। गोवंश का टीकाकरण करवाएं।-डॉ. सतीश, सहायक निदेशक परियोजना, पशुपालन विभाग हमीरपुर
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हमीरपुर। जिले में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) ने फिर दस्तक दे दी है। पिछले चार से पांच दिन में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से लंपी वायरस के करीब 34 मामले सामने आए हैं। बड़सर क्षेत्र में एक गोवंश की इस बीमारी से मौत भी हुई है। सबसे अधिक 12 मामले नादौन क्षेत्र से सामने आए हैं, जबकि भोरंज और सुजानपुर में दो-दो मामले दर्ज किए गए हैं। अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी पशुओं में बीमारी के लक्षण मिलने के बाद पशुपालन विभाग ने निगरानी और उपचार की प्रक्रिया तेज कर दी है।
पशुपालन विभाग को लंपी से बचाव के लिए करीब 13,500 टीके प्राप्त हुए हैं। इन टीकों को पशु अस्पतालों और संबंधित केंद्रों तक भेज दिया गया है, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में पशुओं का समय पर टीकाकरण किया जा सके। विभाग की ओर से पशुपालकों को बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है। पिछले वर्ष भी जिले में करीब 16 हजार पशुओं का टीकाकरण किया गया था। वर्ष 2023 में लंपी के बड़े स्तर पर मामले सामने आने के बाद भी व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया गया था।
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कैसे फैलता है लंपी वायरस
लंपी स्किन डिजीज गोवंश में होने वाली संक्रामक वायरल बीमारी है। यह कैप्रिपॉक्स वायरस के कारण होती है। मुख्य रूप से मच्छरों, काटने वाली मक्खियों और टिक जैसे रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से एक पशु से दूसरे पशु तक फैल सकती है। बीमारी में पशु को बुखार आने के बाद शरीर की त्वचा पर गोल और उभरी हुई गांठें या नोड्यूल बनने लगते हैं।
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पशु की सेहत और दूध की उत्पादकता पर असर
बीमारी का असर पशु की सामान्य सेहत और उत्पादकता पर पड़ता है। संक्रमित पशु में कमजोरी, बुखार, त्वचा पर गांठें, भूख में कमी और दूध उत्पादन में गिरावट जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में पशु को लंबे समय तक स्वस्थ होने में परेशानी हो सकती है और कुछ मामलों में मौत भी हो सकती है।
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पशुओं में लंपी वायरस के प्रमुख लक्षण
-तेज बुखार आना
-शरीर पर गांठें या नोड्यूल बनना
-आंखों और नाक से पानी आना
-भूख कम लगना
-पैरों में सूजन और लंगड़ापन
-पशु का वजन कम होना
-दूध उत्पादन में कमी आना
- पशु का सुस्त और कमजोर दिखाई देना
कोट
-पशुपालकों को घबराने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है। अपने गोवंश का नियमित निरीक्षण करें। शरीर पर असामान्य गांठ, बुखार या कमजोरी दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक को सूचना दें। गोवंश का टीकाकरण करवाएं।-डॉ. सतीश, सहायक निदेशक परियोजना, पशुपालन विभाग हमीरपुर