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Hamirpur (Himachal) News: खेती संबंधी जागरूकता कार्यक्रमों में बजट की कमी बन रही बाधा
Mon, 02 Jun 2025 01:25 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 02 Jun 2025 01:25 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। आतमा परियोजना के तहत घर-द्वार पर लोगों को खेतीबाड़ी के बारे में जागरूक करने के मार्ग में बजट बाधा बन रहा है। बजट न आने के कारण आत्मा परियोजना की ओर से विभिन्न गतिविधियां संचालित करने में दिक्कत आ रही है। आतमा परियोजना के तहत साल भर की विभिन्न गतिविधियों के बारे में योजना तैयार की जा चुकी है। अभी बजट का इंतजार किया जा रहा है। आतमा परियोजना के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इसके अलावा प्रदर्शनियां, शिविर और स्वयं सहायता समूहों के सौजन्य से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। लोगों को खेती की नवीनतम जानकारी दी जाती हैं। प्रदर्शनियों के माध्यम से एक स्थान पर किसानों को इकट्ठा करके उन्हें खेतीबारी के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इसके लिए प्रदेश और केंद्र की ओर से ग्रांट दी जाती है। बीते साल भी करीब दो करोड़ का बजट प्राप्त हुआ था, लेकिन इस साल अभी तक बजट ही नहीं मिला है। इस कारण किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए गतिविधियां शुरू करने में आर्थिक दिक्कतें आ रही हैं।
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हमीरपुर। आतमा परियोजना के तहत घर-द्वार पर लोगों को खेतीबाड़ी के बारे में जागरूक करने के मार्ग में बजट बाधा बन रहा है। बजट न आने के कारण आत्मा परियोजना की ओर से विभिन्न गतिविधियां संचालित करने में दिक्कत आ रही है। आतमा परियोजना के तहत साल भर की विभिन्न गतिविधियों के बारे में योजना तैयार की जा चुकी है। अभी बजट का इंतजार किया जा रहा है। आतमा परियोजना के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इसके अलावा प्रदर्शनियां, शिविर और स्वयं सहायता समूहों के सौजन्य से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। लोगों को खेती की नवीनतम जानकारी दी जाती हैं। प्रदर्शनियों के माध्यम से एक स्थान पर किसानों को इकट्ठा करके उन्हें खेतीबारी के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
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इसके लिए प्रदेश और केंद्र की ओर से ग्रांट दी जाती है। बीते साल भी करीब दो करोड़ का बजट प्राप्त हुआ था, लेकिन इस साल अभी तक बजट ही नहीं मिला है। इस कारण किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए गतिविधियां शुरू करने में आर्थिक दिक्कतें आ रही हैं।
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