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Hamirpur (Himachal) News: न्यूनतम तय दिहाड़ी न मिलने पर नहीं मिल रहे मजदूर
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माइनिंग फार्म को लेकर मिली शिकायत पर की जा रही है जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
टौणी देवी (हमीरपुर)। विकास खंड बमसन की ग्वारडू पंचायत में तकनीकी कारणों से मनरेगा दिहाड़ियों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। इससे पंचायतों में विकास कार्य भी बाधित होना शुरू हो गए हैं। मनरेगा के तहत न्यूनतम दिहाड़ी पुराने रेट के तहत 240 रुपये तय है, जबकि अब इसे बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया है। मनरेगा के तहत लगे मजदूरों को 84 रुपये से लेकर 100 रुपये दिहाड़ी दी गई। ऐसे में आठ-आठ घंटे काम करने वाले मजदूर शोषण का शिकार हो रहे हैं। ऐसा तकनीकी रूप से कार्य की असेसमेंट कर जानबूझ कर किया जा रहा है। अब हालात यह हैं कि पंचायत में मनरेगा के तहत काम करने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। लोग तो यह भी पूछने लगे हैं कि कहीं दिहाड़ियों के नाम पर पंचायत में कोई घोटाला तो नहीं चला हुआ है। इस बारे में कुछ लोग बीडीओ टौणी देवी तक भी शिकायत लेकर पहुंच चुके हैं। इस बारे में ग्राम पंचायत ग्वारडू की प्रधान सरोज कुमारी ने बताया कि पंचायत के सभी वार्डों में समान विकास करवाया जा रहा है। मनरेगा की दिहाड़ियों को लेकर अगर लोगों में असंतोष है तो संबंधित कर्मचारी से इस बारे में बात कर लोगों को उचित दिहाड़ी दिलाई जाएगी। इस बारे में पंचायत सचिव अशोक कुमार ने कहा कि मनरेगा के तहत पुराने कार्यों पर मजदूरों को 240 रुपये और नए कार्यों पर अब 300 रुपये न्यूनतम दिहाड़ी तय है। यदि मजदूर पूरे आठ घंटे कार्य कर रहे हैं तो उन्हें पूरी दिहाड़ी दिए जाने का प्रावधान है। माइनिंग फॉर्म को लेकर भी शिकायत मिली थी, जिसकी जांच की जा रही है।
बॉक्स
माइनिंग फॉर्म की वजह से बाधित हो रहे काम
तकनीकी सहायक जगदीश चंद ने बताया कि काम की असेसमेंट के बाद ही मजदूरों को दिहाड़ी दी जाती है। इसमें नियमों की पालना की जा रही है। उन्होंने कहा कि निर्माण सामग्री को लेकर माइनिंग फॉर्म को लेकर भी कार्य बाधित हो रहे हैं। कुछ जाली माइनिंग फॉर्म पकड़ में आए हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
टौणी देवी (हमीरपुर)। विकास खंड बमसन की ग्वारडू पंचायत में तकनीकी कारणों से मनरेगा दिहाड़ियों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। इससे पंचायतों में विकास कार्य भी बाधित होना शुरू हो गए हैं। मनरेगा के तहत न्यूनतम दिहाड़ी पुराने रेट के तहत 240 रुपये तय है, जबकि अब इसे बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया है। मनरेगा के तहत लगे मजदूरों को 84 रुपये से लेकर 100 रुपये दिहाड़ी दी गई। ऐसे में आठ-आठ घंटे काम करने वाले मजदूर शोषण का शिकार हो रहे हैं। ऐसा तकनीकी रूप से कार्य की असेसमेंट कर जानबूझ कर किया जा रहा है। अब हालात यह हैं कि पंचायत में मनरेगा के तहत काम करने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। लोग तो यह भी पूछने लगे हैं कि कहीं दिहाड़ियों के नाम पर पंचायत में कोई घोटाला तो नहीं चला हुआ है। इस बारे में कुछ लोग बीडीओ टौणी देवी तक भी शिकायत लेकर पहुंच चुके हैं। इस बारे में ग्राम पंचायत ग्वारडू की प्रधान सरोज कुमारी ने बताया कि पंचायत के सभी वार्डों में समान विकास करवाया जा रहा है। मनरेगा की दिहाड़ियों को लेकर अगर लोगों में असंतोष है तो संबंधित कर्मचारी से इस बारे में बात कर लोगों को उचित दिहाड़ी दिलाई जाएगी। इस बारे में पंचायत सचिव अशोक कुमार ने कहा कि मनरेगा के तहत पुराने कार्यों पर मजदूरों को 240 रुपये और नए कार्यों पर अब 300 रुपये न्यूनतम दिहाड़ी तय है। यदि मजदूर पूरे आठ घंटे कार्य कर रहे हैं तो उन्हें पूरी दिहाड़ी दिए जाने का प्रावधान है। माइनिंग फॉर्म को लेकर भी शिकायत मिली थी, जिसकी जांच की जा रही है।
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माइनिंग फॉर्म की वजह से बाधित हो रहे काम
तकनीकी सहायक जगदीश चंद ने बताया कि काम की असेसमेंट के बाद ही मजदूरों को दिहाड़ी दी जाती है। इसमें नियमों की पालना की जा रही है। उन्होंने कहा कि निर्माण सामग्री को लेकर माइनिंग फॉर्म को लेकर भी कार्य बाधित हो रहे हैं। कुछ जाली माइनिंग फॉर्म पकड़ में आए हैं।
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