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मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में रात को नहीं हो रहे ईसीजी
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हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में रात के समय आपातकालीन आने वाले रोगियों को इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) की सुविधा नहीं मिल रही है। मेडिकल कॉलेज एवं जिला के सबसे बड़े अस्पताल में महज एक ईसीजी तकनीशियन होने के कारण मरीजों को इस सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है।
अस्पताल में अगर रात को उपचार करवाने मरीज पहुंच रहे हैं तो ईसीजी के लिए बाहरी लैबों से तकनीशियन बुलाना पड़ रहा है। जो इस टेस्ट के मनमाने दाम वसूल रहे हैं, जबकि अस्पताल में सीनियर सिटीजन का ईसीजी निशुल्क और बाकियों का 20 रुपये में हो जाता है। इस टेस्ट के 20 रुपये के बजाय लोगों को 100 से 150 रुपये बाहरी तकनीशियन को चुकाने पड़ रहे हैं।
बता दें कि मेडिकल कॉलेज में महज एक ईसीजी तकनीशियन होने से यह समस्या पेश आ रही है। यह तकनीशियन भी सरकारी नहीं है, इसे रोगी कल्याण समिति के सौजन्य से रखा गया है, जबकि पूर्व में दो चतुर्थ क्लास कर्मचारी अस्पताल में ईसीजी करने को प्रशिक्षित किए गए थे, जिनकी ड्यूटी बाद में कोविड केयर अस्पताल भोटा में लग गई। इसके बाद से महज एक तकनीशियन ही दिन में अस्पताल में सेवाएं दे रहा है और रात को ईसीजी राम भरोसे है। अगर बाहरी लैब पर भी तकनीशियन रात को समय पर न मिले तो मरीज को परेशानी झेलनी पड़ती है। लोगों में सुमित शर्मा, विनोद कुमार, नरेंद्र आदि ने रात के समय इमरजेंसी वार्ड में ईसीजी सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की है। उधर, मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा का कहना है कि एकमात्र ईसीजी तकनीशियन आरकेएस के सौजन्य से रखा गया है। कर्मचारी न होने से समस्या पेश आ रही है। इसके समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं।
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अस्पताल में अगर रात को उपचार करवाने मरीज पहुंच रहे हैं तो ईसीजी के लिए बाहरी लैबों से तकनीशियन बुलाना पड़ रहा है। जो इस टेस्ट के मनमाने दाम वसूल रहे हैं, जबकि अस्पताल में सीनियर सिटीजन का ईसीजी निशुल्क और बाकियों का 20 रुपये में हो जाता है। इस टेस्ट के 20 रुपये के बजाय लोगों को 100 से 150 रुपये बाहरी तकनीशियन को चुकाने पड़ रहे हैं।
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बता दें कि मेडिकल कॉलेज में महज एक ईसीजी तकनीशियन होने से यह समस्या पेश आ रही है। यह तकनीशियन भी सरकारी नहीं है, इसे रोगी कल्याण समिति के सौजन्य से रखा गया है, जबकि पूर्व में दो चतुर्थ क्लास कर्मचारी अस्पताल में ईसीजी करने को प्रशिक्षित किए गए थे, जिनकी ड्यूटी बाद में कोविड केयर अस्पताल भोटा में लग गई। इसके बाद से महज एक तकनीशियन ही दिन में अस्पताल में सेवाएं दे रहा है और रात को ईसीजी राम भरोसे है। अगर बाहरी लैब पर भी तकनीशियन रात को समय पर न मिले तो मरीज को परेशानी झेलनी पड़ती है। लोगों में सुमित शर्मा, विनोद कुमार, नरेंद्र आदि ने रात के समय इमरजेंसी वार्ड में ईसीजी सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की है। उधर, मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा का कहना है कि एकमात्र ईसीजी तकनीशियन आरकेएस के सौजन्य से रखा गया है। कर्मचारी न होने से समस्या पेश आ रही है। इसके समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं।
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