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हेपेटाइटिस बी से ज्यादा संक्रामक है एचआईवी : डॉ. सुनील
Tue, 06 Aug 2024 06:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 06 Aug 2024 06:39 AM IST
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सीएमओ कार्यालय में बैठक को संबोधित करते अधिकारी। स्रोत : स्वास्थ्य विभाग
हमीरपुर। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुनील वर्मा की अध्यक्षता में सीएमओ ऑफिस के सभागार में सोमवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य एचआईवी/एड्स और यौन संचारित संक्रमण के मुद्दों पर जानकारी साझा करना था।
कार्यशाला में जिला के सभी खंडों के कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर उपस्थित रहे। डॉ. सुनील वर्मा ने एचआईवी और एड्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एचआईवी एक वायरस है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है और एड्स एक ऐसी अवस्था है जो एचआईवी से संक्रमित लोगों में विकसित हो सकती है।
कार्यशाला में उन्होंने यौन संचारित संक्रमणों और एचआईवी/एड्स (एक्ट) अधिनियम के बारे में भी जानकारी दी। इस अधिनियम का उद्देश्य एचआईवी के शिकार और इससे प्रभावित लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने यह भी कहा कि हेपेटाइटिस बी, एचआईवी से अधिक संक्रामक है, और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए वर्ष में एक बार हेपेटाइटिस बी का टेस्ट कराना अनिवार्य होना चाहिए।
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डॉ. वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ने भारत को एड्स मुक्त बनाने के लिए 95:95:95 की रणनीति तैयार की है। इसके अनुसार पहले 95 का अर्थ है, देश में एचआईवी संक्रमित लोगों की अनुमानित संख्या के 95 फीसदी लोगों को उनके एचआईवी स्टेटस की जानकारी होनी चाहिए। दूसरे 95 का अर्थ है, 95 फीसदी पॉजिटिव लोगों को एआरटी केंद्रों पर सतत उपचार मिलना चाहिए। तीसरे 95 का अर्थ है, इन लोगों का वायरल लोड कम होना चाहिए।
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कार्यशाला में जिला के सभी खंडों के कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर उपस्थित रहे। डॉ. सुनील वर्मा ने एचआईवी और एड्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एचआईवी एक वायरस है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है और एड्स एक ऐसी अवस्था है जो एचआईवी से संक्रमित लोगों में विकसित हो सकती है।
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कार्यशाला में उन्होंने यौन संचारित संक्रमणों और एचआईवी/एड्स (एक्ट) अधिनियम के बारे में भी जानकारी दी। इस अधिनियम का उद्देश्य एचआईवी के शिकार और इससे प्रभावित लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने यह भी कहा कि हेपेटाइटिस बी, एचआईवी से अधिक संक्रामक है, और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए वर्ष में एक बार हेपेटाइटिस बी का टेस्ट कराना अनिवार्य होना चाहिए।
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डॉ. वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ने भारत को एड्स मुक्त बनाने के लिए 95:95:95 की रणनीति तैयार की है। इसके अनुसार पहले 95 का अर्थ है, देश में एचआईवी संक्रमित लोगों की अनुमानित संख्या के 95 फीसदी लोगों को उनके एचआईवी स्टेटस की जानकारी होनी चाहिए। दूसरे 95 का अर्थ है, 95 फीसदी पॉजिटिव लोगों को एआरटी केंद्रों पर सतत उपचार मिलना चाहिए। तीसरे 95 का अर्थ है, इन लोगों का वायरल लोड कम होना चाहिए।