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इतिहास परिवर्तनशील, साक्ष्य मिलने पर इसमें बदलाव संभव : डॉ. हांडा
Tue, 10 Sep 2024 07:20 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 10 Sep 2024 07:20 AM IST
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शिमला में हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में मौजूद में विद्वान और शोधकर्ता। -स्रोत्र : संस्थ
रंगस (हमीरपुर)। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) नई दिल्ली और ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी के संयुक्त तत्वावधान में शिमला में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। उद्घाटन सत्र में प्रदेश के प्रख्यात पुरातत्ववेता और इतिहासकार डॉ. ओसी हांडा मुख्य अतिथि रहे।
डॉ. ओसी हांडा ने कहा कि इतिहास परिवर्तनशील है। नए साक्ष्य मिलने पर इसमें बदलाव होता है। भारत की ज्ञान परंपरा में मौजूद प्रमाणों के आधार पर इतिहास के तथ्यों की जांच परख की जानी जरूरी है। क्योंकि खश एक सिविलाइजेशन रही है जिसके आज भी अवशेष हैं। इसलिए लोक का इतिहास महत्वपूर्ण है।
शोध परियोजना निदेशक प्रो. नारायण सिंग राव ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के इतिहास लेखन की गहन और विस्तृत समझ विकसित करना है। उन्होंने कहा कि यह शोध परियोजना छह खंडों में विभक्त है। इसमें डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, डॉ. अंकुश भारद्वाज, डॉ. शिव भारद्वाज, डॉ. राकेश कुमार शर्मा, डॉ. राजकुमार और बारू राम ठाकुर खंड संयोजक के रूप में कार्य देख रहे हैं।
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इसके अतिरिक्त, डॉ. नीलम, डॉ. सरिता वर्मा, ऋषि कुमार भारद्वाज, केहर सिंह, रोहित मांडव और अन्य शोधकर्ता व कंप्यूटर ऑपरेटर इस परियोजना में कार्यरत हैं। कार्यशाला में कुल 26 विद्वान और शोधकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने क्षेत्रीय इतिहास लेखन और शोध प्रविधियों पर चर्चा की।
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डॉ. ओसी हांडा ने कहा कि इतिहास परिवर्तनशील है। नए साक्ष्य मिलने पर इसमें बदलाव होता है। भारत की ज्ञान परंपरा में मौजूद प्रमाणों के आधार पर इतिहास के तथ्यों की जांच परख की जानी जरूरी है। क्योंकि खश एक सिविलाइजेशन रही है जिसके आज भी अवशेष हैं। इसलिए लोक का इतिहास महत्वपूर्ण है।
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शोध परियोजना निदेशक प्रो. नारायण सिंग राव ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के इतिहास लेखन की गहन और विस्तृत समझ विकसित करना है। उन्होंने कहा कि यह शोध परियोजना छह खंडों में विभक्त है। इसमें डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, डॉ. अंकुश भारद्वाज, डॉ. शिव भारद्वाज, डॉ. राकेश कुमार शर्मा, डॉ. राजकुमार और बारू राम ठाकुर खंड संयोजक के रूप में कार्य देख रहे हैं।
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इसके अतिरिक्त, डॉ. नीलम, डॉ. सरिता वर्मा, ऋषि कुमार भारद्वाज, केहर सिंह, रोहित मांडव और अन्य शोधकर्ता व कंप्यूटर ऑपरेटर इस परियोजना में कार्यरत हैं। कार्यशाला में कुल 26 विद्वान और शोधकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने क्षेत्रीय इतिहास लेखन और शोध प्रविधियों पर चर्चा की।