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दिव्यांगों को चढ़ा दिया तीसरी मंजिल पर, फिर भी नहीं मिलीं सुविधाएं

Tue, 11 Feb 2020 09:51 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Feb 2020 09:51 PM IST
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health department creat problems  for disable
सिविल अस्पताल टौणी देवी में अक्षमता प्रमाण-पत्र बनाने के लिए पहुंचे दर्जनों दिव्यांग। - फोटो : Hamirpur-HP
टौणी देवी (हमीरपुर)। सिविल अस्पताल टौणी देवी में मंगलवार को अक्षमता प्रमाण-पत्र बनाने के लिए पहुंचे दर्जनों दिव्यांगों को विभागीय अव्यवस्था के कारण दिनभर परेशान होना पड़ा। कई बिना प्रमाण-पत्र बनवाए ही घर लौट गए। जिससे उन्हें दिन भर बैठने के बाद भी मायूसी झेलनी पड़ी। दिव्यांगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति काफी आक्रोश है। जिला कल्याण विभाग ने जिलाभर में दिव्यांगों के नए अक्षमता प्रमाण-पत्र बनाने, कृत्रिम अंग लगाने, यूडीआईडी कार्ड बनाने के लिए कार्यक्रम निर्धारित किया था। जिसके तहत यह शिविर मंगलवार को टौणी देवी अस्पताल में लगाया गया। शिविर में आने के लिए दिव्यांगों को विभाग ने पत्र भी भेजे थे।
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कल्याण विभाग की टीम निर्धारित समय पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पहुंची तथा इसके लिए सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई थीं। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली से दिव्यांगों के साथ ही कल्याण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी परेशान हुए। स्वास्थ्य विभाग के कर्मी पहले यूडीआईडी कार्ड बनाने में जुट गए। इसके बाद मेडिकल बोर्ड की टीम भी पहुंच गई और यूडीआईडी कार्ड बनाने का कार्य बंद कर दिया गया। कुछ देर के बाद दिव्यांगों के अक्षमता के लिए पंजीकरण करने के आदेश हो गए। पहले अस्पताल के नए भवन की तीसरी मंजिल पर दिव्यांगों को चढ़ाया गया तथा उसके बाद पुराने भवन में चले गए। जिससे दिव्यांग बड़ी मुश्किल से वहां पहुंचे। इसके बाद जब स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल बोर्ड की टीम बैठी तो कोई एक कक्ष में तो दूसरा डॉक्टर चौथे कक्ष में बैठा। कइयों को शनिवार को हमीरपुर अस्पताल आने के लिए कहा गया कि वहीं आपका सर्टिफिकेट बनेगा। जिसके चलते शिविर में पहुंचे कइयों के दिव्यांगता प्रमाण-पत्र नहीं बन पाए। इसी तरह से पहले से दिव्यांग अपनी प्रतिशतता बढ़ाने के लिए भी आए थे, उन्हें भी बैरंग ही घर लौटा दिया गया। इसके बाद यूडीआईडी कार्ड बनाने के लिए मुश्किलों से पहुंचे लोगों को भी वापस भेज दिया गया या लोकमित्र केंद्र की सेवा लेने का सुझाव देकर भेज दिया गया। शिविर में मात्र कृत्रिम अंग लगवाने वालों को कुछ राहत मिली।
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वहीं, तहसील कल्याण अधिकारी उर्मिल पटियाल का कहना है कि उनके विभाग ने पूरी व्यवस्था की हुई थी तथा उनकी ओर से कोई कमी नहीं थी। ऑनलाइन पंजीकरण और यूडीआईडी के कार्य में काफी देर लगी। स्वास्थ्य विभाग ही इसका पूरा संचालन करता है। वहीं, सीएमओ डॉ. सावित्री कटवाल का कहना है कि लापरवाही व अव्यवस्थाओं के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। इस संबंध में बीएमओ से जानकारी ली जाएगी। उसके बाद ही कुछ कह सकती हैं।
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