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Hamirpur (Himachal) News: सरकारी अनुदान में हो रही देरी, गोवंश के चारे पर मंडराया संकट
Mon, 26 May 2025 12:33 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 26 May 2025 12:33 AM IST
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खास खबर
गोशाला में रखे गोवंश के लिए नहीं आया अप्रैल महीने का बजट
हर महीने आते हैं जिला की गोशालाओं के लिए साढ़े 14 लाख रुपये
नवीन ठाकुर
हमीरपुर। जिला की गोशाला और गोसदनों में रखे पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि प्रदेश सरकार की ओर से गोवंश के लिए दिए जाने वाले बजट के आने में देरी हो रही है।
अप्रैल माह में गोवंश के लिए मासिक चारा अनुदान की राशि अभी प्राप्त नहीं हुई है, जिस कारण गोशाला में गोवंश के लिए चारे की कमी का संकट मंडरा गया है। फिलहाल जैसे-तैसे जन सहयोग से गोशाला का संचालन हो रहा है, लेकिन अनुदान में देरी गोशाला संचालन में परेशानी का सबब बन गई है। प्रदेश सरकार की ओर से एक पशु को चारे के लिए हर माह 700 रुपये दिए जाते हैं।
जिला में करीब 25 गोशाला और गो अभयारण्य है। यहां पर लगभग 2100 के करीब पशु हैं। इनके लिए हर महीने साढ़े 14 लाख रुपये की राशि प्राप्त होती है। हर माह यह राशि पांच से छह तारीख को मिल जाती है, लेकिन महीने की 25 तारीख हो गई है, अभी तक यह राशि प्राप्त नहीं हुई हैं। हाल ही में लंबूल स्थित एक गोशाला में भी चारे का संकट पैदा हो गया था, जिस कारण गोशाला संचालक भी परेशान हो गए थे। हालांकि, इसके बाद लोगों के सहयोग से चारे की समस्या कुछ समय के लिए खत्म हो गई है।
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वहीं, बजट नहीं आने के कारण अन्य गोशाला में भी चारे के संकट की संभावना बन सकती है। वहीं, खेती से किसानों की विमुखता और कृषि के लिए अन्य संसाधनों के प्रयोग के कारण पशुओं का प्रयोग कम हो गया है, जिस कारण लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ रही है। इन लावारिस पशुओं को गोशाला में पनाह दी जाती है।
कोट
जिला की गोशालाओं के लिए हर माह साढ़े 14 लाख रुपये का बजट मिलता है, लेकिन अभी तक बजट प्राप्त नहीं हुआ है। जिला में लगभग 2100 के करीब पशु गोशालाओं में हैं।
-डॉ. सतीश वर्मा, सहायक निदेशक (परियोजना) पशुपालन विभाग, हमीरपुर
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गोशाला में रखे गोवंश के लिए नहीं आया अप्रैल महीने का बजट
हर महीने आते हैं जिला की गोशालाओं के लिए साढ़े 14 लाख रुपये
नवीन ठाकुर
हमीरपुर। जिला की गोशाला और गोसदनों में रखे पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि प्रदेश सरकार की ओर से गोवंश के लिए दिए जाने वाले बजट के आने में देरी हो रही है।
अप्रैल माह में गोवंश के लिए मासिक चारा अनुदान की राशि अभी प्राप्त नहीं हुई है, जिस कारण गोशाला में गोवंश के लिए चारे की कमी का संकट मंडरा गया है। फिलहाल जैसे-तैसे जन सहयोग से गोशाला का संचालन हो रहा है, लेकिन अनुदान में देरी गोशाला संचालन में परेशानी का सबब बन गई है। प्रदेश सरकार की ओर से एक पशु को चारे के लिए हर माह 700 रुपये दिए जाते हैं।
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जिला में करीब 25 गोशाला और गो अभयारण्य है। यहां पर लगभग 2100 के करीब पशु हैं। इनके लिए हर महीने साढ़े 14 लाख रुपये की राशि प्राप्त होती है। हर माह यह राशि पांच से छह तारीख को मिल जाती है, लेकिन महीने की 25 तारीख हो गई है, अभी तक यह राशि प्राप्त नहीं हुई हैं। हाल ही में लंबूल स्थित एक गोशाला में भी चारे का संकट पैदा हो गया था, जिस कारण गोशाला संचालक भी परेशान हो गए थे। हालांकि, इसके बाद लोगों के सहयोग से चारे की समस्या कुछ समय के लिए खत्म हो गई है।
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वहीं, बजट नहीं आने के कारण अन्य गोशाला में भी चारे के संकट की संभावना बन सकती है। वहीं, खेती से किसानों की विमुखता और कृषि के लिए अन्य संसाधनों के प्रयोग के कारण पशुओं का प्रयोग कम हो गया है, जिस कारण लावारिस पशुओं की संख्या बढ़ रही है। इन लावारिस पशुओं को गोशाला में पनाह दी जाती है।
कोट
जिला की गोशालाओं के लिए हर माह साढ़े 14 लाख रुपये का बजट मिलता है, लेकिन अभी तक बजट प्राप्त नहीं हुआ है। जिला में लगभग 2100 के करीब पशु गोशालाओं में हैं।
-डॉ. सतीश वर्मा, सहायक निदेशक (परियोजना) पशुपालन विभाग, हमीरपुर