{"_id":"653970d57108ae052a0c3629","slug":"german-technology-will-be-used-in-the-construction-of-roads-hamirpur-hp-news-c-94-1-ssml1008-12112-2023-10-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होगी जर्मन तकनीक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होगी जर्मन तकनीक
विज्ञापन
हमीरपुर। लोक निर्माण विभाग जल्द ही जिले की 21 सड़कों को अपग्रेड करने जा रहा है। यह सड़कें प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत आती हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का सफर और बेहतर होगा। केंद्र सरकार को इन सड़कों की अपग्रेडेशन के लिए जून 2023 में डीपीआर बनाकर भेजी गई थी। इसकी स्वीकृति केंद्र सरकार ने सितंबर में दे दी है। अब इन सड़कों को अपग्रेड करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। दिसंबर 2023 से इन सड़कों को अपग्रेड करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। 177 किलोमीटर इन सड़कों पर 175 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इसमें फुल डेफ्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक का पहली बार इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक से पुरानी सड़क के पूरे क्रस्ट का दोबारा इस्तेमाल हो जाता है। इससे सड़क का निर्माण तेजी से होता है।
इसके अलावा सीमेंट ट्रीटेड बेस्ड (एसटीबी) सड़कों का भी निर्माण किया जाएगा। एफडीआर तकनीक केवल 19 किलोमीटर सड़क में ही किया जाना है, जिस पर 15.29 करोड़ खर्च किए जाएंगे। एसटीबी तकनीक से जिले की 43.620 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस पर 52.28 करोड़ खर्च किए जाएंगे। जिला लोक निर्माण विभाग इन दो तकनीकों का इस्तेमाल हमीरपुर, बड़सर, भोरंज ब्लाॅक व टौणी देवी क्षेत्र में करने जा रहा है। गधियाणा-भड़ेतर, हरसण-सगवां-ककरयाड़, बस्सी-सरकाघाट, झनिकर से भड़ेतर सड़क, बड़सर बाया नेरी गुजरेड़ा, बड़सर से चंबेह सड़कों पर एफडीआर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त हमीरपुर-बड़ू, हमीरपुर-भोरंज, लंबलू-दबरेड़ा, दबरेड़ा से बाक्कर खड्ड, भट्टा-सलौणी-दियोटसिद्ध,पनयाली-कश्मीर रोड व धनेटा बड़सर रोड में सीटीबी तकनीक का इस्तेमाल सड़कों को अपग्रेड करने के लिए किया जाएगा। इस कार्य को लोक निर्माण विभाग ने वित्त वर्ष 2024-2025 में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
बाक्स
क्या है एफडीआर और एसटीबी तकनीक
फुल डेफ्थ रिक्लेमेशन तकनीक वह है जिसमें सड़क की पुरानी सामग्री को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक का जिले में पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़क की पुरानी सामग्री को जर्मन तकनीक से रिसाइकल किया जाता है और उस सामग्री को केमिकल और सीमेंट का इस्तेमाल करके दोबारा प्रयोग में लाया जाता है। सड़कों पर किए जाने वाले करोड़ों रुपये के खर्चे को इस तकनीक से कम किया जा रहा है। वहीं सीमेंट ट्रीटेड बेस्ड तकनीक में सड़क को सीमेंट से तैयार किया जाता है।
विज्ञापन
कोट्स
लोक निर्माण विभाग हमीरपुर के अधीक्षण अभियंता विजय कुमार चौधरी ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत आने वाली 21 सड़कों को अपग्रेड करने का कार्य दिसंबर में शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही टेंडर भी कॉल किए जाएंगे। इन 177 किलोमीटर सड़कों पर 175 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसकी स्वीकृति केंद्र सरकार ने प्रदान कर दी है। इसके अलावा एफडीआर तकनीक का जिले में पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है।
विज्ञापन
इसके अलावा सीमेंट ट्रीटेड बेस्ड (एसटीबी) सड़कों का भी निर्माण किया जाएगा। एफडीआर तकनीक केवल 19 किलोमीटर सड़क में ही किया जाना है, जिस पर 15.29 करोड़ खर्च किए जाएंगे। एसटीबी तकनीक से जिले की 43.620 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस पर 52.28 करोड़ खर्च किए जाएंगे। जिला लोक निर्माण विभाग इन दो तकनीकों का इस्तेमाल हमीरपुर, बड़सर, भोरंज ब्लाॅक व टौणी देवी क्षेत्र में करने जा रहा है। गधियाणा-भड़ेतर, हरसण-सगवां-ककरयाड़, बस्सी-सरकाघाट, झनिकर से भड़ेतर सड़क, बड़सर बाया नेरी गुजरेड़ा, बड़सर से चंबेह सड़कों पर एफडीआर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त हमीरपुर-बड़ू, हमीरपुर-भोरंज, लंबलू-दबरेड़ा, दबरेड़ा से बाक्कर खड्ड, भट्टा-सलौणी-दियोटसिद्ध,पनयाली-कश्मीर रोड व धनेटा बड़सर रोड में सीटीबी तकनीक का इस्तेमाल सड़कों को अपग्रेड करने के लिए किया जाएगा। इस कार्य को लोक निर्माण विभाग ने वित्त वर्ष 2024-2025 में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
विज्ञापन
बाक्स
क्या है एफडीआर और एसटीबी तकनीक
फुल डेफ्थ रिक्लेमेशन तकनीक वह है जिसमें सड़क की पुरानी सामग्री को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक का जिले में पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़क की पुरानी सामग्री को जर्मन तकनीक से रिसाइकल किया जाता है और उस सामग्री को केमिकल और सीमेंट का इस्तेमाल करके दोबारा प्रयोग में लाया जाता है। सड़कों पर किए जाने वाले करोड़ों रुपये के खर्चे को इस तकनीक से कम किया जा रहा है। वहीं सीमेंट ट्रीटेड बेस्ड तकनीक में सड़क को सीमेंट से तैयार किया जाता है।
विज्ञापन
कोट्स
लोक निर्माण विभाग हमीरपुर के अधीक्षण अभियंता विजय कुमार चौधरी ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत आने वाली 21 सड़कों को अपग्रेड करने का कार्य दिसंबर में शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही टेंडर भी कॉल किए जाएंगे। इन 177 किलोमीटर सड़कों पर 175 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसकी स्वीकृति केंद्र सरकार ने प्रदान कर दी है। इसके अलावा एफडीआर तकनीक का जिले में पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है।