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Hamirpur (Himachal) News: पीलिया से ही हुई वन रक्षक की मौत, मेडिकल जांच में खुलासा
Tue, 26 Sep 2023 12:10 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 26 Sep 2023 12:10 AM IST
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हमीरपुर। ग्राम पंचायत सराहकड़ निवासी 21 वर्षीय वन रक्षक जतिन रांगड़ा की मौत पीलिया के कारण ही हुई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित जांच कमेटी ने मौत के कारणों को तलाशने के लिए तीन बड़े अस्पतालों से रिकॉर्ड हासिल कर विस्तृत अध्ययन किया। इसमें साफ तौर पर पाया गया कि वन रक्षक की मौत पीलिया के कारण ही हुई है।
दरअसल इस साल जून में कराड़ा पेयजल योजना के अंतर्गत आने वाली तीन ग्राम पंचायतों में पीलिया फैला था। 103 लोग पीलिया की चपेट में आए थे। जतिन रांगड़ा और उसके बहन को भी पीलिया ने अपनी चपेट में लिया था। बहन डॉक्टरी परामर्श व दवाइयां लेने के बाद ठीक हो गई लेकिन जतिन रांगड़ा की हालत में सुधार न हो पाया। उसे पहले सिविल अस्पताल टौणीदेवी भर्ती किया गया। इसके बाद डॉ. राधा कृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में भर्ती किया गया। इस बीच कुछ दिन उसकी तबीयत ठीक रही। जब दोबारा तबीयत खराब हुई और लंबे समय तक स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो पाया तो परिजन बेटे को पंजाब के लुधियाना स्थित एक नामी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले गए। जहां पर 10 सितंबर को जतिन रांगड़ा ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। जतिन रांगड़ा दिसंबर 2021 में वन विभाग में वनरक्षक के पद पर भर्ती हुआ था। नौजवान बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उधर, जलशक्ति विभाग अभी तक यह कह रहा है कि उनकी पेयजल स्कीम का पानी दूषित नहीं। पेयजल स्कीम का पानी सही है तो 100 से अधिक लोग पीलिया की चपेट में किस कारण से आए। विधायक राजेंद्र राणा, उपायुक्त हमीरपुर हेमराज बैरवा, एसडीएम मनीष कुमार सोनी ने भी इस स्कीम का मौके पर पहुंच कर जायजा लिया था। लेकिन, पीलिया कैसे फैला तीन माह बाद भी पहेली बना हुआ है।
पानी की गुणवत्ता पर उठते रहे हैं सवाल
जलशक्ति विभाग की पेयजल गुणवत्ता पर कई बार सवाल उठते रहे हैं। इसी साल फरवरी में ही मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह विधानसभा क्षेत्र नादौन के तहत आते रंगस क्षेत्र में भी दूषित पानी के सेवन से 1027 लोग डायरिया के चपेट में आए थे। उपमुख्यमंत्री के आदेश पर पुलिस ने मामला भी दर्ज किया, लेकिन उसके बाद की कार्रवाई ठप पड़ गई।
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कोट्स
21 वर्षीय वन रक्षक जतिन रांगड़ा की मौत के मामले में सीएमओ कार्यालय की ओर से विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है। इसमें जिला स्वास्थ्य अधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी, जिला स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारी और एक मेडिसन विशेषज्ञ शामिल हैं। सिविल अस्पताल टौणीदेवी, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर और लुधियाना स्थित डीएमसी से प्राप्त रिकॉर्ड का अध्ययन करने पर पाया कि युवक पीलिया से पीड़ित था। पिछला रिकॉर्ड भी जांचा गया, जिसमें वह किसी अन्य बीमार से पीड़ित नहीं पाया गया। यह रिपोर्ट शीघ्र ही प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी।
-डॉ. आरके अग्निहोत्री, सीएमओ, हमीरपुर।
बाक्स:
कराड़ा पेयजल योजना के पानी की गुणवत्ता सही है। जलशक्ति विभाग ने सैंपल लेकर टेस्ट भी करवाए हैं। एहतियातन इस स्कीम में क्लोरिनेशन गैस प्लांट भी फिट करवा दिया है लेकिन जांच में यह पता चला था कि कराड़ा पेयजल योजना का पानी जहां से लिफ्ट होता है। उस स्रोत में गांव के ही किसी व्यक्ति ने सीवरेज की गंदगी उड़ेल दी थी। इसके चलते पानी दूषित हुआ।
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दरअसल इस साल जून में कराड़ा पेयजल योजना के अंतर्गत आने वाली तीन ग्राम पंचायतों में पीलिया फैला था। 103 लोग पीलिया की चपेट में आए थे। जतिन रांगड़ा और उसके बहन को भी पीलिया ने अपनी चपेट में लिया था। बहन डॉक्टरी परामर्श व दवाइयां लेने के बाद ठीक हो गई लेकिन जतिन रांगड़ा की हालत में सुधार न हो पाया। उसे पहले सिविल अस्पताल टौणीदेवी भर्ती किया गया। इसके बाद डॉ. राधा कृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में भर्ती किया गया। इस बीच कुछ दिन उसकी तबीयत ठीक रही। जब दोबारा तबीयत खराब हुई और लंबे समय तक स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो पाया तो परिजन बेटे को पंजाब के लुधियाना स्थित एक नामी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले गए। जहां पर 10 सितंबर को जतिन रांगड़ा ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। जतिन रांगड़ा दिसंबर 2021 में वन विभाग में वनरक्षक के पद पर भर्ती हुआ था। नौजवान बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उधर, जलशक्ति विभाग अभी तक यह कह रहा है कि उनकी पेयजल स्कीम का पानी दूषित नहीं। पेयजल स्कीम का पानी सही है तो 100 से अधिक लोग पीलिया की चपेट में किस कारण से आए। विधायक राजेंद्र राणा, उपायुक्त हमीरपुर हेमराज बैरवा, एसडीएम मनीष कुमार सोनी ने भी इस स्कीम का मौके पर पहुंच कर जायजा लिया था। लेकिन, पीलिया कैसे फैला तीन माह बाद भी पहेली बना हुआ है।
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पानी की गुणवत्ता पर उठते रहे हैं सवाल
जलशक्ति विभाग की पेयजल गुणवत्ता पर कई बार सवाल उठते रहे हैं। इसी साल फरवरी में ही मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह विधानसभा क्षेत्र नादौन के तहत आते रंगस क्षेत्र में भी दूषित पानी के सेवन से 1027 लोग डायरिया के चपेट में आए थे। उपमुख्यमंत्री के आदेश पर पुलिस ने मामला भी दर्ज किया, लेकिन उसके बाद की कार्रवाई ठप पड़ गई।
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21 वर्षीय वन रक्षक जतिन रांगड़ा की मौत के मामले में सीएमओ कार्यालय की ओर से विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है। इसमें जिला स्वास्थ्य अधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी, जिला स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारी और एक मेडिसन विशेषज्ञ शामिल हैं। सिविल अस्पताल टौणीदेवी, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर और लुधियाना स्थित डीएमसी से प्राप्त रिकॉर्ड का अध्ययन करने पर पाया कि युवक पीलिया से पीड़ित था। पिछला रिकॉर्ड भी जांचा गया, जिसमें वह किसी अन्य बीमार से पीड़ित नहीं पाया गया। यह रिपोर्ट शीघ्र ही प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी।
-डॉ. आरके अग्निहोत्री, सीएमओ, हमीरपुर।
बाक्स:
कराड़ा पेयजल योजना के पानी की गुणवत्ता सही है। जलशक्ति विभाग ने सैंपल लेकर टेस्ट भी करवाए हैं। एहतियातन इस स्कीम में क्लोरिनेशन गैस प्लांट भी फिट करवा दिया है लेकिन जांच में यह पता चला था कि कराड़ा पेयजल योजना का पानी जहां से लिफ्ट होता है। उस स्रोत में गांव के ही किसी व्यक्ति ने सीवरेज की गंदगी उड़ेल दी थी। इसके चलते पानी दूषित हुआ।