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Hamirpur (Himachal) News: एफडीआर तकनीक से चोडू-जीहण सड़क का किया जा रहा विस्तारीकरण कार्य
Thu, 14 Nov 2024 02:25 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 14 Nov 2024 02:25 AM IST
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सचित्र
लोनिवि खर्च करेगा साढ़े चार करोड़ की राशि, लंबे अरसे तक नहीं हो सकेगी सड़क क्षतिग्रस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
रंगस (हमीरपुर )। उपमंडल नादौन के अंतर्गत चोडू से जीहण वाया भोऊ सड़क का विस्तारीकरण कार्य प्रगति पर चल रहा है। इस सड़क के जीर्णोद्धार के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत साढ़े चार करोड़ रुपये की धनराशि अवार्ड हुई है।
इसी के तहत सड़क को स्तरोन्नत किया जाएगा। प्रस्तावित परियोजना के तहत सड़क का विस्तारीकरण एफडीआर यानी फुल डेपथ रिकलेमेशन तकनीक के आधार पर किया जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक से बनी सड़क काफी समय तक क्षतिग्रस्त नहीं होती। एफडीआर तकनीक के तहत सड़क निर्माण में तारकोल का प्रयोग नहीं होता, बल्कि मशीन से सीमेंट और उखाड़ी सड़क सामग्री का मिश्रण करके बनाया जाता है। पुरानी सड़क की मिट्टी समेत अन्य चीजों का इस्तेमाल दोबारा सड़क बनाने में किया जाता है। ऐसे में यातायात का खर्च भी नहीं होता और बजट की बचत भी होती है। माइनिंग सामग्री को भी उपयोग में नहीं लाया जाता।
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता पंकज कौशल ने कहा कि एफडीआर नई तकनीक से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इसकी कुल लंबाई छह किलोमीटर है और सड़क को 3.75 मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है, जबकि पूर्व निर्मित सड़क 3.5 मीटर चौड़ी थी।
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लोनिवि खर्च करेगा साढ़े चार करोड़ की राशि, लंबे अरसे तक नहीं हो सकेगी सड़क क्षतिग्रस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
रंगस (हमीरपुर )। उपमंडल नादौन के अंतर्गत चोडू से जीहण वाया भोऊ सड़क का विस्तारीकरण कार्य प्रगति पर चल रहा है। इस सड़क के जीर्णोद्धार के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत साढ़े चार करोड़ रुपये की धनराशि अवार्ड हुई है।
इसी के तहत सड़क को स्तरोन्नत किया जाएगा। प्रस्तावित परियोजना के तहत सड़क का विस्तारीकरण एफडीआर यानी फुल डेपथ रिकलेमेशन तकनीक के आधार पर किया जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक से बनी सड़क काफी समय तक क्षतिग्रस्त नहीं होती। एफडीआर तकनीक के तहत सड़क निर्माण में तारकोल का प्रयोग नहीं होता, बल्कि मशीन से सीमेंट और उखाड़ी सड़क सामग्री का मिश्रण करके बनाया जाता है। पुरानी सड़क की मिट्टी समेत अन्य चीजों का इस्तेमाल दोबारा सड़क बनाने में किया जाता है। ऐसे में यातायात का खर्च भी नहीं होता और बजट की बचत भी होती है। माइनिंग सामग्री को भी उपयोग में नहीं लाया जाता।
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लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता पंकज कौशल ने कहा कि एफडीआर नई तकनीक से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इसकी कुल लंबाई छह किलोमीटर है और सड़क को 3.75 मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है, जबकि पूर्व निर्मित सड़क 3.5 मीटर चौड़ी थी।
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