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Hamirpur (Himachal) News: पूर्व सैनिकों ने साझा की पुरानी यादें
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6वीं बटालियन दि डोगरा रेजिमेंट ने मनाया बैटल ऑनर डे
संवाद न्यूज एजेंसी
डिडवीं टिक्कर (हमीरपुर)। 6वीं बटालियन दि डोगरा रेजिमेंट ने शनिवार को 59वां बटालियन बैटल ऑनर डे निजी होटल में धूमधाम से मनाया। कैप्टन किशन चंद सांख्यान ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने पूर्व सैनिकों को बटालियन का इतिहास बताया। कहा कि 17 डोगरा रेजिमेंट की 11वीं बटालियन का पुन: गठन 16 अगस्त 1922 को जालंधर छावनी में इंडियन टेरिटोरियल सेना एक्ट के अधीन किया गया था। यही बटालियन वर्तमान में छह डोगरा की फॉर्रनर थी। 15 सितंबर 1941 को इसे टेरिटोरियल सेना से उठाकर स्थायी सेना के ऊंचे दर्जे पर छह डोगरा बटालियन का नाम दिया गया। विश्व युद्ध में दो डोगरा को भारी नुकसान होने के कारण 1946 में इसे दो डोगरा बटालियन में मिला दिया गया। इस बटालियन ने बहुत सी लड़ाइयां लड़ीं परंतु यह अपने आयाम तक पहुंचने से नहीं रुकी। इस बटालियन को वीर चक्र मरणोपरांत से विभूषित किया गया। इस सेना ने एक महावीर चक्कर, दो वीर चक्कर, तीन सेना मेडल हासिल किए। इसी प्रकार यह पलटन अपने इरादों पर कार्यों को करती हुई आगे से आगे बढ़ती गई। अप्रैल 2012 से अक्तूबर 2015 तक पलटन मणिपुर में तैनात रही। इसमें वहां भी अपने संघर्ष जारी रखा। इतिहास सुनकर सभी सैनिक भाव विभोर हो उठे। कैप्टन किशन चंद सांख्यान ने कहा कि आगामी वर्ष हम इससे भी बढ़-चढ़कर इस ऑनर दिवस को मनाएंगे और अधिक से अधिक संख्या में भाग लेंगे। इस मौके पर पूर्व सैनिकों की ओर से नृत्य व गायन का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर सूबेदार पाला राम, सूबेदार बुद्धि चंद, एसएम ऑनरेरी कैप्टन लेखराज, कैप्टन किशन चंद ,कैप्टन प्रताप सिंह, एसएम ऑनरेरी कैप्टन रवि सिंह, एसएम ऑनरेरी कैप्टन अवतार सिंह, हवलदार बसंत राम हवलदार अनिल कुमार सहित 100 के लगभग सैनिक विशेष तौर पर मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
डिडवीं टिक्कर (हमीरपुर)। 6वीं बटालियन दि डोगरा रेजिमेंट ने शनिवार को 59वां बटालियन बैटल ऑनर डे निजी होटल में धूमधाम से मनाया। कैप्टन किशन चंद सांख्यान ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने पूर्व सैनिकों को बटालियन का इतिहास बताया। कहा कि 17 डोगरा रेजिमेंट की 11वीं बटालियन का पुन: गठन 16 अगस्त 1922 को जालंधर छावनी में इंडियन टेरिटोरियल सेना एक्ट के अधीन किया गया था। यही बटालियन वर्तमान में छह डोगरा की फॉर्रनर थी। 15 सितंबर 1941 को इसे टेरिटोरियल सेना से उठाकर स्थायी सेना के ऊंचे दर्जे पर छह डोगरा बटालियन का नाम दिया गया। विश्व युद्ध में दो डोगरा को भारी नुकसान होने के कारण 1946 में इसे दो डोगरा बटालियन में मिला दिया गया। इस बटालियन ने बहुत सी लड़ाइयां लड़ीं परंतु यह अपने आयाम तक पहुंचने से नहीं रुकी। इस बटालियन को वीर चक्र मरणोपरांत से विभूषित किया गया। इस सेना ने एक महावीर चक्कर, दो वीर चक्कर, तीन सेना मेडल हासिल किए। इसी प्रकार यह पलटन अपने इरादों पर कार्यों को करती हुई आगे से आगे बढ़ती गई। अप्रैल 2012 से अक्तूबर 2015 तक पलटन मणिपुर में तैनात रही। इसमें वहां भी अपने संघर्ष जारी रखा। इतिहास सुनकर सभी सैनिक भाव विभोर हो उठे। कैप्टन किशन चंद सांख्यान ने कहा कि आगामी वर्ष हम इससे भी बढ़-चढ़कर इस ऑनर दिवस को मनाएंगे और अधिक से अधिक संख्या में भाग लेंगे। इस मौके पर पूर्व सैनिकों की ओर से नृत्य व गायन का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर सूबेदार पाला राम, सूबेदार बुद्धि चंद, एसएम ऑनरेरी कैप्टन लेखराज, कैप्टन किशन चंद ,कैप्टन प्रताप सिंह, एसएम ऑनरेरी कैप्टन रवि सिंह, एसएम ऑनरेरी कैप्टन अवतार सिंह, हवलदार बसंत राम हवलदार अनिल कुमार सहित 100 के लगभग सैनिक विशेष तौर पर मौजूद रहे।