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20 फीसदी फील्ड कर्मचारियों को ही सैनिटाईजर या मास्क मुहैया करवाए : खरवाड़ा
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नादौन (हमीरपुर)। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा ने कहा है कि राज्य बिजली बोर्ड का अधिकारी वर्ग कोरोना वायरस के खतरे को लेकर अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के प्रति बिल्कुल गंभीर नहीं है।
यूनियन ने बिजली बोर्ड के प्रबंधक वर्ग से फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों को मास्क, सैनिटाइजर और ग्लब्स मुहैया करवाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि बोर्ड प्रबंधन ने इस संबंध में आदेश भी जारी किए थे। लेकिन निचले स्तर पर आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोई सुविधा मुहैया नहीं करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि यूनियन ने प्रदेश स्तर पर कांगड़ा, डल्हौजी, बिलासपुर, मंडी, ऊना, नाहन, रामपुर और शिमला सर्कलों में बात करने के बाद पता चला है कि मात्र 15-20 फीसदी फील्ड कर्मचारियों को ही सैनिटाइजर या मास्क मुहैया करवाए गए हैं। जब सैनिटाइजर या मास्क के बिल पास करवाने की बारी आएगी तो उनमें अधिकारियों द्वारा कोई कमी नहीं रखी जाएगी। कई जगह जहां पर मास्क दिए हैं वहां पर सैनिटाइजर मुहैया नहीं करवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर जगह पर कर्मचारियों ने अपनी जेब से सुरक्षा का सामान खरीदा है। बिजली बोर्ड के अधिकांश अधिकारी या तो अपने घरों में बैठे हैं या अपने कार्यालय तक सीमित हैं लेकिन जो कर्मचारी जीवन को खतरे में डालते हुए फील्ड में विद्युत आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए दौड़-भाग कर रहे हैं, उनकी सुरक्षा के प्रति फील्ड के अधिकारी बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि यूनियन ने बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक से जब इस विषय पर बात की तो उन्होंने कहा कि हमने काफी पहले निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने फिर से निर्देश जारी करने की बात कही है। उन्होंने मास्क, सैनिटाइजर और ग्लब्स मुहैया करवाने की मांग की।
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यूनियन ने बिजली बोर्ड के प्रबंधक वर्ग से फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों को मास्क, सैनिटाइजर और ग्लब्स मुहैया करवाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि बोर्ड प्रबंधन ने इस संबंध में आदेश भी जारी किए थे। लेकिन निचले स्तर पर आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोई सुविधा मुहैया नहीं करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि यूनियन ने प्रदेश स्तर पर कांगड़ा, डल्हौजी, बिलासपुर, मंडी, ऊना, नाहन, रामपुर और शिमला सर्कलों में बात करने के बाद पता चला है कि मात्र 15-20 फीसदी फील्ड कर्मचारियों को ही सैनिटाइजर या मास्क मुहैया करवाए गए हैं। जब सैनिटाइजर या मास्क के बिल पास करवाने की बारी आएगी तो उनमें अधिकारियों द्वारा कोई कमी नहीं रखी जाएगी। कई जगह जहां पर मास्क दिए हैं वहां पर सैनिटाइजर मुहैया नहीं करवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर जगह पर कर्मचारियों ने अपनी जेब से सुरक्षा का सामान खरीदा है। बिजली बोर्ड के अधिकांश अधिकारी या तो अपने घरों में बैठे हैं या अपने कार्यालय तक सीमित हैं लेकिन जो कर्मचारी जीवन को खतरे में डालते हुए फील्ड में विद्युत आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए दौड़-भाग कर रहे हैं, उनकी सुरक्षा के प्रति फील्ड के अधिकारी बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं।
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उन्होंने कहा कि यूनियन ने बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक से जब इस विषय पर बात की तो उन्होंने कहा कि हमने काफी पहले निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने फिर से निर्देश जारी करने की बात कही है। उन्होंने मास्क, सैनिटाइजर और ग्लब्स मुहैया करवाने की मांग की।
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