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Hamirpur (Himachal) News: ईको फ्रेंडली पोर्टेबल बुखारी में ओवन के साथ इनबिल्ट स्टीमर और गीजर की मिलेगी सुविधा

Tue, 10 Mar 2026 01:18 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Tue, 10 Mar 2026 01:18 AM IST
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Eco-friendly portable bukhari with oven, inbuilt steamer and geyser
इको फ्रेंडल बुखारी के प्रोटोटाइप को पेश करते रोहि और अश्वनी इंक्यूवेशन सेंटर प्रभारी डॉक्टर पमि
हमीरपुर। पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा के बेहतर उपयोग की दिशा में एक अनूठा नवाचार सामने आया है। हमीरपुर जिले के बान्हवी निवासी दो व्यक्तियों ने पारंपरिक बुखारी (तंदूर) को आधुनिक तकनीक के साथ ईको फ्रेंडली हाइटेक बुखारी में बदल दिया है।
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इस पोर्टेबल बुखारी में ओवन, स्टीमर और गीजर जैसी कई सुविधाएं एक साथ उपलब्ध हैं, जबकि इसकी सबसे बड़ी खासियत लकड़ी की खपत को करीब 40 फीसदी तक कम करना है। तीन फुट ऊंचाई वाली इस बुखारी में 20 लीटर पानी के भंडारण की सुविधा है और गर्म पानी निकालने के लिए नल भी लगाया गया है।
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इसके साथ ही स्टीमर का इनबिल्ट सेटअप भी दिया गया है। बुखारी को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए इसमें चार पहिए लगाए गए हैं, जिससे यह पूरी तरह पोर्टेबल बन गई है। हमीरपुर जिले के बाहन्वी निवासी विज्ञान स्नातक एवं सरकारी कर्मी रोहित शर्मा और जमा दो पास उद्यमी अश्वनी शर्मा ने इस हाइटेक बुखारी का प्रोटोटाइप तैयार किया है।
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दोनों ने अपने इस नवाचार को एनआईटी हमीरपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्टार्टअप शिखर सम्मेलन-2026 में प्रस्तुत किया। सम्मेलन में इस प्रोटोटाइप को इंक्यूबेशन के लिए चयनित किया गया और प्रतियोगिता में इसे दूसरा स्थान मिला। इसके लिए दोनों उद्यमियों को तीस हजार रुपये पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

बर्फीले क्षेत्रों में घरों को गर्म रखने के लिए पारंपरिक तंदूर का व्यापक प्रयोग होता है, जिसे बुखारी कहा जाता है। हालांकि पारंपरिक बुखारी का उपयोग सीमित होता है, जबकि इस हाइटेक बुखारी में लकड़ी की खपत कम करने, अधिक गर्माहट देने और कई उपयोगी सुविधाएं जोड़ने का प्रयास किया गया है।
रोहित शर्मा के अनुसार ठंडे क्षेत्रों में जहां तंदूर का सालभर उपयोग होता है, वहां करीब 2700 किलोग्राम लकड़ी की खपत होती है। इस हाइटेक बुखारी के प्रयोग से यह खपत लगभग 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है और इसकी गर्माहट भी अधिक होगी।




टर्किश बुखारी को देगी टक्कर

मौजूदा समय में बाजार में उपलब्ध टर्किश बुखारी कुछ समान सुविधाएं देती है, लेकिन उसमें पानी के भंडारण और इनबिल्ट स्टीमर जैसी सुविधा नहीं है। टर्किश बुखारी की कीमत करीब एक लाख रुपये तक होती है, जबकि इस हाइटेक बुखारी की कीमत लगभग 40 हजार रुपये रखी गई है। महज दो किलोग्राम लकड़ी से इसे करीब दस मिनट में गर्म किया जा सकता है और इसके सभी फीचर एक साथ उपयोग में लाए जा सकते हैं।




एक बार जलाने पर कई घंटे तक गर्म रहेगा है कमरा

पारंपरिक तंदूर में सामान्यतः कमरे को गर्म करने और खाना पकाने की सुविधा ही मिलती है। इस हाइटेक बुखारी में पानी गर्म करने, खाना बनाने और कमरे को गर्म रखने की सुविधाएं एक साथ उपलब्ध हैं। एक बार खाना बनाने के बाद यह कमरे को सात से आठ घंटे तक गर्म रख सकती है।




पारंपरिक व्यंजनों के लिए इनबिल्ट स्टीमर

बुखारी में ओवन का फीचर भोजन को गर्म रखने और पकाने में सहायक है। इसके ऊपरी हिस्से में स्टीमर का इनबिल्ट सेटअप दिया गया है, जिससे अलग स्टीमर की जरूरत नहीं रहती। आवश्यकता पड़ने पर स्टीमर को हटाकर बुखारी को तवे की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है और अन्य बर्तनों में भी भोजन पकाया जा सकता है।




कोट

पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा के बेहतर उपयोग को ध्यान में रखते हुए यह नवाचार तैयार किया गया है। इंक्यूबेशन सेंटर में इसे निशुल्क इंक्यूबेशन की सुविधा दी जाएगी और प्रोटोटाइप को विकसित करने के साथ पेटेंट दाखिल करने में भी उद्यमियों की सहायता की जाएगी।

-डॉ. पमिता अवस्थी, प्रभारी इंक्यूबेशन सेंटर, एनआईटी हमीरपुर
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