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Hamirpur (Himachal) News: चार करोड़ के आयुष अस्पताल में मशीनरी पर जम रही धूल
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आयुष अस्पताल बिझड़ी में नहीं मिली योग और पंचकर्म की सुविधा
भवन होने के बावजूद आयुष पद्धति से इलाज से वंचित हैं मरीज
योगाभ्यास, पंचकर्म आदि के लिए आई हैं मशीनें, वर्तमान में चल रही महज ओपीडी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिझड़ी (हमीरपुर)। आयुष अस्पताल बिझड़ी में अभी तक पंचकर्म, योगाभ्यास आदि की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। क्षेत्र में तीन वर्ष पूर्व आयुष अस्पताल के निर्माण कर करोड़ों की मशीनरी लगाई गई है लेकिन अस्पताल में विशेषज्ञ न होने से मशीनरी का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों को उपचार करवाने के लिए दूरदराज के अस्पतालों में भटकना पड़ रहा है। आयुष विभाग की ओर से चार करोड़ से अधिक राशि खर्च करके इस अस्पताल का निर्माण करवाया गया है। जब उद्घाटन हुआ तो लोगों को आस जगी थी कि यहां पर योगा थैरेपी की सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद लोगों को सुविधा नहीं मिल पा रही है।
वर्तमान में अस्पताल में महज ओपीडी की सुविधा है। इस आयुर्वेदिक अस्पताल में लोगों को थैरेपी, योग आदि की सुविधाएं भी मिलनी थी। इसके लिए करोड़ों की मशीनरी भी अस्पताल में आई लेकिन आज तक उनका इस्तेमाल नहीं हो पाया। मशीनें भवन में धूल फांक रही हैं। स्थानीय लोगों व्रिकम, संतोष, आदित्य, मीना, सलोचना आदि ने कहा कि अस्पताल तो बना दिया लेकिन यहां पर सुविधाएं नाममात्र हैं। एसे में सरकार को चाहिए कि यहां पर कर्मचारियों की तैनाती हो और लोगों को आयुष पद्धति से इलाज करवाने में सुविधा रहे। इस बारे में उपमंडलीय आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. जगतार सिंह ने कहा कि काफी पहले प्रस्ताव भेजा है। आगामी समय में जब आचार संहिता हटेगी तो हो सकता है कि जल्द ही यहां पर लोगों को योग थैरेपी की सुविधा मिलेगी और योग थैरेपिस्ट स्पेशलिस्ट की नियुक्ति हो जाएगी।
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भवन होने के बावजूद आयुष पद्धति से इलाज से वंचित हैं मरीज
योगाभ्यास, पंचकर्म आदि के लिए आई हैं मशीनें, वर्तमान में चल रही महज ओपीडी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिझड़ी (हमीरपुर)। आयुष अस्पताल बिझड़ी में अभी तक पंचकर्म, योगाभ्यास आदि की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। क्षेत्र में तीन वर्ष पूर्व आयुष अस्पताल के निर्माण कर करोड़ों की मशीनरी लगाई गई है लेकिन अस्पताल में विशेषज्ञ न होने से मशीनरी का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों को उपचार करवाने के लिए दूरदराज के अस्पतालों में भटकना पड़ रहा है। आयुष विभाग की ओर से चार करोड़ से अधिक राशि खर्च करके इस अस्पताल का निर्माण करवाया गया है। जब उद्घाटन हुआ तो लोगों को आस जगी थी कि यहां पर योगा थैरेपी की सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद लोगों को सुविधा नहीं मिल पा रही है।
वर्तमान में अस्पताल में महज ओपीडी की सुविधा है। इस आयुर्वेदिक अस्पताल में लोगों को थैरेपी, योग आदि की सुविधाएं भी मिलनी थी। इसके लिए करोड़ों की मशीनरी भी अस्पताल में आई लेकिन आज तक उनका इस्तेमाल नहीं हो पाया। मशीनें भवन में धूल फांक रही हैं। स्थानीय लोगों व्रिकम, संतोष, आदित्य, मीना, सलोचना आदि ने कहा कि अस्पताल तो बना दिया लेकिन यहां पर सुविधाएं नाममात्र हैं। एसे में सरकार को चाहिए कि यहां पर कर्मचारियों की तैनाती हो और लोगों को आयुष पद्धति से इलाज करवाने में सुविधा रहे। इस बारे में उपमंडलीय आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. जगतार सिंह ने कहा कि काफी पहले प्रस्ताव भेजा है। आगामी समय में जब आचार संहिता हटेगी तो हो सकता है कि जल्द ही यहां पर लोगों को योग थैरेपी की सुविधा मिलेगी और योग थैरेपिस्ट स्पेशलिस्ट की नियुक्ति हो जाएगी।
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