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Hamirpur (Himachal) News: नादौन के बेला में डोर सेट और गोल्डन वैरायटी के सेब तैयार
Wed, 21 May 2025 01:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 21 May 2025 01:03 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। नादौन के बेला में गर्म आवोहवा में निजी कंपनी में नौकरी करने वाले युवक ने सेब के पौधों को लगाकर दूसरी बार बंपर पैदावार पाई है। गर्म इलाकों में अब सेब की बागवानी की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है।
खास बात यह है कि महज चौथे वर्ष ही बंपर पैदावार हुई है। हालांकि तीसरे वर्ष भी इन पौधों में फल लगे थे, लेकिन मात्रा कम थी। इस बार काफी अधिक सेब लगे हैं। बेला निवासी विकास मेहरा पेशे से ग्राफिक डिजाइनर हैं। वह धर्मशाला में कार्यरत हैं। बागवानी के शौक के चलते उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर से सेब के चार पौधे चार वर्ष पहले लाए थे। इन पौधों को घर के आंगन में लगाया। विकास को बागवानी का शौक तो है लेकिन सेब की बागवानी की इतनी जानकारी नहीं थी।
ऐसे में पौधों की प्रूनिंग और अन्य जानकारी के लिए वह यू ट्यूब का सहारा लेते रहे। बीच-बीच में कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ भी उनका मार्गदर्शन करते रहते थे। विकास का कहना है कि उन्होंने शौकिया तौर पर यह पौधे लाए थे ओर अब इन पर बंपर फसल आने पर बेहद खुशी हुई है। डोर सेट और गोल्डन वैरायटी के चार पौधे लगाए थे, जो कि अब फसल दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अवकाश के दौरान जब घर आते हैं तो पौधों की प्रूनिंग करते हैं।
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कब टहनियों की कटिंग करनी है, कैसे देखभाल करनी है, सब यू-टयूब पर देखा और पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से पौधों की प्रूनिंग के टिप्स भी लिए। उन्होंने कहा कि वह अवकाश के दौरान ही यह कार्य करते हैं, जबकि रूटीन में उनकी मां पौधों की देखभाल करती रहती हैं। उन्होंने कहा कि तीन साल के पौधों ने ही फल देना शुरू कर दिए था लेकिन फसल कम थी।
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हमीरपुर। नादौन के बेला में गर्म आवोहवा में निजी कंपनी में नौकरी करने वाले युवक ने सेब के पौधों को लगाकर दूसरी बार बंपर पैदावार पाई है। गर्म इलाकों में अब सेब की बागवानी की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है।
खास बात यह है कि महज चौथे वर्ष ही बंपर पैदावार हुई है। हालांकि तीसरे वर्ष भी इन पौधों में फल लगे थे, लेकिन मात्रा कम थी। इस बार काफी अधिक सेब लगे हैं। बेला निवासी विकास मेहरा पेशे से ग्राफिक डिजाइनर हैं। वह धर्मशाला में कार्यरत हैं। बागवानी के शौक के चलते उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर से सेब के चार पौधे चार वर्ष पहले लाए थे। इन पौधों को घर के आंगन में लगाया। विकास को बागवानी का शौक तो है लेकिन सेब की बागवानी की इतनी जानकारी नहीं थी।
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ऐसे में पौधों की प्रूनिंग और अन्य जानकारी के लिए वह यू ट्यूब का सहारा लेते रहे। बीच-बीच में कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ भी उनका मार्गदर्शन करते रहते थे। विकास का कहना है कि उन्होंने शौकिया तौर पर यह पौधे लाए थे ओर अब इन पर बंपर फसल आने पर बेहद खुशी हुई है। डोर सेट और गोल्डन वैरायटी के चार पौधे लगाए थे, जो कि अब फसल दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अवकाश के दौरान जब घर आते हैं तो पौधों की प्रूनिंग करते हैं।
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कब टहनियों की कटिंग करनी है, कैसे देखभाल करनी है, सब यू-टयूब पर देखा और पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से पौधों की प्रूनिंग के टिप्स भी लिए। उन्होंने कहा कि वह अवकाश के दौरान ही यह कार्य करते हैं, जबकि रूटीन में उनकी मां पौधों की देखभाल करती रहती हैं। उन्होंने कहा कि तीन साल के पौधों ने ही फल देना शुरू कर दिए था लेकिन फसल कम थी।