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Hamirpur (Himachal) News: दियोटसिद्ध में श्रद्धालु ले सकेंगे हिमाचली व्यंजनों का स्वाद, बबरू और पतरोड़े भी मिलेंगे
Sun, 05 Apr 2026 01:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 05 Apr 2026 01:09 AM IST
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हमीरपुर। उत्तर भारत के प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में अब श्रद्धालुओं को पारंपरिक हिमाचली व्यंजनों का स्वाद चखने को मिलेगा। मंदिर परिसर में ग्राम संगठन दियोटसिद्ध के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अब बबरू, पतरोड़े, माह की दाल के भल्ले, सेपू बड़ी, कद्दू का खट्टा, सिड्डू सहित अन्य पारंपरिक पकवान बनाकर बेच सकेंगी।
मंदिर न्यास प्रशासन ने महिलाओं को दुकानों के साथ पारंपरिक खाद्य पदार्थ बेचने की अनुमति प्रदान कर दी है। इससे पहले महिलाओं को केवल झंडे और टोकरियां बेचने की ही अनुमति थी, जिससे उनकी आय सीमित थी। मांग को देखते हुए अब उन्हें पकवान बनाने और बेचने की छूट दी गई है।
इस पहल से न केवल महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर भी मिलेगा। साथ ही, श्रद्धालुओं को स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक स्वाद से रूबरू होने का मौका मिलेगा।
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दियोटसिद्ध में हर वर्ष हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, विशेषकर मेलों और अन्य आयोजनों के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में प्रशासन का यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय व्यंजनों और उत्पादों को भी प्रोत्साहित करेगा।
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस अनुमति के लिए न्यास प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। प्रशासन की ओर से महिलाओं को निर्धारित स्थान पर ही स्टॉल लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अन्य दुकानदारों को कोई असुविधा न हो।
उल्लेखनीय है कि बाबा बालक नाथ मंदिर न्यास ने जनवरी माह में ग्राम संगठन दियोटसिद्ध को अनुबंध के आधार पर दुकान आवंटित की थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
कोट
मंदिर परिसर में दुकान चला रही महिलाओं को अब पारंपरिक खाद्य पदार्थ बेचने की अनुमति मिल गई है। वे दुकान के साथ स्टॉल लगाकर हिमाचली पकवान बेच सकेंगी। पहले अनुमति न होने से उन्हें काफी दिक्कतें आ रही थीं। -राजेश शर्मा, खंड विकास अधिकारी, बिझड़ी
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मंदिर न्यास प्रशासन ने महिलाओं को दुकानों के साथ पारंपरिक खाद्य पदार्थ बेचने की अनुमति प्रदान कर दी है। इससे पहले महिलाओं को केवल झंडे और टोकरियां बेचने की ही अनुमति थी, जिससे उनकी आय सीमित थी। मांग को देखते हुए अब उन्हें पकवान बनाने और बेचने की छूट दी गई है।
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इस पहल से न केवल महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर भी मिलेगा। साथ ही, श्रद्धालुओं को स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक स्वाद से रूबरू होने का मौका मिलेगा।
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दियोटसिद्ध में हर वर्ष हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, विशेषकर मेलों और अन्य आयोजनों के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में प्रशासन का यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय व्यंजनों और उत्पादों को भी प्रोत्साहित करेगा।
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस अनुमति के लिए न्यास प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। प्रशासन की ओर से महिलाओं को निर्धारित स्थान पर ही स्टॉल लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अन्य दुकानदारों को कोई असुविधा न हो।
उल्लेखनीय है कि बाबा बालक नाथ मंदिर न्यास ने जनवरी माह में ग्राम संगठन दियोटसिद्ध को अनुबंध के आधार पर दुकान आवंटित की थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
कोट
मंदिर परिसर में दुकान चला रही महिलाओं को अब पारंपरिक खाद्य पदार्थ बेचने की अनुमति मिल गई है। वे दुकान के साथ स्टॉल लगाकर हिमाचली पकवान बेच सकेंगी। पहले अनुमति न होने से उन्हें काफी दिक्कतें आ रही थीं। -राजेश शर्मा, खंड विकास अधिकारी, बिझड़ी