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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Development work affected due to dissolution of trust of Baba Balak Nath temple

Hamirpur (Himachal) News: बाबा बालक नाथ मंदिर का ट्रस्ट भंग होने से विकास कार्य प्रभावित

Tue, 30 Jul 2024 07:09 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Tue, 30 Jul 2024 07:09 AM IST
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बिझड़ी (हमीरपुर)। बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट के कमेटी के भंग होने से मंदिर में प्रस्तावित विकास कार्य और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में गंभीर बाधा उत्पन्न हो रही है। पिछले दो वर्षों में मंदिर ट्रस्ट की दो बार कमेटी भंग हो चुकी है। अभी तक नए ट्रस्टियों का गठन नहीं हो पाया है।
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ट्रस्ट के गठन को लेकर पूर्व ट्रस्टियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, लेकिन मंदिर ट्रस्ट के वकील ने दावा किया है कि ट्रस्टियों के बिना भी ट्रस्ट की कार्रवाई चल सकती है। इस बीच, मंदिर में रोजाना धांधलियों की बढ़ती घटनाओं ने ट्रस्ट का गठन और अधिक जरूरी बना दिया है। पुराने ट्रस्टियों का कहना है कि जब तक नया ट्रस्ट गठित नहीं हो जाता, तब तक पुराने ट्रस्ट को भंग नहीं किया जाना चाहिए।
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बाबा बालक नाथ मंदिर के विकासात्मक कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए ट्रस्ट का गठन आवश्यक है। लगभग पौने दो साल पहले जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, तो उन्होंने जयराम सरकार के समय में शामिल हुए ट्रस्टियों को हटा दिया था। कांग्रेस के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल की अनुशंसा पर नए ट्रस्टियों को इसमें शामिल भी किया गया था।
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मगर जब इंद्रदत्त लखनपाल ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया तो प्रदेश सरकार ने फिर से ट्रस्टियों को भंग कर दिया। इसके बावजूद, उपचुनाव होने के बाद भी मंदिर न्यास कमेटी का गठन नहीं हो पाया है। मंदिर के पूर्व ट्रस्टी सोमनाथ शर्मा ने कहा कि ट्रस्टियों का गठन आवश्यक है ताकि विकासात्मक कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने अपील की कि पुराने ट्रस्ट को तब तक भंग नहीं किया जाए, जब तक नया ट्रस्ट गठित नहीं हो जाता।

उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी सुभाष ढटवलिया ने कहा कि ट्रस्टियों के नए गठन के लिए सरकार को पत्र लिखा जाएगा। बड़सर विधायक इंद्र दत्त लखनपाल ने भी माना कि मंदिर में नए-नए मामले सामने आ रहे हैं और नए ट्रस्टियों का गठन आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्टियों को लिखित में यह सुनिश्चित करना होगा कि वे कोई मानदेय नहीं लेंगे और मंदिर में पूरी निष्ठा से सेवा करेंगे।
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