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Hamirpur (Himachal) News: डॉग बाइट के मामले बढ़ने पर जागा विभाग, 28 से शुरू होगा टीकाकरण
Mon, 28 Sep 2026 05:50 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 28 Sep 2026 05:50 AM IST
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हमीरपुर जिले में ढाई साल में 11 हजार से अधिक लोगों को कुत्तों ने काटा
पशुपालन विभाग ने अभियान के लिए उपमंडल स्तर के अस्पतालों में 100 से 300 टीकों की खेप भेजी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। लावारिस कुत्तों के बढ़ते आतंक के बीच पशुपालन विभाग विश्व रेबीज दिवस पर 28 सितंबर से कुत्तों के निशुल्क टीकाकरण का अभियान शुरू करेगा । उपमंडल स्तर पर अस्पतालों में आयोजित होने वाले इस अभियान के तहत कुत्तों को रेबीज से बचाव के टीके लगाए जाएंगे। जिले में कुत्तों के काटने के मामले बढ़ने के बाद विभाग ने यह निर्णय लिया है। अभियान तीन सप्ताह तक चलाया जाएगा।
पशुपालन विभाग ने अभियान के लिए उपमंडल स्तर के अस्पतालों में 100 से 300 टीकों की खेप भेजी है। इसके अलावा जरूरत को देखते हुए करीब पांच हजार अतिरिक्त टीकों की मांग भी भेजी है। पशुपालन विभाग के अनुसार, अधिक से अधिक कुत्तों का टीकाकरण कर रेबीज के खतरे को कम करना है।
शहरी निकायों, प्रशासन और पंचायतों की ओर से नसबंदी और जागरूकता अभियान चलाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन कुत्तों के काटने के मामलों में कमी के बजाय लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जनवरी 2024 से जून 2026 तक जिले में 11 हजार से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो चुके हैं। औसतन हर दिन 15 से अधिक लोग एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और कामकाजी लोग भी शामिल हैं। वर्ष 2024 में कुत्तों के काटने के 4,269 मामले सामने आए थे। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 4,325 हो गई। वहीं, वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही 2,406 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
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पंचायत स्तर पर भी समस्या का नहीं हुआ स्थायी समाधान
शहर के बाजारों, बस अड्डों, अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी क्षेत्रों में लावारिस कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं। कई बार ये राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और बच्चों पर हमला कर देते हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी पंचायत स्तर पर इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में डॉग बाइट का खतरा सबसे अधिक रहता है और समय पर उपचार न मिलने पर रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का जोखिम बढ़ जाता है।
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कुत्ता काटने के बाद ये उपाय करें
कुत्ता काटने के बाद घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह और एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए। घरेलू उपचार या लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
कोट
-विश्व रेबीज दिवस के मौके पर टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। पर्याप्त टीके भेजे हैं।-डॉ. सुजय शर्मा, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग हमीरपुर
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पशुपालन विभाग ने अभियान के लिए उपमंडल स्तर के अस्पतालों में 100 से 300 टीकों की खेप भेजी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। लावारिस कुत्तों के बढ़ते आतंक के बीच पशुपालन विभाग विश्व रेबीज दिवस पर 28 सितंबर से कुत्तों के निशुल्क टीकाकरण का अभियान शुरू करेगा । उपमंडल स्तर पर अस्पतालों में आयोजित होने वाले इस अभियान के तहत कुत्तों को रेबीज से बचाव के टीके लगाए जाएंगे। जिले में कुत्तों के काटने के मामले बढ़ने के बाद विभाग ने यह निर्णय लिया है। अभियान तीन सप्ताह तक चलाया जाएगा।
पशुपालन विभाग ने अभियान के लिए उपमंडल स्तर के अस्पतालों में 100 से 300 टीकों की खेप भेजी है। इसके अलावा जरूरत को देखते हुए करीब पांच हजार अतिरिक्त टीकों की मांग भी भेजी है। पशुपालन विभाग के अनुसार, अधिक से अधिक कुत्तों का टीकाकरण कर रेबीज के खतरे को कम करना है।
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शहरी निकायों, प्रशासन और पंचायतों की ओर से नसबंदी और जागरूकता अभियान चलाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन कुत्तों के काटने के मामलों में कमी के बजाय लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जनवरी 2024 से जून 2026 तक जिले में 11 हजार से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो चुके हैं। औसतन हर दिन 15 से अधिक लोग एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और कामकाजी लोग भी शामिल हैं। वर्ष 2024 में कुत्तों के काटने के 4,269 मामले सामने आए थे। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 4,325 हो गई। वहीं, वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही 2,406 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
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पंचायत स्तर पर भी समस्या का नहीं हुआ स्थायी समाधान
शहर के बाजारों, बस अड्डों, अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी क्षेत्रों में लावारिस कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं। कई बार ये राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और बच्चों पर हमला कर देते हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी पंचायत स्तर पर इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में डॉग बाइट का खतरा सबसे अधिक रहता है और समय पर उपचार न मिलने पर रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का जोखिम बढ़ जाता है।
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कुत्ता काटने के बाद ये उपाय करें
कुत्ता काटने के बाद घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह और एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए। घरेलू उपचार या लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
कोट
-विश्व रेबीज दिवस के मौके पर टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। पर्याप्त टीके भेजे हैं।-डॉ. सुजय शर्मा, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग हमीरपुर