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ूचना प्रौद्योगिकी प्रवक्ता के लिए पांच साल के शैक्षिणक अनुभव का विरोध
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हमीरपुर। बेरोजगार युवाओं ने सूचना प्रौद्योगिकी प्रवक्ता स्कूल स्तर के लिए नई भर्ती एवं पदोन्नति नियम, जिसमें पांच साल तक पढ़ाने का अनुभव अनिवार्य किया गया है, इसका विरोध किया। अभ्यर्थियों का कहना है कि अन्य विषयों में किसी भी प्रवक्ता पद के भर्ती नियमों में यह शर्त नहीं है। इससे प्रतीत होता है कि वर्तमान सरकार भी पूर्व कांग्रेस सरकार की भांति पूर्व में कंपनी के माध्यम से नियुक्त सूचना प्रौद्योगिकी के प्रवक्ता को पिछले दरवाजे से नियुक्त करना चाह रही है, जबकि इस विषय का भर्ती नियम मामला प्रदेश उच्च न्यायालय में पहले से ही विचाराधीन है।
बेरोजगार युवाओं ने कहा कि भर्ती नियमों में पांच वर्ष के अनुभव वाली शर्त को तुरंत निरस्त किया जाए, ताकि नौकरी की तलाश कर रहे हजारों युवाओं को इस परीक्षा में बैठने का मौका प्राप्त हो सके। युवाओं नेे कहा कि कंपनी के माध्यम से 1200 लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए 25,000 युवाओं से धोखा करना वर्तमान सरकार को आगामी चुनावों में महंगा साबित हो सकता है। पूर्व में 2012 में 767 प्रवक्ताओं की नियुक्तियां पांच वर्ष अनुभव की शर्त के बिना प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग की ओर से की गई थी तो अब क्यों पिछले दरवाजे से इन पदों को भरने की योजना है।
युवाओं का कहना है कि इस शर्त से संविधान की धारा 309 का भी उल्लंघन होगा, क्योंकि वर्तमान में कंपनी के माध्यम से कार्यरत प्रवक्ता अपनी प्रथम नियुक्ति के समय आवश्यक शैक्षणिक योग्यता भी पूरी नहीं करते थे। साथ ही सरकार की ओर से निर्धारित मानदंडों, आरक्षण नीति का भी ध्यान नहीं रखा गया था। युवाओं रविंद्र कुमार, अनिल, तरुण, सागरिका, रिंकू, पूनम, रणजीत, कल्पना, अराधना, विपुल, अनिल, रियांस, हैप्पी, बलवीर, उर्चित आदि ने सरकार से मांग की है कि शैक्षणिक योग्यता को आधार मान कर एवं पांच वर्ष के अनुभव की शर्त हो हटाकर शीघ्र पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार प्राप्त हो सके।
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बेरोजगार युवाओं ने कहा कि भर्ती नियमों में पांच वर्ष के अनुभव वाली शर्त को तुरंत निरस्त किया जाए, ताकि नौकरी की तलाश कर रहे हजारों युवाओं को इस परीक्षा में बैठने का मौका प्राप्त हो सके। युवाओं नेे कहा कि कंपनी के माध्यम से 1200 लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए 25,000 युवाओं से धोखा करना वर्तमान सरकार को आगामी चुनावों में महंगा साबित हो सकता है। पूर्व में 2012 में 767 प्रवक्ताओं की नियुक्तियां पांच वर्ष अनुभव की शर्त के बिना प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग की ओर से की गई थी तो अब क्यों पिछले दरवाजे से इन पदों को भरने की योजना है।
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युवाओं का कहना है कि इस शर्त से संविधान की धारा 309 का भी उल्लंघन होगा, क्योंकि वर्तमान में कंपनी के माध्यम से कार्यरत प्रवक्ता अपनी प्रथम नियुक्ति के समय आवश्यक शैक्षणिक योग्यता भी पूरी नहीं करते थे। साथ ही सरकार की ओर से निर्धारित मानदंडों, आरक्षण नीति का भी ध्यान नहीं रखा गया था। युवाओं रविंद्र कुमार, अनिल, तरुण, सागरिका, रिंकू, पूनम, रणजीत, कल्पना, अराधना, विपुल, अनिल, रियांस, हैप्पी, बलवीर, उर्चित आदि ने सरकार से मांग की है कि शैक्षणिक योग्यता को आधार मान कर एवं पांच वर्ष के अनुभव की शर्त हो हटाकर शीघ्र पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार प्राप्त हो सके।
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