हिट एंड रन मामले के मुख्य आरोपी समेत चार गिरफ्तार
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जिला मुख्यालय हमीरपुर के मुख्य बस अड्डे के पास बुधवार रात कार से युवक को टक्कर मारकर फरार होने वाले मुख्य आरोपी चालक और उसके चार में से तीन दोस्तों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एक आरोपी भी अभी भी तलाश जारी है। पुलिस ने 36 घंटे के भीतर मामले को सुलझा लिया है। बता दें कि हादसे में कुसबाड़ निवासी मुनीष कुमार (19) की मौत हो गई। वीरवार को परिजनों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने दिनभर हमीरपुर शहर में चक्का जाम किया था। पुलिस शनिवार को चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश करेगी।डीसी रोहन चंद ठाकुर और एसपी अजय बौद्ध ने एएसपी शिव कुमार और एसआईटी की टीम के सदस्यों के साथ शुक्रवार शाम प्रेस वार्ता की और मामले का पटाक्षेप किया। उपायुक्त ने बताया कि एक संस्थान के बाहर लगी सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद उनका शक आरोपियों पर गहराया। चार युवकों को गिरफ्तार कर स्विफ्ट कार मुख्य आरोपी के घर से बरामद कर ली है।
डीसी ने बताया कि मुख्य आरोपी कार चालक दिलबर सिंह (22) पुत्र राजेंद्र कुमार निवासी पंधेहड़, लंबलू अपने चार दोस्तों विक्रांत पठानिया (19) निवासी सेरसवाहल, विकास जगोता (18) निवासी हमीरपुर, आशीष गौतम हमीरपुर और अनुराग के साथ एक शादी समारोह से वापस लौट रहे थे। हमीरपुर में रात 11.22 बजे वे युवक को टक्कर मारकर फरार हो गए। इसके बाद दिलबर कार (एचपी 22 बी 7991) लेकर अपने घर चला गया। यहां इन्होंने कार को छिपा दिया और निजी गाड़ी लेकर वापस हादसा स्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने पाया कि युवक की मौत हो गई है। वे वापस घर लौट गए और अगले दिन धरना प्रदर्शन देख चंडीगढ़ फरार हो गए। एक दिन चंडीगढ़ में रहने के बाद वे शुक्रवार सुबह मामला शांत देख वापस लौट आए। सीसीटीवी फुटेज और एक प्रत्यक्षदर्शी के स्विफ्ट कार बताने के बयान के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची और उन्हें उनके घर से दबोच लिया। पुलिस को पांचवें दोस्त अनुराग की तलाश है।
टूटा साइड मिरर और खून के सैंपल हुए मैच
हादसे के समय गाड़ी का साइड मिरर और बंपर का एक टुकड़ा टूट कर वहीं गिर गया था। बरामद गाड़ी से दोनों मैच कर गए। दिलबर की कार में खून के धब्बे भी मिले जिसके सैंपल मुनीष कुमार के खून से मैच कर गए। पुलिस ने पाया कि कार का फ्रंड शीशा भी टूटा हुआ था। पुलिस को अंदेशा है कि युवक नशा करके गाड़ी चला रहे थे।
एसपी, एएसपी बोले, प्रदर्शन की वजह से हुई देर
एसपी अजय बौद्ध और एएसपी शिव कुमार ने बताया कि प्रदर्शन की वजह से देरी हुई। पुलिस को वीरवार को पूरा दिन प्रदर्शनकारियों और बिगड़ी स्थिति को संभालने में लग गया। अगर प्रदर्शन न होता तो पुलिस इस मामले को बीते दिन ही सुलझा लेती।
नहीं निकला कांग्रेस नेता का बेटा
पुलिस ने खुलासा किया कि इस हादसे में कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक के बेटे का कोई हाथ नहीं है। ग्रामीणों ने शक जताया था, लेकिन आखिरकार सच सामने आ ही गया। जिला प्रशासन ने पीडि़त युवक के परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है।
1635 नंबर को क्लीन चिट के बाद घूमी जांच
पुलिस ने शक के आधार पर 1635 नंबर की चार कारों को जांच के लिए बुलाया था। इस दौरान इन वाहनों के चालकों से भी पूछताछ की गई। जिस कंपनी की यह कारें थीं तो उनके एक्सपर्ट को भी पुलिस ने बुलाया था। जांच के बाद सभी कंपनी एक्सपर्ट ने क्लीन चिट दे दी। फोरेंसिक साइंस विभाग मंडी से आई विशेषज्ञों की टीम ने भी दुर्घटनास्थल और कारों की जांच कर तथ्य जुटाए। इसके बाद पुलिस ने दूसरे पहलू पर सोचना शुरू किया और मामले का पटाक्षेप किया।