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सीएम को सत्ता का नशा, खरीद-फरोख्त के आरोपों के खिलाफ जाएंगे कोर्ट : आशीष
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। विधायक आशीष शर्मा ने मुख्यमंत्री के खरीद-फरोख्त के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि वे इस मसले को लेकर जल्द न्यायालय में जाएंगे। मुख्यमंत्री राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। बेवजह 15-15 करोड़ लेने वाले बयान दे रहे हैं। आरोप लगाया कि नौ विधायक जब राज्यसभा का वोट डालकर गए तो उनको पैसे का लोभ दिया गया, लेकिन हम बिकने वालों में से नहीं हैं। क्षेत्र की जनता जानती है कि उनका चरित्र क्या है और किस भाव से जनसेवा कर रहे हैं। लोगों को बरगलाने के लिए इस तरह की बयानबाजी शोभा नहीं देती है। अपने क्षेत्र और प्रदेश के हित के लिए विधायकी से त्याग पत्र दिया है। मुख्यमंत्री ने चौदह माह तक चुने हुए विधायकों से भेदभाव किया और मित्रों को रेवड़ियां बांटीं। हम जनता के कामों को लेकर मुख्यमंत्री के पास जाते रहे लेकिन उन्होंने मिलने तक का समय नहीं दिया। सुबह से लेकर शाम तक इनके कार्यालय के बाहर इंतज़ार करते रहे। लोगों के कामों को मुख्यमंत्री दरकिनार करके महज मित्र मंडली को ही खुश कर सत्ता सुख के लिए ही कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर राज्यसभा चुनाव के बाद इस्तीफा देना चाहिए था लेकिन इन्हें सत्ता का नशा है, जिसे वह छोड़ना नहीं चाहते हैं।
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हमीरपुर। विधायक आशीष शर्मा ने मुख्यमंत्री के खरीद-फरोख्त के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि वे इस मसले को लेकर जल्द न्यायालय में जाएंगे। मुख्यमंत्री राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। बेवजह 15-15 करोड़ लेने वाले बयान दे रहे हैं। आरोप लगाया कि नौ विधायक जब राज्यसभा का वोट डालकर गए तो उनको पैसे का लोभ दिया गया, लेकिन हम बिकने वालों में से नहीं हैं। क्षेत्र की जनता जानती है कि उनका चरित्र क्या है और किस भाव से जनसेवा कर रहे हैं। लोगों को बरगलाने के लिए इस तरह की बयानबाजी शोभा नहीं देती है। अपने क्षेत्र और प्रदेश के हित के लिए विधायकी से त्याग पत्र दिया है। मुख्यमंत्री ने चौदह माह तक चुने हुए विधायकों से भेदभाव किया और मित्रों को रेवड़ियां बांटीं। हम जनता के कामों को लेकर मुख्यमंत्री के पास जाते रहे लेकिन उन्होंने मिलने तक का समय नहीं दिया। सुबह से लेकर शाम तक इनके कार्यालय के बाहर इंतज़ार करते रहे। लोगों के कामों को मुख्यमंत्री दरकिनार करके महज मित्र मंडली को ही खुश कर सत्ता सुख के लिए ही कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर राज्यसभा चुनाव के बाद इस्तीफा देना चाहिए था लेकिन इन्हें सत्ता का नशा है, जिसे वह छोड़ना नहीं चाहते हैं।