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सड़क हादसे के घायलों को डेढ़ लाख तक कैशलैस इलाज की है सुविधा : उपायुक्त
Wed, 25 Jun 2025 12:30 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 25 Jun 2025 12:30 AM IST
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हमीरपुर। सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों का तुरंत उपचार सुनिश्चित करने के लिए सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से एक विशेष व्यवस्था की है। प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग भी इस योजना को लागू कर रहा है।
उपायुक्त एवं जिला सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर करने का प्रावधान किया है। ऐसे लोगों का अब आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में डेढ़ लाख रुपये तक कैशलैस इलाज हो सकता है। सड़क दुर्घटना में घायल होने पर सात दिन के भीतर इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है।
उपायुक्त ने सभी जिलावासियों से अपील की है कि अगर उनके सामने कोई भी सड़क दुर्घटना होती है तो वे तुरंत इसके शिकार लोगों की मदद के लिए आगे आएं और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाएं। ऐसी दुर्घटनाओं के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान यानी एक घंटे के भीतर घायलों को प्राथमिक उपचार की तत्काल आवश्यकता होती है। सड़क दुर्घटना के घायलों की तत्काल मदद करने वाले तथा उन्हें अस्पताल पहुंचाने वाले प्रत्यक्षदर्शियों से पुलिस भी कोई अनावश्यक पूछताछ नहीं करती है। ऐसे मददगार लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ‘गुड सेमेरिटन अवार्ड’ भी आरंभ किया है।
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उपायुक्त एवं जिला सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों को आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर करने का प्रावधान किया है। ऐसे लोगों का अब आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में डेढ़ लाख रुपये तक कैशलैस इलाज हो सकता है। सड़क दुर्घटना में घायल होने पर सात दिन के भीतर इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है।
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उपायुक्त ने सभी जिलावासियों से अपील की है कि अगर उनके सामने कोई भी सड़क दुर्घटना होती है तो वे तुरंत इसके शिकार लोगों की मदद के लिए आगे आएं और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाएं। ऐसी दुर्घटनाओं के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान यानी एक घंटे के भीतर घायलों को प्राथमिक उपचार की तत्काल आवश्यकता होती है। सड़क दुर्घटना के घायलों की तत्काल मदद करने वाले तथा उन्हें अस्पताल पहुंचाने वाले प्रत्यक्षदर्शियों से पुलिस भी कोई अनावश्यक पूछताछ नहीं करती है। ऐसे मददगार लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ‘गुड सेमेरिटन अवार्ड’ भी आरंभ किया है।
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