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Hamirpur (Himachal) News: चेक बाउंस मामले में बैंक की शिकायत खारिज, आरोपी बरी
Tue, 31 Mar 2026 12:25 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 31 Mar 2026 12:25 AM IST
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जरूरी दस्तावेज और रिकाॅर्ड पेश नहीं कर पाया बैंक, बिलासपुर निवासी कारोबारी दोषमुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर/बड़सर। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बड़सर मनु प्रिंजा की अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक शाखा हरसौर की दायर धारा 138 के तहत चेक बाउंस के एक मामले में साक्ष्यों के अभाव में आरोपी जसविंदर शर्मा को दोषमुक्त करार दिया है। शिकायतकर्ता पंजाब नेशनल बैंक, शाखा हरसौर ने आरोप लगाया था कि आरोपी जसविंदर शर्मा, निवासी गांव माकड़ी डाकघर जेजवीं जिला बिलासपुर ने जनरल स्टोर चलाने के लिए 6 लाख रुपये का ऋण लिया था।
बैंक का दावा था कि इस ऋण की अदायगी के लिए आरोपी ने 4 जुलाई 2018 को 7,72,000 रुपये का एक चेक जारी किया था, जो बैंक में लगाने पर कम फंड होने के चलते कारण बाउंस हो गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि बैंक की ओर से पेश किए गए मुख्य गवाह तत्कालीन शाखा प्रबंधक ऋण से संबंधित कोई भी स्वीकृत दस्तावेज या वितरण रिकॉर्ड पेश करने में विफल रहे।
क्रॉस-एग्जामिनेशन में यह स्पष्ट हुआ कि बैंक के पास ऋण लेनदेन का कोई सीधा और ठोस सबूत नहीं था। संबंधित मामले में साक्ष्यों की कमी और लोन दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया है। जसविंदर शर्मा को धारा 138 के आरोपों से बरी कर व्यक्तिगत और श्योरिटी बॉन्ड को भी रद्द करने के आदेश जारी किए हैं।
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हमीरपुर/बड़सर। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बड़सर मनु प्रिंजा की अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक शाखा हरसौर की दायर धारा 138 के तहत चेक बाउंस के एक मामले में साक्ष्यों के अभाव में आरोपी जसविंदर शर्मा को दोषमुक्त करार दिया है। शिकायतकर्ता पंजाब नेशनल बैंक, शाखा हरसौर ने आरोप लगाया था कि आरोपी जसविंदर शर्मा, निवासी गांव माकड़ी डाकघर जेजवीं जिला बिलासपुर ने जनरल स्टोर चलाने के लिए 6 लाख रुपये का ऋण लिया था।
बैंक का दावा था कि इस ऋण की अदायगी के लिए आरोपी ने 4 जुलाई 2018 को 7,72,000 रुपये का एक चेक जारी किया था, जो बैंक में लगाने पर कम फंड होने के चलते कारण बाउंस हो गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि बैंक की ओर से पेश किए गए मुख्य गवाह तत्कालीन शाखा प्रबंधक ऋण से संबंधित कोई भी स्वीकृत दस्तावेज या वितरण रिकॉर्ड पेश करने में विफल रहे।
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क्रॉस-एग्जामिनेशन में यह स्पष्ट हुआ कि बैंक के पास ऋण लेनदेन का कोई सीधा और ठोस सबूत नहीं था। संबंधित मामले में साक्ष्यों की कमी और लोन दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया है। जसविंदर शर्मा को धारा 138 के आरोपों से बरी कर व्यक्तिगत और श्योरिटी बॉन्ड को भी रद्द करने के आदेश जारी किए हैं।
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