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मौसम बदलते ही सर्दी, जुकाम की चपेट में आ रहे छोटे बच्चे
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मेडिकल कॉलेज हमीरपुर बच्चों के वार्ड में दाखिल बीमार बच्चे।
- फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। सर्दी का मौसम शुरू होते ही मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में सर्दी और जुकाम से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी है। रोजाना बाल रोग ओपीडी 70 से 80 के बीच है। इसमें औसतन 40 बच्चे इसी बीमारी से पीड़ित निकल रहे हैं। अस्पताल में जांच के दौरान जिन बच्चों की तबीयत अधिक खराब और निमोनिया के लक्षण हैं, उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है। आमतौर बच्चे घर पर नंगे पांव फर्श पर खेलते रहते हैं। इसके अलावा पानी के साथ खेलने से गुरेज नहीं करते। इस वजह से सर्दी-जुकाम की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे बच्चों का अगर समय पर इलाज न हो तो उन्हें निमोनिया होने का खतरा बना रहता है।
ऐसे में बाल रोग विशेषज्ञ अभिभावकों को बच्चों की विशेष देखभाल करने की सलाह दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में वर्तमान समय में करीब 18 बच्चे बाल वार्ड में भर्ती हैं। यह सभी बच्चे सर्दी जुकाम से पीड़ित हैं। इन बच्चों के इलाज के लिए अस्पताल प्रबंधन विशेष ध्यान दे रहा है। इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों में एडवांस स्टाक अस्पताल में मुहैया करवाया गया है। आमतौर पर नवंबर में मौसम में बदलाव होता है। पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण रात के समय शीतलहर भी चल रही है। इससे अक्सर छोटे बच्चों के बीमार होने की संभावना बनी रहती है। जबकि, अक्तूबर तक मौसम गर्म रहता है। ऐेसे मेें अचानक मौसम बदलने से बच्चों पर इसका असर अधिक पड़ता है।
इस संदर्भ में एसएमओ डॉ. रमेश चौहान ने बताया कि सर्द मौसम शुरू होते ही अस्पताल मेें सर्दी जुकाम से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि वह बच्चों को ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी पीने को दें और सर्द मौसम में बच्चों की देखभाल विशेष रूप से करें।
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ऐसे में बाल रोग विशेषज्ञ अभिभावकों को बच्चों की विशेष देखभाल करने की सलाह दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में वर्तमान समय में करीब 18 बच्चे बाल वार्ड में भर्ती हैं। यह सभी बच्चे सर्दी जुकाम से पीड़ित हैं। इन बच्चों के इलाज के लिए अस्पताल प्रबंधन विशेष ध्यान दे रहा है। इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों में एडवांस स्टाक अस्पताल में मुहैया करवाया गया है। आमतौर पर नवंबर में मौसम में बदलाव होता है। पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण रात के समय शीतलहर भी चल रही है। इससे अक्सर छोटे बच्चों के बीमार होने की संभावना बनी रहती है। जबकि, अक्तूबर तक मौसम गर्म रहता है। ऐेसे मेें अचानक मौसम बदलने से बच्चों पर इसका असर अधिक पड़ता है।
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इस संदर्भ में एसएमओ डॉ. रमेश चौहान ने बताया कि सर्द मौसम शुरू होते ही अस्पताल मेें सर्दी जुकाम से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि वह बच्चों को ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी पीने को दें और सर्द मौसम में बच्चों की देखभाल विशेष रूप से करें।
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