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Chamba News: आंगनबाड़ी और मिड-डे मिल कर्मियों ने मांगा श्रमिक कर्मचारी का दर्जा

Wed, 10 Dec 2025 11:04 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Wed, 10 Dec 2025 11:04 PM IST
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Anganwadi and mid-day meal workers demanded labour employee status.
चंबा। सीटू के बैनर तले आंगनबाड़ी और मिड-डे-मील वर्करों ने बुधवार को चंबा और चुवाड़ी अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोला। इस दौरान उपायुक्त चंबा मुकेश रेपसवाल और एसडीएम चुवाड़ी पारस अग्रवाल के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजे गए। यूनियन ने मांग की है कि 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन (2013) की सिफारिश को तत्काल लागू कर आंगनबाड़ी और मिड-डे मिल कर्मियों को श्रमिक कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
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साथ ही केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन महंगाई भत्ता तत्काल लागू हो। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आंगनबाड़ी कर्मियों को ग्रेच्युटी, पेंशन, चिकित्सा एवं मातृत्व अवकाश की सुविधा तुरंत मिले। मिड डे मिल कर्मियों को भी आंगनबाड़ी की तरह 20 आकस्मिक अवकाश दिए जाएं। वर्करों ने मांग की है कि मिड-डे मील कर्मियों का पूरा वेतन हर माह की एक तारीख को एकमुश्त उनके बैंक खाते में डाला जाए। साथ ही 12 माह का वेतन दिया जाए। योजना को कक्षा आठ तक सीमित न रखकर कक्षा 12 तक बढ़ाया जाए। वेदांता, नंद घर, पिरामल आईएसए आदि के नाम पर आंगनबाड़ी और मिड डे मील योजनाओं के निजीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए। मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं को रद्द कर पुरानी श्रम कानून व्यवस्था बहाल की जाए। उन्हाेंने कहा कि यूनियन लगातार इन मुद्दों को सरकार के सामने उठा रही है। लेकिन, सरकार कोई सकारात्मक कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है। आने वाले समय में इन मांगों को लेकर पूरे देश में निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। चुवाड़ी में सुदेश, लता, सुमन, दर्शना, बबिता, पदमा, पुष्पा, बॉबी, स्वर्णा और चंबा में नरेंद्र, भीम सेन अशोक, सरोज, सीमा, अंजू, आशा और पानो आदि शामिल रहे।
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ये लगाए आरोप
वर्करों ने कहा कि देश में 28 लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका एवं 26 लाख से अधिक मिड डे मील कुक हेल्परों के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उल्टा स्कीम को निजीकरण करने की कोशिश जारी है। पूरे देश में स्कीम वर्कर्स आक्रोश में हैं। इतना ही नहीं, 2009 से मिड डे मील कर्मियों का और 2020 से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय एक रुपया भी नहीं बढ़ा है। केंद्र की सरकार का नारी सशक्तिकरण का नारा झूठा साबित हुआ है। स्कीम वर्कर का शोषण जारी है।
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