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अमर उजाला शिक्षा अभियान : कोरोना काल में बच्चों में आई नैतिक मूल्यों की कमी

Sun, 10 Apr 2022 11:15 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Apr 2022 11:15 PM IST
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Amar Ujala Education Campaign: Lack of moral values ??in children during Corona period
लंबलू स्कूल में बच्चों को पढ़ाते शिक्षक। (फाइल फोटो। - फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। कोरोनाकाल में दो साल घरों में ऑनलाइन पढ़ाई करने के बाद स्कूल खुलने पर बच्चों में नैतिक मूल्यों की कमी देखी जा रही है। विद्यार्थी अध्यापकों का सत्कार करने में कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं। शिक्षक अब इसमें सुधार करने में मेहनत कर रहे हैं। दो साल घरों में पढ़ाई करने के बाद बच्चों में मानसिक, शारीरिक और व्यावहारिक परिवर्तन आए हैं। स्कूलों में प्रार्थना सभा न होने से बच्चे नैतिक मूल्य भूल गए हैं। पहले प्रार्थना सभा में अध्यापक बच्चों को नैतिक मूल्यों की जानकारी देते थे। अब राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लबंलू के संस्कृत अध्यापक डॉ. तिलक राज शर्मा बच्चों को पढ़ाई के साथ बड़ों का आदर, अनुशासन, मोबाइल का कम प्रयोग, भविष्य के प्रति जागरूकता, संस्कृत मंत्र उच्चारण सिखा रहे हैं।
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दो साल बाद शिक्षकों को बच्चों को पहले की तरह पढ़ाना चुनौतीपूर्ण है। कई बार बच्चे अध्यापक से पास से बिना बोले ही गुजर जाते हैं, जबकि कक्षाओं में भी अध्यापकों को बच्चों की अनुशासनहीनता देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में डॉ. तिलक राज शर्मा ने बच्चों में नैतिक मूल्यों के विकास का बीड़ा उठाया है और कक्षा के अलावा अन्य खाली समय में बच्चों को नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ा रहे हैं। केवल अपने स्कूल तक ही सीमित न होकर उन्होंने हाल ही में कई एनएसएस कैंपों में जाकर बच्चों को नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक किया है।
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भविष्य के प्रति कर रहे सचेत : शर्मा
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लंबलू के संस्कृत अध्यापक डॉ. तिलक राज शर्मा का कहना है कि स्कूलों में दो साल प्रार्थना सभा न होने से बच्चों में नैतिक मूल्यों में काफी कमी आई है। इसके चलते कक्षाओं तथा खाली समय में बच्चों को नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया जा रहा है, ताकि बच्चे बड़ों का आदर सत्कार करना न भूलें और भविष्य के प्रति सचेत रहे। स्कूल में बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है। जो बच्चे स्कूल नहीं आ रहे थे, उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अनुशासनहीनता न करने और मोबाइल के कम प्रयोग के लिए बच्चों को जागरूक किया जा रहा है।
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बच्चों पर पढ़ाई का कम डाल रहे बोझ : गोपाल
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लंबलू के प्रधानाचार्य जय गोपाल शर्मा का कहना है कि दो साल घरों में रहने के बाद बच्चों की आदतें बदली हैं। कक्षाओं में अध्यापक कई गतिविधियां करवा रहे हैं। जिससे जो बच्चे स्कूल आने में आनाकानी कर रहे थे, वे स्कूल में दैनिक रूप से आ रहे हैं। वहीं, स्कूल में अध्यापक बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम डाल रहे हैं, जिससे बच्चे प्रतिदिन स्कूल आ रहे हैं।
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