हमीरपुर। गिफ्ट पेपर, कपड़े, बनावटी मोती और घर पर उपलब्ध अन्य सामग्री से बनीं स्वदेशी राखियां भाइयों की कलाई की शोभा बढ़ाएंगी। कोरोना के चलते मंदी से किसी भी गरीब बहन के भाई की कलाई सूनी न रहे, इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्र झनिक्कर की कार्यकर्ता कुसुमलता ने सराहनीय प्रयास किया है। कुसुम ने घर पर ही चार्ट पेपर, सिलाई से बचे हुए कपड़े, बाजार में मिलने वाले नकली बनावटी मोती और धागों से राखियां तैयार की हैं। इन राखियों को तैयार करने का मुख्य उद्देश्य एक तो गरीब बहनों को इन्हें वितरित करना है और दूसरा स्वदेशी चीजों को अपनाना है। कुसुम ने खुद ही राखियां बनाईं हैं और लोगों से भी स्वदेशी राखियां पहनने की अपील की है।
कुसुम ने इन राखियों को गरीब लड़कियों को वितरित करना भी शुरू कर दिया है और बाकायदा इनके लिए चार्ट पेपर से थैले बनाकर उन पर डिजाइन व नारे उकेरे हैं, जो स्वदेशी अपनाने का संदेश दे रहे हैं। इससे पूर्व इस आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने फेस शील्ड भी तैयार कर कोरोना योद्धाओं को निशुल्क बांटी हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का कहना है कि लॉकडाउन के कारण कई लोगों की नौकरी व रोजगार छूट गया है। गरीब तपके पर सबसे ज्यादा मार है। महंगाई इतनी है कि एक राखी बाजार से अगर खरीदनी हो तो 40 से 50 रुपये से कम नहीं आती। गरीब तपके की लड़कियों के लिए राखी खरीदना भी कई बार मुश्किल हो जाता है। आसपास के पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से गरीब लड़कियों को राखियां दी जा रही हैं। अगर किसी बच्ची को जरूरत हो तो वह उनसे निशुल्क राखी ले सकती हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग एचसी शर्मा ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कोरोना योद्धा के रूप में भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे रही हैं। कुसुम के प्रयास सराहनीय हैं।